
Masihi Geet Sangrah
विदाई (Farewell)
492 (४९२)
“Blest be the tie that binds.” JOHN FAWCETT, 1739-1817.
१ धन्य हो वह प्रेम का बन्ध जो हमको बांधता है सम्बन्धी दिलों का है संग जैसा कि स्वर्ग में हो । २ पिता के आसन हम बिन्ती करते हैं हमारे भय दुःख सुख और आश उद्योग भी एक से हैं । ३ हम दुःख में भागी हैं संग भार उठाते हैं सहभागी होकर आपस में आँसू बहाते हैं । ४ जब भाई से भाई हो दूर मन होते हैं उदास पर मनों की एकताई है पूर फिर मिलने की है आश । ५ उस उत्तम आशा से हम साहस पाते हैं प्रतीक्षा उसकी करते हैं उस दिन को ताकते हैं । ६ तब शोक और श्रम से दूर और पाप से भी निर्बन्ध सिद्ध प्रेम और मित्रता से पूर नित्य करेंगे आनंद ।
493 (४९३)
“God be with you till we meet again.” JEREMIAH RANKIN, 1828-1904.
१ ईश्वर साथ हो जब तक न मिलें अपने वचन से सम्भाले अपनी भेड़ों संग चरावे ईश्वर साथ हो जब तक न मिलें ।। कोरस :- जब तक न मिलें जब तक न मिलें स्वर्ग में प्यारे यीशु पास जब तक न मिलें जब तक न मिलें ईश्वर साथ हो जब तक न मिलें ।।
२ ईश्वर साथ हो जब तक न मिलें पंख के तले नित्य छिपावे प्रतिदिन का मान खिलावे ईश्वर साथ हो जब तक न मिलें ।।
३ ईश्वर साथ हो जब तक न मिलें यदि जोखिम में तू पड़े अपनी बांह से तब वह धरे ईश्वर साथ हो जब तक न मिलें ।।
४ ईश्वर साथ हो जब तक न मिलें प्रेम का झंडा वह फहरावे लहर मृत्यु की वह थामे ईश्वर साथ हो जब तक न मिलें ।।
494 (४९४)
“With the sweet word of peace.” G. WATSON.
१ शान्ति के वाक्य से हम करते हैं विदा शान्ति की धारा की हो बढ़ती सदा ।।
२ प्रार्थना के वाक्य से हम अपने भाइयों को रक्षा में तेरी ही सौंपते तू रक्षक हो ।।
३ प्रेम के अब वाक्य साथ चाहते कुशल अभंग हमारा तेरा प्रेम है नाथ हो उनके संग ।।
४ विश्वास में हो निर्भय हम आते तेरे पास तू जीते मरते हर समय हो उन की आश ।।
५ आशा के भागी हो आनंद से जावेंगे और प्रेम में बने रह करके गान गावेंगे ।।
६ हो शान्ति आशा प्रेम विश्वास और प्रार्थना साथ जब तक न उस पार साथ क्षेम मिलावे नाथ ।।