
Masihi Geet Sangrah
### पवित्र आत्मा (The Holy Spirit)
#### 168 (१६८)
*“Come Spirit source of light.”*
*8. 7. 8. 7. Evening Prayer or Batty.*
*B. BEDDOME.*
१ ज्योतिर्मय पवित्र आत्मा
तेरे बिना सब अंधकार ।
मेरे मन में ही उजाला
तू उजाला करनेहार ।।
२ पाप के मैल से दे छुटकारा
तन और मन पवित्र कर ।
तेरा मंदिर मैं बन जाऊँ
अपना बास तू मुझमें कर ।।
३ ईश्वर से जब प्रार्थना करूँ
प्रार्थना करना तू सिखला ।
धर्म पुस्तक जब मैं पढूँ
मुझे उसका अर्थ बतला ।।
४ हे सहायक उपदेशक
मेरे साथ तू सदा हो ।
सर्वदा तू मन रह के
मार्ग दिखा मुझ अंधे को ।।
#### 169 (१६९)
*“The Comforter has Come.”*
*12. 12. 12. 6. D. S. S. 198.*
*F. BOTTOME.*
१ जहाँ मनुष्य हो वहाँ संदेश करो
जहाँ मनुष्य का मन निराश और दुःखित हो
सभों के कानों में आनंद का शब्द कहो
एक शान्तिदाता है ।।
कोरसः- एक शान्तिदाता है एक शान्तिदाता है
पवित्र आत्मा को पिता ने दिया है
जहाँ मनुष्य हो वहाँ संदेश करो
एक शान्तिदाता है ।।
२ अंधेरा गया है और सूर्य का उदय
अब हुआ जिसको देख मन होता है निर्भय
और शोक की आंधी भी शान्त हो थम गई है
एक शान्तिदाता है ।।
३ वह सर्वशक्तिमान चढ़ाके अपना प्राण
मनुष्य को देता है आरोग्यता का दान
छुटकारा पाने का है बंदीगृह में गान
एक शान्तिदाता है ।।
४ वह प्रेम अथाह अपार अनुग्रह निर्विकार
मैं कैसे शब्दों से बताऊँ उन का सार
अब मुझमें तारणहार के गुण दिखानेहार
एक शान्तिदाता है ।।
५ आनंद अब स्वर्ग में हो स्वर्ग दूत प्रचार करो
और जग के सारे संत यह सुन आह्वादित हो
अब मीठी वाणी से सराहों यीशु को
वह शान्तिदाता है ।।
#### 170 (१७०)
*8. 7. 8. 7. 7. 7. St. Leonard or Irby.*
*HEINRICH HELD.*
१ जीवित आत्मा पास हमारे
अनंत सच्चे ईश्वर आ
तेरी सामर्थ हम में भरे
होवे प्रबल सर्वदा
मन के अंधियारे में
ज्योत चमकीली देखने दे ।।
२ भले पथों को दिखा दे
उन पर हमें नित ले चल
सब कुछ आगे को सरका दे
कि हम दौड़ें ही सबल
फिसले चरण होवे पाप
मन में दे तब पश्चाताप ।।
३ ज्ञान परामर्श सोच विचार से
पूर्ण कर बुद्धि और हृदय
कि हम त्यागें मन और कर से
जो कुछ तू न चाहता है
और हम छूटें भ्रांति से
तुझे पहचानने में ।।
४ तेरी साक्षी होवे मन में
कि हम ईश्वर के संतान
उसको ताके प्रत्येक क्षण में
दुःख में रहें धीरजवान
पिता से जो ताड़ना है
मेरी करती है भलाई ।।
५ ईश्वर निकट जब हम आते
हमें दान कर अपनी प्रीत
जब हम बिन्ती करने जाते
तेरी कृपा हो प्रतीत
जब हमारा मन निराश
तब तू उसमें भर दे आश ।।
६ शत्रु हमको पकड़ा चाहे
तू हमारी रक्षा कर
दुःख ओ निन्दा हम भी सहें
हममें साहस धीरता भर
जब संदेह हम करते हैं
होवे वचन का निश्चय ।।
#### 171 (१७१)
*“Holy Spirit faithful guide.”*
*7. 7. 7. 7. D. S. S. 194.*
*M. M. WELLS.*
१ धन्य आत्मा सत्य अगुवा
शिष्यों पास तू है सदा
धर के हाथ हमें ले चल
यह संसार है मरुस्थल
थके नित आनन्दित हो
सुन उस मीठे वचन को
प्रेम से कहता यात्री आ
पीछे चल मैं हूँ अगुवा ।।
२ सब से उत्तम मित्र तू
सदा पास रह हे प्रभु
शक में हमको तू न छोड़
दुःख में हमसे मुंह न मोड़
बादल जब आ घेरते हैं
आंधी से दिल है बेचैन
प्रेम से कहो यात्री आ
पीछे चल मैं हूँ अगुवा ।।
३ प्रगट कर तू अपना प्यार
चारों ओर जब है अंधकार
जब कुछ नहीं रहता पास
सिवाय स्वर्ग आनंद की आस
मृत्यु छाया बीच में जब
कष्ट सहित हम चलते तब
प्रेम से कहो यात्री आ
पीछे चल मैं हूँ अगुवा ।।
#### 172 (१७२)
*“Our blest Redeemer' ere He breathed.”*
*8. 6. 8. 4. St. Cuthbert.*
*HARRIET AUBER, 1783-1862.*
