
Masihi Geet Sangrah
परमेश्वर पिता (God the Father)
37 (३७)
"Now thank we all our God."
6s. Nun Danket.
MARTIN RINKART, 1586-1619.
१ अब मन और मुंह और हाथ
ईश्वर की ओर उठाओ
और उसका बड़ा प्रेम
और उत्तम काज सराहो
वह हम पर कृपावान
दयाल करूणामय
हमारे बालपन से
आज तक ठहरता है ।।
२ जीवन भर कुशल क्षेम
परमेश्वर हम को देवे
कि हममें धर्म और प्रेम
और शान्ति बढ़ती जावे
हे प्रभु कृपा कर
हमें सदा सम्भाल
संसार पर जय दिला
सब संकट से निकाल ।।
३ ईश्वर को धन्यवाद
पिता सराहो जावे
पुत्र को महातम हो
धर्मात्मा स्तुति पावे
जो है और रहेगा
जैसा आरम्भ में था
त्रिएक परमेश्वर को
प्रशंसा हो सदा ।।
38 (३८)
"O God our help in ages past."
C. M. St. Anne.
ISSAK WATTS 1674-1748.
१ अनादिकाल से शरणस्थान
हमारा तू रहा ।
और अनन्तकाल लों है पिता
तू वैसा रहेगा ।।
२ तेरी छाया में तेरे भक्त
सदा निडर रहे ।
सो हम भी तेरी शरण में
बखटके रहेंगे ।।
३ पहाड़ जब तक न बने थे
न पृथ्वी सृजी थी ।
तब ही से तू परमेश्वर है
और नित रहेगा भी ।।
४ ज्यों रात का पिछला पहर अब
वेग बीतता जाता है ।
त्यों तेरे लेखे चतुर्युग
क्षण में निकलता है ।।
५ ज्यों धारा बहा करती है
काल कटते जाते हैं ।
त्यों पीढ़ी पीढ़ी के सब लोग
सपने से होते हैं ।।
६ हे ईश्वर इस दुःख सागर में
हमारा पालक हो ।
हमारा अब सहायक रह
और आसरा सदा लों ।।
39 (३९)
"All people that on earth do dwell."
L. M. Old Hundred or Bresian.
WILLIAM KETHE, 1561-94.
१ इस जग के रहने वाले सब
प्रभु की स्तुति करो अब ।
उसका सुनाओ समाचार
और उसका करो जय जयकार ।।
२ यहोवाह ईश्वर है सचमुच
उसी ने सृजा है सब कुछ ।
वह हम भेड़ों का है रखवाल
वह सदा रहता प्रतिपाल ।।
३ पास आओ उसके आंगनों में
गीत गाते बड़े आनन्द से
नित उसके नाम की करो जय
कि सही करना उचित है ।।
४ हमारा ईश्वर खरा है
दृढ़ उसका दया रहती है ।।
उसकी सच्चाई रहत नित
और सदा रहेगी निश्चित ।।
५ पिता और पुत्र और आत्मा की
हो स्तुति स्वर्ग और जग में भी
जय उसकी करें मनुष्य जात
और दुतगण सारे दिन ओ रात।
40 (४०)
"Praise Thou the Lord O my Soul."
10. 8. 10. 8. 8.8.4.4. Halle.
J. HERENSCHMIDT, 1675-1723.
१ ईश्वर की स्तुति कर प्रिय प्राण तू
अपने जीवन भर जब तक मैं रहूँ
मैं नित गाऊँगा उसका नाम
उसको प्रशंसा दे हर जाम
वह जीवननाथ है सभों का
रक्षक और पालक प्रिय पिता
हाल्लेलूयाह हाल्लेलूयाह ।।
२ जितने महान है सम्पूर्ण पृथ्वी पर
जितने मनुष्य हैं ऊँचे और पस्त
उन पर हे मन तू भरोसा मत कर
जो निर्बल हैं और मृत्यु ग्रस्त
वे सब के सब हैं निरूपकार
ईश्वर को सामर्थ्य है अपार
हाल्लेलूयाह हाल्लेलूयाह ।।
३ उसको हर दशा में धन्य जानो
जिसका परमेश्वर है रखवार
जिसका धाम अटल सनातन मानो
जिसका ख्रीष्ट यीशु ही है सार
जो ईश्वर है सृष्टि करता
उसकी सच्चाई दृढ़ सदा
हाल्लेलूयाह हाल्लेलूयाह ।।
41 (४१)
C. M. Bedford or Richmond.
१ परमेश्वर कौन और कैसा है
कौन उसका जाननेहार ।
वह न मनुष्य के ऐसा है
पर आत्मा निराकार ।।
२ न अंग न रंग न रूप न रेख
है श्री परमेश्वर की ।
पर उसके सत अवतार को देख
जो है ख्रीष्ट यीशु ही ।।
३ परमेश्वर का तुम देखो प्रेम
जो प्रगट हुआ है ।
कि जग को देने कुशलक्षेम
पुत्र निज दिया है ।।
४ यों ईश्वर प्रेम की ज्योत अपार
जग पर चमकाता है ।
मिटाता है वह सब अंधकार
वह मिटाता है ।।
५ हे ईश्वर पुत्र दीन दयाल
की धारण तू ने देह ।
ख्रीष्ट तू जो सचमुच है कृपाल
उपजाता कैसा स्नेह ।।
42 (४२)
"A mighty fortress is our God."
