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प्रभु भोज (The Lord's Supper)

209 (२०९)

7s. Zurich or Ratisbon.

JOHANN FRANCK, 1677.

१ अपने को हे प्राण संवार

पाप का बंधन तोड़ उतार

निकल आ उजाले में

अपनी ज्योति चमकने दे

क्यों जो तेरा त्राता है

तेरे कने आता है ।।

२ सिद्ध हो दुलहिन के समान

उसकी भेंट को धन्य मान

मन के फाटक को दे खोल

उससे तू यह बातें बोल

हे मन दूल्हा भीतर आ

मेरे पास तू रह सदा ।।

३ कांपते कांपते कर हुलास

दया देख है उसके पास

मन्ना है चंगेरी में

जीवित पान कटोरे में

और वह कहता है कि ले

यह है मेरा रक्त और देह ।।

४ बूझ के बाहर और अपार

हे प्राण हितू यह अधार

पर विश्वास मैं करता हूँ

और यों निकट आता हूँ

तेरी इच्छा है कि आ

खा और पी और तृप्त हो जा ।।

५ मैं अयोग्य हूँ और अधमय

सच तथापि हो सदय

तो मैं जाऊँ किसके पास

जो न खावे तेरा मांस

तेरे रक्त को पीवे ना

सो न जीवन चखेगा ।।

६ प्रीतम त्राणी मेरी सुन

अपनी मृत के सारे गुण

मेरे मन में जीवन भर

इसी भोज से प्रगट कर

और तब स्वर्ग बियारी में

मुझे भोगी होने दे ।।

210 (२१०)

“There is a fountain filled with blood.”

C. M. -- S. S. SS. 129 or Remember Me.

WILLIAM COWPER, 1731-1800.

Chord - A# | S- Ballad | T-078

१ इम्मानुएल के लोहू से

एक सोता भरा है

जब उसमें डूबते पापी लोग

रंग पाप का छूटता है ।।

२ वह डाकू क्रूस पर उसे देख

पाप मोचन पाया तब

हम वैसे दोषी उसी में

पाप अपना धोवें सब ।।

३ जब तक मसीह की मंडली पूर्ण

सब पाप से बच न जाय

तब तक उस अनमोल रक्त का गुण

न कभी होगा क्षय ।।

४ मैं जब से तेरे बहते घाव

विश्वास से देखता हूँ

मोक्षदायी प्रेम को गा रहा

और गाऊँ मरने लों ।।

५ और जब यह लड़खड़ाती जीभ

कबर में चुप रहें

तब तेरी स्तुति करूँगा

और मीठे रागों से ।।

211 (२११)

“I hear thy welcome voice.”

S. S. S. 475.

L. HARTSOUCH.

Chord - C | S- "---"/E.Movie | T- "---"

१ उस मीठी वाणी को, मैं सुनता हूँ तेरी

बुलाती पास उस सोते के, जो बहता क्रूस से ही ।।

कोरसः- आता तेरे पास, आता हूँ मसीह

धोके शुद्ध कर सोते से, जो बहता क्रूस से ही ।।

२ आता अशुद्ध निर्बल, देख मेरी दशा को

मलीनता से कर शुद्ध और साफ़, कि एक भी दाग न हो ।।

३ पूरा पिया Vश्वास, तू देता है मसीह

पूरी आशा और चैन विश्राम, इस जग और स्वर्ग में भी ।।

४ और मेरे मन में तू, अपने निज आत्मा से

सब अच्छे गुणों को उपजा, और सिद्ध तू कर मुझे ।।

५ तू अपने भक्तों को, विश्वास दिलाता है

कि अपनी हर प्रतिज्ञा को, तू पूरी करता है ।।

६ धन्य पावन रुधिर को, धन्य मुक्तिमय दया को

हमारे प्रभु यीशु को, धन्य अब और सदा हो ।।

212 (२१२)

“Twas on that night.”

L. M. -- Rockingham.

१ जिस रात को पकड़ा जाता था कि काठ के क्रूस पर मारा जाय

उस रात मसीह ने रोटी ली और करके धन्यवाद तोड़ दी ।।

२ वह शिष्यों से यों बोला तब देह मेरी लेओ खाओ सब

और जब जब ऐसा करते हो तब मेरा स्मरण सदा हो ।।

३ कटोरा भी उसने उठा फिर धन्य माना पिता का

तब उसे दिया उनके हाथ और बोला अत्यन्त प्रेम के साथ ।।

४ यह नये नेम का लोहू है जो मेरी देह से बहता है

तुम पीयो सब विश्वासियों कि मोक्ष की पूरी आशा हो ।।

213 (२१३)

“Nothing but the blood of Jesus.”

S. S. S. 874.

B. LOWRY.

Chord - E | S- Ballad | T-082

१- मेरे पाप क्या धोवेगा, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू

मुझे शुद्ध क्या करेगा, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू ।।

कोरसः- वह कैसा सोता है, हो उसके गुण की जय

न दूसरा है उपाय, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू ।।

२- क्या दे सकता निर्मलता, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू

कारण क्या है क्षमा का, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू ।।

३- कारण है मिलाप का क्या, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू

कुछ न मेरी योग्यता, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू ।।

४- यह है मेरी पूरी आस, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू

यह है धर्म मेरे पास, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू ।।

214 (२१४)

“Not Worthy Lord to gather up the crumbs.”

