
Masihi Geet Sangrah
संयमकाल (Lent)
#### 115 (११५)
*“Come every soul by sin oppressed."*
*C. M.-- Only trust him*
*J. H. STOCKION.*
१ आओ जो थकित कलेशत हो
विश्राम है यीशु पास
उस ही के हाथ को पकड़ लो
करो उस पर विश्वास ।।
कोरस :- वह त्राता मुक्तिदाता
वह बुलाता है
पाप को तजो उसको भजो
वह बचाता है ।।
२ वही है सत और मुक्ति द्वार
स्वर्गधाम पहुँचाने को
हुआ अकेला धर्म अवतार
सब पाप मिटाने को ।।
३ हे पापी जा उस धारा पास
और मन के पाप धो डाल
उस ही पर रख तू अपनी आस
हो शाँति से निहाल ।
४ मसीह के चेलों में मिल जा
और थाम ले उसका हाथ
मन उसकी प्रीति से मत हटा
जो रहता तेरे साथ ।।
#### 116 (११६)
*“God loved the World of sinners lost."*
*C. M.-- Punjabi Tune.*
*MRS. STOCKION.*
*Chord - D | S-6/8 | T-080*
१ ईश्वर ने अद्भुत रीति से
इस जग को किया प्यार
और दिया अपने पुत्र को
कि सब का हो उद्धार
कोरस :- जयजयजय मसीह की जय
जो क्रूस पर मुआ है
है उसका प्रेम असीम अपार
जय जय मसीह की जय ।।
२ ईश्वर का पुत्र मृत्युंजय
विश्वास से मेरा है
वह अपने रक्त से करता शुद्ध
और मुक्ति देता है ।।
३ विश्वासियों आनन्दित हो
तुम को वह देता है
कि यहीं चखो वहीं सुख
जो सदा स्वर्ग में हैं ।।
४ शैतान का बल अब हुआ नाश
यह गीत हम सबका हो
और मरनकाल यीशु की जय
करें आनन्दित हो ।।
#### 117 (११७)
*"Jesus and shall it ever be."*
*L. M. Mainzer or Breslau.*
*JOSEPH GRIGG, 1728-68.*
१ यीशु क्या कभी होवेगा
कि तुझ से मैं लजाऊँगा ।
जिसकी स्तुति दूतगण करते
तू जो है प्रतापमय सदा ।।
२ क्या उस मौत से मैं लजाऊँ
जो वह है मेरा त्राणाधार ।
यदि मैं उससे लजाऊँ
है कारण मेरा दुर्बल प्यार ।।
३ उससे लजाऊँ ? हाँ जब पाप
मुझे नहीं धो डालना हो ।
जब मुझे हो न डर न दुख
न आत्मा को बचाना हो ।।
४ तब तक मैं करूँगा घमण्ड
उस पर जो मेरा त्राता है ।
और सदा मेरा भाग यह हो
वह मुझ से न लजाता है ।।
#### 118 (११८)
*7s. Wollt Ihr Wissen*
१ कौन है मेरा उत्तम ज्ञान
मेरे मुंह का सुबखान
कौन है मेरा पूर्ण आह्लाद
मेरा धन और धन्यवाद
ख्रीष्ट जो क्रूस पर मरा था ।।
२ कौन है मेरे मन की प्रीति
मेरा आस्रा पूर्ण प्रतीत
कौन है मेरे मन का बल
मेरी शरण आड़ और ढाल
ख्रीष्ट जो क्रूस पर मरा था ।।
३ कौन हर संकट में सहाय
कौन अकाल में भोजन हैं
कौन जब लगती प्राण को प्यास
शांति जब मैं हूँ उदास
ख्रीष्ट जो क्रूस पर मरा था ।।
४ कौन है मेरा मृत्युंजय
मरण काल में जो सहाय
वह जो मुझे सर्वदा
अपने पास बढ़ावेगा
ख्रीष्ट जो क्रूस पर मरा था ।।
५ धन्य मान हे मेरे प्राण
यीशु ख्रीष्ट का कर बखान
हाँ प्रशंसा ख्रीष्ट की हो
अभी से सनातन लों ।
कि वह क्रूस पर मरा था ।।
#### 119 (११९)
*"I am coming to the cross."*
*7s. S. S. S. 477.*
*Chord - F | S- E.Movie/"---" | T- "..."*
१ क्रूस पास अब मैं आता हूँ
उस में आश्रा पाता हूँ
हुआ जां सत बलिदान
जिससे होता मेरा त्राण ।।
कोरसः- ख्रीष्ट मैं रखता तुझपर आस
आता हूँ मैं कलवरी पास
क्रूस की आशिष मुझे दे
मुझे अब बचा तू ले ।।
२ मैं तो पापी क्लेशित था
अपने कर्म से दुःखी था
मुक्ति का ढूंढ़ता था उपाय
जानता था न सत सहाय ।।
३ यीशु तू है मेरा नाथ
पकड़े रह तू मेरा हाथ
केवल तू है सत अवतार
केवल तुझ से है उद्धार ।।
#### 120 (१२०)
*Look to the Saviour on Calvary's tree."*
*9. 9. 9. 5. and Ch. S. S. S. 427.*
*Chord - G/F# | S-6/8 | T-084*
१ क्रूस ही के पास जहाँ रक्त बहा
पापों से दबे तहाँ गया ।
रक्त से यह मन मेरा शुद्ध हुआ
उसकी होवे जय ।।
कोरस :- उसकी होवे जय (२)
रक्त से यह मन मेरा शुद्ध हुआ
उसकी होवे जय
२ निश्चय सब दूर हुए मेरे पाप
राज करता है मन में यीशु आप ।
क्रूस ही का है मुझ पर प्रताप
उसकी होवे जय ।।
३ ख्रीष्ट यीशु ने मुझे शुद्ध किया
सुन्दर वह सोता है क्रूस ही का ।
उस पास मैं जाकर संतुष्ट हुआ
उसकी होवे जय ।।
४ निर्मल वह सोता और आशिषमय
उससे सब पाप तेरे होते क्षय ।
जल्द आकर अभी होजा निर्भय
उसकी होवे जय ।।
#### 121 (१२१)
*“O render thanks to God above."*
*L. M. Hursley or Abends.*
१ धन मान के कहो उसकी जय
जो अनन्त प्रेम का सोता है ।
आरम्भ से उसकी करूणा
रही और रहेगी सदा ।।
२ कौन उसके अद्भुत कामों का
योग्य वर्णन कर सकेगा ।
गुणों का गाना भी उसके
न बनता मानवी होठों से ।।
३ वे धन हैं और उनका है क्षेम
जो पालन करते उसके नेम ।
जो उसकी इच्छा जानते हैं
और उसकी आज्ञा मानते हैं ।।
४ दे मुझे वह अनुग्रह जो
तू देता चुने हुओ को ।
छुड़ाने जब तू आवेगा
हे प्रभु मुझे भी छुड़ा ।।