
Masihi Geet Sangrah
आगमन (Advent)
81 (८१)
"Wake awake for night is passing."
8. 9. 8. 8. 9. 8. 6. 6. 4. 4. 8. Wachet auf.
PHILLIP NICOLAI, 1556-1608.
१ जाग उठो पुकारा हुआ
जगा के बोलता है पहरूआ
यिरूशलीम निश्चिन्त मत हो
आधी रात अब हुई आओ
चौकस हो कुवांरियो उठो
दुल्हे से मिलने को सिद्ध हो
वह आता धूम के साथ
दीपक अब लेओ हाथ
हल्लेलूयाह
विवाह को अब तुम सिद्ध होओ
और निकालो उससे मिलने को ।।
२ सैहून बात जो सुनने आती
तो अपने मन में आनन्द पाती
वेग उठके होती है हर्षित
उसका दुल्हा बड़े प्रेम से
बिभव के साथ आता है स्वर्ग से
वह बोलती है कि सब कुछ सिद्ध
हे प्रभु यीशु आ
प्राणनाथ तू दुल्हिन का
हल्लेलूयाह
बुलाहट पर हम आनन्द कर
सब जाते हैं विवाह के घर ।।
३ बीन और बर्बत हम बजावें
स्वर्ग और पृथ्वी के लोग सब गावें
ईश्वर की स्तुति और प्रशंसा
स्वर्ग दूतों का जो समूह है ।
और सन्तों की जो बड़ी भीड़ है
सब गाते हैं गीत सु-स्वर का
न आँख ने देखा है
न कान ने सुना है
ऐसा आनन्द
गीत गाने को सब आइयो
और दण्डवत करो प्रभु को ।।
82 (८२)
"Behold the Bridegroom cometh."
7. 6. 7. 6. D. Morning Light or St. Theodulph Tune Standup-Standup
GEORGE F. ROOT, 1830-1895.
१ जाग उठो हे विश्वसियों
और हाथ में लो मशाल
अंधेरा होने चाहता
अब जाँचो अपना हाल ।
तुम कान और मन लगाकर
पहरू की सुनो बात
दुल्हा है आनेवाला
जल्द होगी आधी रात ।।
२ मशालें तुम सुधारो
और डालो उन पर तेल
ख्रीष्ट यीशु चला आता
जल्द होगा उससे मेल ।
दुल्हे का स्वागत करने
तुम निकली आनन्द से
ठीक स्वर से मन लगाकर
गीत गाओ स्तुति के ।।
३ अब उसको देर न होगी
तुम रहो सब तैयार
हर स्थान में मची रहती
फिर आने की पुकार
सुबुद्ध कुंवारियों सा
सिद्ध रखो अपना दीप
हाँ इस को सच तुम जानो
कि दुल्हा है समीप ।।
83 (८३)
"O, how shall I receive Thee."
7. 6. 7. 6. D. St. Theodulph or Morning Light
PEULUS GERHAEDT, 1607-76.
१ मैं कैसे तुझे भेटूं
ग्राह्य होऊँ किस प्रकार
हे जग के आस्रा हेतु
हे मेरे प्राण सिंगार
हे यीशु आप ही दे दे
अब मुझे बुद्धि-ज्ञान
तब जो कुछ तुझे भाता
मैं बूझ कर जानूंगा ।।
२ खजूर की हरी डारें
सैहून बिथराती है
मैं मीठे मधुर गान में
मिलाऊं मन मोदमय
नित मेरा मन प्रफुल्लित
हो तेरी स्तुति में
और रहें नित प्रमुदित
तेरी ही सेवा में ।।
३ धन तेरा प्रेम अनन्ता
जब पड़े थे देह प्राण
दुःख में अथाह अत्यन्ता
तब किया तूने त्राण
जब चैन और कुशल हीना
मैं भटके फिरता था
तब तू ने मुझे चीन्ही
हो धन्यवाद सदा ।।
४ मैं भारी बन्ध में रहा
तू आया भन्जनबन्ध
दुःख निदा मैंने सहा
तू आया दयावन्त
मुझ दीन को तू बढ़ाता
और देता धन अक्षय
जो न संसार के जैसा
कभी घट जाता है ।।
५ स्वर्ग धाम से तुझे लाया
पास मेरे कौन सा नेम
वह केवल तेरी दया
तेरा मनोहर प्रेम
हम में हे जगतारक
तू समस्त जग का पाप
बिलाप सन्ताप भयानक
उठा ले जाता आप ।।
६ तो आप सहायक प्रिय
दे हमें शांति चैन
आ त्राणी तेरे लिये
हम रास्ता देखते हैं ।
आ जयवन्त कुशलपति
विरूद्धता सब मिटा
और अपनी तारित जाति
स्वर्ग-राज्य में ले उठा ।।
84 (८४)
"On Jordan's bank the Baptist's cry."
