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स्तोत्र (Psalms)

558 (५५८)

Psalm 1.

१ वह पुरुष है क्या ही धन्य सही, जो दुष्टों की युक्ति पर चलता नहीं ।। २ न पापी के मार्ग पर वह रहता खड़ा, न बीच ठट्ठा करने वालों के बैठा ।। ३ यहोवा की व्यवस्था से रहता मगन, और उसको रात दिन होती उसकी लगन ।। ४ उस वृक्ष के समान वह रहेगा सदा, जो बहती नदी पर लगाया गया ।। ५ वह देता है फल अपने वेले से ही, न पत्ती मुरझाती है उसकी कभी ।। ६ वह अपने सब कम्मों में होता भला, और रहता फलदायी फलदायी सदा ।। ७ पर वैसा न होता है दुष्टों का कुल, वह पवन से उड़ती भूसी के है तुल ।। ८ इस हेतु न न्याय में दुष्ट स्थिर रहेगा, न धर्म्मियों की मंडली में ठहर सकेगा ।। ९ इ यहोवा सुधि भलों के मार्गों की लेगा, पर दुष्टों का मार्ग सत्यानाश होवेगा ।।

559 (५५९)

Psalm 15.

कोरसः - तेरे घर में हे प्रभु कौन सुरक्षित रहेगा ।। कौन पवित्र परबत पर चढ़ के सदा रहेगा ।। १ सीधी चाल का चलनेहार धर्म से काम जो करता, अपने मन से सच बोलता चुगली नहीं करता ।। २ और जो किसी दूसरे से बुराई नहीं करता, न अपने पड़ोसी की वह निन्दा कभी सुनता ।। ३ जिसके आगे बुरा पुरुष है निकम्मा ठहरा, पर यहोवा के डरवैयों का वह आदर करता ।। ४ किरिया खा फिर हानि देख के तौभी न बदलता, किसी को उधार से दे कर कभी ब्याज न लेता ।। ५ निर्दोष के सताने निमित्त घूस न कभी लेता, ऐसा काम जो करता रहे कभी न टलेगा ।।

560 (५६०)

Psalm 23.Chord - D | S- Ballad | T-085

१ मेरी न होवेगी घटी प्रभु जो चरवाहा है, हरी हरी घास में लेके मुझे वह बैठाता है ।। २ निर्मल नालियों के ऊपर मुझे वह ले जाता है, और वह जी में जी ले आके मुझे फिर जिलाता है ।। ३ अपने सच्चे नाम के निमित्त मुझे वह छुड़ाता है, और वह धर्म के मार्ग के ऊपर मुझे नित्य चलाता है ।। ४ मृत्यु छाया का जो जंगल जब मैं उसमें जाऊँगा, कैसा घोर हो अंधियारा कुछ भी भय न खाऊँगा ।। ५ क्योंकि जब लों तू हे प्रभु रहा करे मेरे साथ, तेरा सोंटा तेरी लाठी सम्भालेंगे कृपानाथ ।। ६ मेरे बैरियों के आगे मेज तो तू बिछावेगा, तेल भी मेरे सिर के ऊपर प्रभु तू उण्डेलेगा ।। ७ मेरा प्याला भरा होगा कृपा दया जीवन भर, मेरे संग रहेंगे सदा मैं रहूँगा तेरे घर ।।

561 (५६१)

Psalm 24.

कोरसः - प्रभु यहोवा राजा, है वह प्रतापी राजा है ।। १ ऊँचे करो सिर दरवाजों, ऊँचे हो सब द्वारों, जां प्रतापी राजा आवे, सिर तब ऊँचे करो ।। २ यह प्रतापी राजा कौन है, राजा कौन विभव का, युद्ध में जिसका है पराक्रम, वह राजा विभव का ।। ३ ऊँचे करो सिर दरवाजों, ऊँचे हो सब द्वारों, जां प्रतापी राजा आवे, सिर तब ऊँचे करो ।। ४ यह प्रतापी राजा कौन है, राजा कौन विभव का, सेनाओं का जो यहोवा, राजा वह विभव का ।।

562 (५६२)

Psalm 27.

कोरसः - है डर मुझे किस का जो ईश्वर हो साथ, वह ज्योति है मेरी उद्धार उसके साथ ।। १ यहोवा है गढ़ मेरे जीवन का दृढ़, मैं किस का भय खाऊँ क्यों होऊँ अस्थिर ।। २ जब ही मेरे वह शत्रु बदकार, मेरे ऊपर चढ़ आवेंगे मार के ललकार ।। ३ कि खा जावें वे मेरा कच्चा ही मांस, सो ठेस खा गिरेंगे न उठने की आस ।। ४ और मुझ पर जो कभी चढ़ आवे सेना, तौभी मेरे दिल को न भय होवेगा ।। ५ जो मेरे विरोध में भी उठे लड़ाई, उस बीच में यहोवा रहेगा सहाई ।।

563 (५६३)

Psalm 46.