8. 7. 8. 7. 6. 6. 6. 7. Ein Feste Burg.
MARTIN LUTHER, 1483-1546.
१ परमेश्वर में एक दृढ़ पहाड़
एक पक्का गढ़ और शरण
दुरदिनों में हमारी आड़
हर दुःख में दुःखहरण
वह महादुष्ट जो है
अब क्रोध से ज्वलित है
देखो उसको सिंह समान
लड़ाका ढीठ बलवान
तथापि हम न डरें ।।
२ सच हमसे कुछ न बनेगा
हम में न बल न मति
पर उसको वेग ही पटकेगा
एक जयवन्त सेनापति
वह कौन तू पुछता है
वही ख्रीष्ट यीशु है
जो सर्वसामर्थी है
न दूसरा ईश्वर भी है
जीत अंत को उसकी होगी ।
३ और जो हमारी हर एक ओर
शैतान की सेना आती
हां हम पर चढ़ता एक करोड़
जीत तो हमारी रहती
संसार प्रधान शैतान
भयंकर हो कोपवान
हमको न उस से भय
है निश्चित उसका क्षय
एक बात उसको गिराती ।।
४ जो बचन है हमारे साथ
कौन उस को हम से लेगा
हम को यीशु मसीह प्राणनाथ
आत्मा के दान भी देगा
तो ले जो चाहता है
जो कुछ हमारा है
हो धन वा मान व जान
सब कुछ जो है नाशमान
स्वर्ग राज हमारा होगा ।।
43 (४३)
"Commit Thou every burden."
7. 6. 7. 6. D. St. Theodulph or Morning Light.
PAULUS GERHARDT, 1607-76.
१ सौंप दे तू अपनी राहें
और मन का भार और भय
उस ही के सच्चे पाल में
जो स्वर्ग चलाता है
जो मार्ग और दौड़ दिखाता
अनगिनित तारों को
पथ निश्चय बता सकता
तेरे भी चलने को ।।
२ प्रभु पर आसरा छोड़ दे
कि तेरा भला हो
उस ही के कार्य देख ले
कि तेरा सफल हो
विकल हो चिन्ता द्वारा
कुछ बन न पड़ेगा
ईश्वर है देनेहारा
उससे जो माँगेगा ।।
३ हे दीनदयालु पिता
तू देख कर जानता है
क्या अच्छा है क्या बुरा
शरीर को जो नाशमय
और जो कुछ तुझे भाता
तू करता हे शूरमा
और स्थिति गत में लाता
जो हुई तेरी चाह ।।
४ मार्ग तेरे हर प्रकार के
उपाय तू करता आज
दया आशिष से भरके
तू करता अपना काज
कौन है जो तुझे थांमे
हां कौन रोक सकता हैं
जब तू निज प्यारे बाल को
क्षेम देना चाहता है ।।
५ मिटा हे कृपासिन्धु
मिटा हमारा दुःख
सम्भाल हमें हे प्रभु
निदान दे परम सुख
ले तू हमारी सुधि
सब दिन में मृत्यु लों
तब करेंगे नित स्तुति
स्वर्ग में सनातन लों ।।
44 (४४)
"Praise thou the Lord the almighty.”
14. 14. 4. 7. 8. Lobe Den Herren.
JOACHIM NEANDER, 1650-80.
Chord - E | S- Waltz | T-120
१ धन्य है परमेश्वर । तुम उसी का धन्यवाद गाओ ।
स्वर्ग के सब दूतों के राग में राग अपना मिलाओ ।
सब उस के संग
छेड़ो बीण गाओ तुम गीत ।
प्रभु का भजन सुनाओ ।।
२ धन्य है परमेश्वर । वह करता सब भला और अच्छा ।
अपने पंख नीचे वह करता है तुम्हारी रक्षा ।
प्रभु दयाल
रहता है नित प्रतिपाल ।
जानता तुम्हारी सब इच्छा ।।
३ धन्य है परमेश्वर । अद्भुत उसने तुम्हें बनाया ।
तुम्हें सुख चैन देके कृपा के मार्ग पर चलाया ।
किया उपकार ।
प्रभु ने तुम्हें बार बार ।
अपनी ही आड़ में छिपाया ।।
४ धन्य है परमेश्वर । तुम्हारे वह घर का बरदाई ।
स्वर्ग पर से वर्षा सी कृपा पर कृपा बरसाई ।
भूलियो मत
प्रभु बलवन्त है और सत ।
कितनी प्रीत तुम पर दिखाई ।।
५ धन्य है परमेश्वर । सब मिलके गुण प्रभु का गाओ ।
सब जिन को स्वास है हमारे संग भजन सुनाओ ।
वह है जगमूल
मनुआ उसे मत भूल ।
स्तुति करके कहो आमीन ।।
45 (४५)
"O worship the King."