L. M. -- Winchester Old Melcombe.
J. CHANDLER.
१ यर्दन के तीर सुन पड़ता है
यह शब्द कि प्रभु आता है ।
जाग उठो सुनो सारे देश
राजाधिराज का सुसंदेश ।।
२ शुद्ध करो अपने मनों को
ईश्वर का मार्ग तुम सिद्ध करो ।
हे प्राणी हृदय को सवार
कि टिकने पावे आनेहार ।।
३ तू ही हमारा शरण स्थान
तू ही है प्रतिफल और त्राण ।
ज्यों फूल बिना जल कुम्हलाते हैं
हम तुझ बिन क्षीण हो जाते ।
४ सब रोगयों पर हाथ फैला
हर पतित जन को वेग उठा ।
इस पापमय जग पर हो प्रकाश
सूझ पड़े नई भू आकाश ।।
५ अब होवे स्तुति पुत्र की
कि जिसने आके मुक्ति दी ।
पिता का भी हो स्तुतिगान
पवित्र आत्मा का हो मान ।।
85 (८५)
"Hark the glad Sound."
С. М. Bristol or Nativity.
PHILLP DODDRIDGE. 1702-51
१ सुन मुक्तिदाता आता है
जो आनेवाला था ।
हर मन सिंहासन उस का हो
हर शब्द हो स्तुति का ।।
२ वह आता हर एक पापी को
छुड़ाने पापों से ।
टूट जाते उसके आने पर
सब बन्धन लोहे के ।।
३ वह आता सब के मन पर से
पर्दा हटाने को ।
और ज्योत अनन्त भी आँखों में
अंधों की डालने को ।।
४ वह आता टूटे मनों को
बाँध देने कृपा से ।
और धनी करने दीनों को
धन से अनुग्रह के ।।
५ नित तुझे कुशल के प्रधान
हम धन्य कहेंगे ।
और तेरे जय जयकार का गान
सब स्वर्ग में करेंगे ।।
86 (८६)
8. 7. 8. 7. 4. 7. Dismissal or Eton College.
१ हे परमेश्वर तेरे मुख को
महिमा में जो है अनुप
देखने की न शक्त मनुष को
आत्मा है तू बिन स्वरूप
स्वर्ग के राजा
जग का तू है महाभूप ।
२ उतरा था तू जगदीसा
अपना प्रेम दिखाने को
प्रगट हुआ प्रभु यीशु
भ्रष्टों के बचाने को
हे परमेश्वर
मेरा मुक्तिदायक हो ।
३ तेरे गुण स्वभाव फैलाने
यीशु आया इस संसार
जग का पाप सन्ताप मिटाने
जग के करने को उद्धार
कृपा सागर
कर तू मेरा भी निस्तार ।
४ काटने को हमारे दुःख को
पाया उसने दुःख और कष्ट
देने हमें धर्म और सुख को
जो शैतान से हुए भ्रष्ट
यीशु आया
पाप संताप को करने नष्ट ।
५ मुझे ग्रहण कर हे प्रभु
मन कठोर हमारे तोड़
तू हम आस्त्रितों का कभू
दुःख के सागर में न छोड़ ।
मरन काल तक
हम से अपना मुंह न मोड़ ।।
87 (८७)
Bhajan Tunes No. 1.
JOHN PARSONS.
दीनदयाल सकल बर दाता, दे यश गावन को उपदेशा ।।
१ निथरे नीर अगम नद नाईं, तोर दया जल बहत हमेशा ।
बाते तनम न कुशल मिलत है, धन्य जगत पालक परमेशा ।।
२ शठ अपराधी नर तारन को, लियो प्रभु सेवक को भाषा ।
दीनन संग संकट पथ धारा, क्रूस सहित सहिलाज कलेशा ।।
३ निज जन अन्तर विकल करने को, है प्रभु तोह शक्ति विशेषा ।
तेरी आत्मा गुण तिन चित में, दिवस जोति सब करत प्रवेशा ।।
४ तब यश मरत भुवन में होवे, सरग भुवन जिमि होत अशेषा ।
आश्रित मुख निज भजन कराओ, ठरि कुटिल मन दुरमति लेशा ।।