कोरसः - परमेश्वर शरणस्थान और बल हमारा है, सहायक वह संकट में जो सहज से मिलता है ।। १ इसलिये कुछ डर नहीं है चाहे पृथ्वी उलट जाये, और सब पर्वत चाहे डोलकर बीच समुद्र गिर भी जायें ।। २ चाहे गरजे भी समुद्र उसके जल सब फेनाएं, और उसके बढ़ जाने ही से सब पहाड़ भी कांप उठें ।। ३ नदी एक है जिस की धारें ईश्वर हो के नगर में, जिसका प्रभु है यहोवा सत आनंद को देती है ।। ४ है परमेश्वर उनके बीच में वह न कभी टलेगा, पौ फटते ही प्रभु उसकी नित्य सहायता करेगा ।। ५ जाति जाति गरज उठे लगें डगमगाने लोग, प्रभु जब बोल उठे पृथ्वी है तब पिघल जाने योग्य ।। ६ सेनाओं का जो यहोवा संग हमारे सदा है, याकूब का अनंत परमेश्वर ऊँचा गढ़ हमारा है ।।

564 (५६४)

Psalm 65.

कोरसः - सैहून के बीच हे प्रभु चुप रहना स्तुति हैं और तेरे लिये मन्नतें पूरी की जाती हैं ।। १ प्रार्थना का सुननेहारा है तू हे कृपामय और तेरे पास सब प्राणी अवश्य आते हैं ।। २ पाप मुझ पर प्रबल हुए और काम अधर्मं के छुटकारा तू ही देगा सारे अपराधों से ।। ३ तू जिसको चुनता प्रभु वह सचमुच धन्य है तेरे समीप जो रहें आशिष अनंत पाये ।। ४ हम तेरे आंगनों में बास नित्य करेंगे उस के उत्तम द्रव्यों से हम तृप्त हो रहेंगे ।। ५ छुड़ाने वाला प्रभु अपने डरवैयों का भयानक कर्मों द्वारा मुंह मांगा देवोगा ।। ६ सब दूर के रहने हारे पृथ्वी समुद्र के हे ईश्वर तेरे ऊपर भरोसा रखेगा ।।

565 (५६५)

Psalm 67.

१ अपना अनुग्रह ईश्वर हम सभों पर दिखावे, आशिष देवे प्रकाश मुख का सभों पर चमकावे ।। २ तेरा मार्ग इस धरती ऊपर प्रभु जाना जावे, जातियों में तेरी मुक्ति साफ पहिचानी जावे ।। ३ हे परमेश्वर हर एक देश में हो तेरी प्रशंसा, तेरा धन्य मान के सब लोग करें तेरी महिमा ।। ४ सारी जातियां एक साथ मिलकर आनंद नित करेंगी, और राज्य राज्य की प्रजा तेरा जयजयकार करेंगी ।। ५ क्योंकि न्याय तू सब लोगों का आप ही चुकावेगा, धरती पर के सब राज्यों को मार्ग तू दिखावेगा ।। ६ हे परमेश्वर हर एक देश में हो तेरी प्रशंसा, तेरा धन्य मान के सब लोग करें तेरी महिमा ।। ७ हुई है इस धरती ऊपर उपज बहुतेरी, देगा परमेश्वर आशिषें घनेरी ।। ८ आशिष हमें ईश्वर देगा अन्त लों पृथ्वी के, और सब लोग सारे राज्यों के उसका भय मानेंगे ।।

566 (५६६)

Psalm 90.

१ तू पीढ़ी से पीढ़ी लों प्रभु धाम बना रहा, हमारे लिये शरणस्थान तू ही है ठहरा ।। २ जब अपनी सामर्थं ही से तू ने सब कुछ बनाया, अनादिकाल से अन्त लो परमेश्वर तू ही ठहरा ।। ३ तू मनुष्य को लौटा करके चूर करता है उसको, और उससे कहता है कि हे मनुष्यो लौट आओ ।। ४ हजार बरस तेरे आगे है परमेश्वर ऐसे, बीते हुए दिन व रात के एक पहर के जैसे ।। ५ तू मनुष्य को बहा देता वह स्वप्न ठहरा है, वह भोर को बढ़ने हारी घास सरीखे होता है ।। ६ भोर को वह फूला करती और बढ़ती ही रहती है, पर सांझ तक कटकर गिरती और मुर्झा ही जाती है ।। ७ इसलिये कि हम तेरे कोप और क्रोध से नाश भये, और तेरी जलजलाहट से हम घबरा ही गये ।। ८ जितने दिन दुःख हम पाते और क्लेश भोगते आये हैं, उतने बरस हम तेरे हाथ से आनंद भी पायें ।। ९ अपनी मनोहरता हे प्रभु हम पर प्रगट कर, और काम हमारे हाथ का दृढ़ हमारे लिये कर ।।

567 (५६७)

Psalm 95.

