
Masihi Geet Sangrah
#### 106 (१०६)
*Н. Т. В. 120.*
*SHANKAR DAYAL*
१ न पूछो अजीजो कि ईसा है कब से ।
जमीं आस्माँ कुछ न था है वह तब से ।।
२ हुआ आज वह बत्न इ मरियम से पैदा ।
जो अफजल है आला है बाला है सब से ।।
३ मुबारक मुबारक मुबारक मुबारक ।
निकलती सदा है सही सब के लब से ।।
४ बियाबान में रात को एक फिरिश्तः ।
गड़रियों पे जाहिर हुआ हुक्म इ रब्ब से ।।
५ कहा आज पैदा हुआ है मसीहा ।
जहाँ को है फख ऐसे आली नसब से ।।
६ मजूसियों ने उस का देखा सितारा ।
चले सिजदः करने को जोश इ तरबे से ।।
७ नजर आया जब चिहरः इ पाक ईसा ।
समाये न तन में खुशी के सबब से ।।
८ दिया निज लोबान मुर्ख और सोना ।
किया सिजदः गिरकर जमीं पर अदब से ।।
९ बिला-शिक्क बरी उस की है जात इ बाला ।
गुनाह से खता से जफा से गजब से ।।
१० शफी इ जहाँ सुलह का शाहजादः ।
पुकारो उसे इस मुबारक लबक से ।।
११ तह इ दिल से ईसा पे ईमान लाओ ।
यह फरहत कहो हर शफाअत-तलब से ।।
#### 107 (१०७)
*Η. Τ. Β. 122.*
*Chord - C# | S- Dholak | T-102*
१ मसीहे जमां आज पैदा हुआ है ।
शाह इ मुरसला आज पैदा हुआ है ।।
२ मुबारक मुबारक मुबारक मुबारक ।
कि नूर इ जहाँ आज पैदा हुआ है ।।
३ फलक पर फरिशतों ने यह गीत गाया ।
शफी इ जहाँ आज पैदा हुआ है ।।
४ खबर जिसकी नबियों ने दी थी जहाँ को ।
वह शाह इ शहाँ आज पैदा हुआ है ।।
५ मेरे दर्द और उलफत मिटाने की खातिर ।
बड़ा मेहरबाँ आज पैदा हुआ है ।।
६ दिखा अब तू खुश हो कि मुंजी जहाँ में ।
पाये-आसीआँ आज पैदा हुआ है ।।
#### 108 (१०८)
*Η. Τ. Β. 137.*
*JOHN PARSONS.*
१ हुई थी मुल्क इ इस्त्रायेल, सना फरिश्तों की ।
सुनी हैरान चरवाहों ने, सदा फरिश्तों की ।।
२ खुदा-तआला की हम्द हो, दुनिया में सुलह हो ।
खैरख्वाही हो इनसान की, यह गीत फरिशतों की ।।
३ फकत इनसाँ करते हैं, तारीफ इ बादशाहान ।
तो किसके वास्ते हो रही, गजल फरिश्तों की ।।
४ खालिक था मखलूकात का, मुजस्सम अब हुआ ।
इसी बेपायाँ बात से, खुशी फरिश्तों की ।।
५ ले सूरत आदमजाद की, नजात बख्शी है ।
तो क्या दुरुस्त ओलाजिम है, तारीफ फरिश्तों की ।।
६ की है तुम्हारी मखलसी, मिलो ऐ सादिको ।
शुकराना गीतें कीजियो, मानिन्द फरिश्तों की ।।
७ ऐ सब बदकारो गौर करो, देखो मुहब्बत को ।
तुम्हारे दिल में हो मकबूल, सलाह फरिश्तों की ।।
८ कहता है मुझ से ऐ खुदा, अब तेरा उम्मेदवार ।
मुझ को हमेशा करने दे, सुहबत फरिश्तों की ।।