10. 10. 11. 11. Hanover or Lyons.
ROBERT GRANT 1785-1838.
१ हम ईश्वर महान का गावें धन्यवाद
वह है परमात्मा अनन्त और अनाद ।
स्वयंभू परमेश्वर अदृश्य निराकार
वह जग अधिपति और सब का आधार ।।
२ सृष्टिकर्त्ता रक्षक और सर्वशक्तिमान
सर्वज्ञानी पवित्र और न्यायी महान ।
वह असम और अगम गुणसागर अपार
वह सब का है दाता और त्राण करनेहार ।।
३ कौन प्रभु के भेद का कब हुआ सज्ञान
हां ख्रीष्ट में प्रगट परमेश्वर महान ।
दयाल होके आया बचाने संसार
वह देहदारी हुआ यह प्रेम है अपार ।।
४ पापमोचन और मुक्ति अब यीशु के हाथ
त्राण खोजी को देता है त्राण कृपानाथ ।
सो रक्खे हम यीशु पर मन से विश्वास
कि पावें हम उससे अब मुक्ति की आस ।।
46 (४६)
8. 7. 8. 7. Batty or Mariners.
१ हे परमेश्वर रक्षक मेरे
तेरा प्रेम मैं जानता हूँ
पाया करता हूँ दान तेरे
तेरा धन्य मैं मानता हूँ ।।
२ भोजन वस्त्र तू ने दिया
दिया सब कुछ दीनदयाल
रक्षण मेरा तू ने किया
सदा रक्षण कर रखवाल ।।
३ सब कुछ मैंने तुझ से पाया
तौभी तेरा किया पाप
अब मैं पापों से लजाता
उनसे मुझे है सन्ताप ।।
४ प्रभु यीशु रूधिर तेरा
मुझे शुद्ध कर सकता है
मन पवित्र कर तू मेरा
करूंगा मैं तेरी जय ।।
47 (४७)
"Our Father."
8.7.8.7.4.7. Dismissal.
१ हे हमारे स्वर्गीय पिता
तेरा नाम पवित्र हो
तेरा राज्य सर्वत्र आवे
तेरी इच्छा पूरी हो
जैसे स्वर्ग पर
वैसे पृथ्वी पर भी हो ।।
२ हमें प्रतिदिन की रोटी
दया करके आज तू दे
और अपराध जो हम से हुए
क्षमा कर तू कृपा से
जैसे हम भी
क्षमा करते औरों के ।।
३ तू परीक्षा में न डालकर
हमें दुष्टों से बचा
क्योंकि तेरा है पराक्रम
राज्य और महिमा सदा
हम सब कहें
आमीन एसा होवेगा ।।
48 (४८)
Bhajan Tunes No. 60.
जय परमेश्वर जय अति पावन, जय जय स्वर्ग निवासी ।
जय त्रिभुवन के सिर्जनहारे, जय धर्मी पितु शासी ।
मन में भटक गये हम तोसे, तदपि तात तू भासी ।
आत्मा तनु को तुही बनाओ, जय पितु नाम विकासी ।
सिर्जन करि पुनि राशि बिठायो, तुही पिता सुखराशी ।
जन्म पुनर्जन लाभ तुही से, होत सदा अघनाशी ।
प्रभु सुत छाप हृदय करू मेरे, दोनों जन्म विकासी ।
जै जै सात स्वर्ग के राजा, जै जै दुःख बिनाशी ।
पतित सुपावन जय जग भावन, जै यीशु अविनाशी ।
49 (४९)
Bhajan Tunes No. 1
दीनदयाल हमारे प्रभु जी, तोर चरण पर नेह करों रे ।
१ देह हमारी आप बनाई, धूलक अद्भुत रूप अनुपा ।
लखत जगत शुभकाज तिहारो, सकल सृष्टि के तुमही भूपा ।।
२ समुझि सके को यह जग रचना, अचरज है सब तेरो कर्मा ।
देखि निहारा खात अचम्भा, बूझि पड़त नहिं एको मर्मा ।।
३ परमेश्वर तुम आदर लायक नाम तिहारो भजवे योगू ।
अगन समाना तेज सरूपी, तव महिमा जाने तुअ लोगू ।।
४ जिहि गुण गावत दिवगण चूके, महिमा जाको अपरम्पारा ।
छीन अधीन कहां लग बरणे, प्रभुजी मनसा पूरणि हारा ।।
50 (५०)
Gazal Tunes Nos. 105 & 106.
SHUJAAT ALI
१ या रब्ब तेरी जनाब में हर्गिज कमी नहीं ।
तुझ सा जहाँ के बीच तो कोई गनी नहीं ।।
२ जो कुछ कि खुबियाँ हैं सो तेरी ही जीत में ।
तेरे सिवाय और तो कोई धनी नहीं ।।
३ आसी की अर्ज तुझ से है तू सुन ले ऐ गनी ।
अपने फजल के गंज से तू कर मुझे धनी ।।