१ आओ प्रभु की बड़ाई गावें दिल के बल के साथ, सारे जग का मुक्तिदाता उसको भजें धन्य साथ, प्रभु है चट्टान जिससे पूरी मुक्ति है ।। २ जाके करेंगे बड़ाई उसकी जो हमारा मीत, साथ आनंद के सम्मुख होके गावें हम पवित्र गीत, धन्य हो उसका जिसके पूरी मुक्ति हैं ।। ३ क्योंकि यह महा परमेश्वर पृथ्वी स्वर्ग का राजा है, सारे देवताओं के ऊपर वह अकेला प्रभु है, वही है प्रभु जिससे पूरी मुक्ति है ।। ४ पृथ्वी के गहरे स्थान पर है उसी का अधिकार, उसके हाथ में सब कुछ रहता भूमि समुद्र पहाड़, सब कुछ उसका है जिससे पूरी मुक्ति है ।। ५ आओ झुककर दण्डवत् करें अपने मन के बल से ही, उसके आगे घुटने टेकें कि वह है परमेश्वर ही, कर्त्ता वही है जिससे पूरी मुक्ति है ।। ६ क्योंकि वह सभों का प्रभु हम उसी के सेवक हैं, हम उसकी चराई की प्रजा उसके हाथ की भेड़ें हैं, उसी की सुनें जिससे पूरी मुक्ति है ।।

568 (५६८)

Psalm 100.

१ अब करो सारे लोगों प्रशंसा प्रभु की, आनंद के साथ तुम करो सेवा परमेश्वर की ।। २ साथ जय जयकार तुम आओ समीप यहोवा के, और उसके सम्मुख गाओ भजन परमेश्वर के ।। ३ यहोवा को तुम जानो कि निश्चय ईश्वर है, बनाया उसने हमें हां कर्त्ता वही है ।। ४ हम सचमुच उसकी प्रजा और भेड़ें हैं, साथ धन्य स्तुति प्रवेश अब करना है ।। ५ प्रशंसा करते हुए और उसका धन्य मान, उसके पवित्र घर में हम करें स्तुतिगान ।। ६ कि है यहोवा भला नित्य करुणा सही, और पीढ़ी पीढ़ी उसकी सच्चाई रहेगी ।।

569 (५६९)

Psalm 121.

कोरसः - आँखें अपनी पहाड़ों ओर उठाऊँ, सहाय के लिये किसको मैं पुकारूँ ।। १ मेरी सहाय यहोवा ही में है, जिसने धरती आकाश बनाया है, तेरे प्राण को टलने वह न देगा ।। २ तेरा रक्षक न कभी ऊंघावे, तेरे प्रभु को नींद भी न आवे, इस्राएल का रक्षक भी न सोवेगा ।। ३ यहोवा ही है तेरा रखवाला, तेरे ऊपर वह छां करनेवाला, वह तेरी दाहिनी ओर आड़ रहेगा ।। ४ न दिन को सूरज तुझे सतावे, न रात को चांद कुछ दुःख पहुँचावे, सारी विपत्ति से होगी रक्षा ।। ५ वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा, वह तेरे आने जाने में रक्षा, अब से ले सदा करता रहेगा ।।

570 (५७०)

Psalm 122.

१ मैं आनंदित हुआ जब कहने लगे, कि आओ यहोवा के घर चलिये ।। २ हे यरुशलेम नगर यहोवा के, तेरे फाटकों से हम खड़े हुए ।। ३ हे यरुशलेम तू अद्भुत ही बना, तेरे घरों का समूह कैसा घना ।। ४ यहोवा के सब गोत्रों के लोग वहाँ, धन्यवाद करने जाते हैं उसके नाम का ।। ५ वहाँ निमित्त दाऊद के घराने के, हैं न्याय के सिहांसन धरे हुए ।। ६ मांगो वर यरुशलेम की शान्ति के, तेरी प्रेमी कुशल से ही रहेगी ।।

571 (५७१)

Psalm 136.

कोरसः - धन्यवाद करो यहोवा का प्यारो ।। १ ईश्वरों का वह परमेश्वर धन्यवाद करो उसका, क्योंकि वह तो भला ही है करुणा उसकी है सदा ।। २ प्रभुओं का जो है प्रभु धन्यवाद करो उसका, कर्म आश्चर्य वही करता करुणा उसकी है सदा ।। ३ बुद्धि से आकाश बनाया धन्यवाद करो उसका, जल पर पृथ्वी को फैलाया करुणा उसकी है सदा ।। ४ बड़ी ज्योतियां भी बनाईं धन्यवाद करो उसका, स्वामी दिन का सूरज किया करुणा उसकी है सदा ।। ५ रात पर करने प्रभुता को धन्यवाद करो उसका, रखा तारागण और चांद करुणा उसकी है सदा ।। ६ मिस्र के पहिलौठे मारे बलवन्त हाथ से निकाला, उनके बीच से इस्राएल को करुणा उसकी है सदा ।। ७ लाल समुद्र दो खण्ड करके धन्यवाद करो उसका, इस्राएल बीच से पार कर दिया करुणा उसकी है सदा ।।

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