18s. Eventide.

१ मैं नहीं योग्य हूँ प्रभु लेने को

चूरचार जो गिरते तेरी मेज पर से

देख ले इस थकित अधम पापी को

जो आता तेरे ही बुलाने से ।।

२ मैं तेरा पुत्र के होने योग्य नहीं

न सब से नीचे मेज पास बैठने के

मैं दूर तक भटका धोखा खाया भी

अब मांगता केवल क्षमा तुझी से ।।

३ केवल एक बात हे प्रभु मुझ से बोल

तो मैं फिर साहस पाके लडूंगा

इस बात को मन में रख मैं बिना डोल

जग और शैतान के क्रोध को सहूँगा ।।

४ है दया करना तेरा अधिकार

दया असीम अगाध तू करता है

हे प्रभु क्षमा कर मुझ दुराचार

कृपा दिखाना गौरव तेरा है ।।

५ तू मुझसे कहता आके ले विश्राम

मैं छेदित पाँवो पास जल्दी आता हूँ

तू मुझे लाता है बीच अपने धाम

यहाँ मैं तेरा भोजन करता हूँ ।।

६ आह मेरी स्तुति केवल है विनय

और मेरी चाह तुझ में लीन होती है

मुझ में बास कर हे प्रभु हर समय

साथ खाने दे और साथ खा कृपामय ।।

215 (२१५)

“Rock of Ages.”

7s Toplady or Redhead 76.

A. M. TOPLADY, 1740-78.

१ यीशु मेरा शरणस्थान

तुझ में मेरा है कल्याण

तेरे छिदे पंजर से

लोहू जल जो बहे थे

मेरे पाप को धोते हैं

हर कलंक को खोते हैं ।।

२ भला जो मैं करता हूँ

आँसू जो मैं भरता हूँ

धर्म का कर्म जो मेरा हो

मेरे पाप छुड़ाने को

तनिक काम न आता है

केवल तू छुड़ाता है ।।

३ छूछे हाथ मैं आता हूँ

तेरा क्रूस मैं पकड़ा हूँ

मेरी सब मलीनता को

अपने लोहू से तू धो

नंगा हूँ अधम लाचार

धर्म से मुझे तू संवार ।।

४ सांस जब तलक चलती हो

वा जब सांस निकलती हो

जब मैं उड़ूँ लोकों पार

होगा जब मेरा विचार

यीशु मेरे शरणस्थान

तुझ में मेरा है कल्याण ।।

216 (२१६)

“O King of mercy, from Thy throne on high.”

10. 10. Coena Domini or Pax Tecum.

१ हे कृपा नाथ कान धरके स्वर्ग से

हमारी सुन और हमें दर्शन दे ।।

२ रक्त से बचाई हुई भेड़ों को

चराके नित्य उनका रखवाला हो ।।

३ हे प्रभु अपने मरने से दिला

हम मृतकों को जीवन सदा का ।।

४ तू स्वर्गीय रोटी है हम तुझ से खायें

और नित्य उस आत्मिक भोज से तृप्त हो जावें ।।

५ पापी का मित्र आश्रहीन की आस

तू है और मन का सुख भी तेरे पास ।।

६ अब आके हमें तू आनन्दित कर

आँख तेरी रहें अपने दासों पर ।।

७ मेघ में हर दिन हमारे आगे जा

और रात को आग से सदा राह दिखा ।।

८ संग सदा चल रह जहाँ हम रहें

संभाल इस जीवन भर और मृत्यु में ।।

217 (२१७)

L. M. Hamburg or Rockingham.

१ हे प्रभु तेरी आज्ञा से

हम मिल के बैठते खाने को

तू जैसा बोला शिष्यों से

कि मुझे स्मरण यूँ करो ।।

२ हाँ यीशु तुझे जीवन भर

निरंतर स्मरण करेंगे

और तेरी उत्तम सेवा पर

तन मन आनन्द से सौंपेंगे ।।

३ दाखरस और रोटी का दृष्टान्त

निज देह का तू ने दिया है

रक्त तेरा शान्ति देता है

देह तेरा सच्चा भोजन है ।।

४ तू दे हम सबको सत्य विश्वास

न खाने में निष्फलता हो

और कृपा कर कि तेरे दास

सब पावें स्वर्गीय भोजन को ।।

218 (२१८)

Bhajan Tunes No. 26.

PRABHU DAS.

रुधिर अमोल यीशु जी को भाई ।

१ मुक्ति अमोल पदारथ अघसे - आदम दीन गंवाई ।।

२ ईश्वर पुत्र दयाल हमारे - हम हित मुक्ति कमाई ।।

३ भटके खोजन यीशु आये - मानुष देह बनाई ।।

४ अपना लोहू बदला देके - हम हित मुक्ति कमाई ।।

५ जैसे गिरि से गंगा उतरी - मानुष पियन नहाई ।।

६ पापिन तारण कारण यीशु - अपना रुधिर बहाई ।।

७ रुधिर अमोल यीशु का जग में - मुक्ति हेतु ठहराई ।।

८ धारा पाँच मसीहा जी ने - बादल सम बरसाई ।।

९ दिवस तीसरे यीशु जी ने - मृत्यु पर जय पाई ।।

१० प्रभुदास की बिन्ती प्रभु जी - लीनो माहि बचाई ।।

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