१ हमारे प्रिय प्रभु ने
जब छोड़ा जगत को
एक शान्तिदायक भेजा तब
कि अगुवा हो ।
२ पवित्रआत्मा तब उतरा
है धन्य वह मेहमान
वह दिल को करता घर अपना
और शुद्ध मकान ।
३ वह अपनी शान्तमय वाणी से
सब भय को करता दूर
और उसको स्वर्गीय ज्योति से
है दिल भरपुर ।
४ सब भले काम और शुद्ध विचार
सब बुद्धि और दृढ़ता
सब ज्ञान का शिक्षक वह अपार
और शुद्ध कर्त्ता ।
५ पवित्रआत्मा दृष्टि कर
निर्बल संतानों पर
हमारे मन में उतर आ
और वास तू कर ।
#### 173 (१७३)
*“Gracious spirit holy ghost.”*
*7. 7. 7. 5. Charity or Capetown.*
*CHRISTOPHER WORDSWORTH, 1805-85.*
१ प्रिय आत्मा सुन तू ले
तेरे और सब दानों से
प्रेम ही श्रेष्ट कहा तू ने
दे पवित्र प्रेम ।।
२ प्रेम दयालु धीरजवान
दीन न करता है अपमान
मृत्यु से भी है बलवान
दे पवित्र प्रेम ।।
३ होवेगा जब पुनरुत्थान
टलेगा तब आगमज्ञान
प्रेम ही नहीं है नाशमान
दे पवित्र प्रेम ।।
४ आशा प्रेम विश्वास जो है
तीनों में पूर्ण एकता है
प्रेम ही श्रेष्ट इन सब में है
दे पवित्र प्रेम ।।
५ प्रिय आत्मा सुन तू ले
अपने पंख की चमक से
हमों पर अब पड़ने दे
प्रेम पवित्र प्रेम ।।
#### 174 (१७४)
*“L. M. D. -- St. Serf or Sweet Hour.”*
*MARTIN LUTHER, 1483-1546.*
१ परमेश्वर प्रभु धर्मात्मा
हे शान्तिदाता उतर आ
दे हमको अपने उत्तम दान
हाँ उनसे भर दे हर एक प्राण
और हम में फूँक दे जीवित स्वास
कि हममें उत्पन्न हो विश्वास
और अपने प्रेम की अग्नि से
हर अन्तःकरण जलने दे ।।
२ हे इष्ट प्रकाश यह मन संवार
हे गुरु श्रेष्ठ हमें सिंगार
पवित्र वचन अर्थ और जड़
खोल दे और हम पर प्रगट कर
दे हमको पाप से पश्चाताप
यीशु के रक्त से हम पर छाप
पिता से हमें दे मिला
और बालक का सा मन दिला ।।
३ हे प्रबल आत्मा इष्ट रखवाल
बलवान और स्थिर कर और संभाल
कि अंत लों तेरी सेवा में
निर्भय और अचल हम रहें
शरीर की कामना दबा मार
संसार के जाल से नित्य उधार
शैतान पर हमें जय दिला
मृतकाल में स्वर्ग का धाम दिला ।।
#### 175 (१७५)
*“Breathe on me breath of God.”*
*S. M. -- Holyrood or Franconia.*
*EDWIN HATCH, 1835-89.*
१ हे आत्मा जीवन दे
मन मेरा नया कर ।
मैं चाहूँ वह जो तू चाहे
और बनूँ अनुचर ।।
२ हे आत्मा जीवन दे
मन जब लों शुद्ध न हो ।
हो मेरी चाह भी तेरी सी
करने और सहने को ।।
३ हे आत्मा जीवन दे
तब नाश न होऊँगा ।
जब लों न यह सांसारिक देह
प्रकाशित हो चमके ।।
४ हे आत्मा जीवन दे
तब नाश न होऊँगा ।
पर तेरे अनंत जीवन में
सिद्ध हो नित जाऊँगा ।।
#### 176 (१७६)
*“Come holy spirit heavenly dove.”*
*C. M. -- Marlow or Bedford.*
*ISSAC WATTS, 1674-1748.*
१ हे जीवनदाता शक्तिमय
जिला हम सभों को ।
हमारे ठंडे मनों में
तू स्वर्गीय अग्नि हो ।।
२ वृथा सब गान हमारे हैं
और राग भी वृथा सब ।
तुझ बिन होशना की झंकार
और भक्ति शुद्ध है कब ।।
३ मृतक की नाईं जीना तो
हमारा है निष्फल ।
हमारा प्रेम है शक्तिहीन
पर तेरा है प्रबल ।।
४ हे जीवनदाता शक्तिमय
जिला हम सभों को ।
कि ख्रीष्ट के प्रेम की अग्नि से
यह मन प्रज्वलित हो ।।
#### 177 (१७७)
*“Come thou holy paraclete.”*
*Chord - F/E | S- Waltz | T-124*
१ हे पवित्र आत्मा आ
और उजाला स्वर्ग का सा
अपनी कृपा से चमका ।।
२ उत्तम शान्तिदाता आ
प्राण के प्रिय पाहुन आ
हमें ढाढ़स अब बंधा ।।
३ श्रम में हमको विश्राम
छाया हो जब पड़े घाम
शोक और रोना सब मिटा ।।
४ हे पवित्र ज्योति अब
भर दे हमें सब के सब
सारा मन उजाला कर ।।
५ बिना तेरे उपकार
हम मनुष्यों का क्या सार
सब कुछ बिगड़ा सर्वथा ।।
६ धो ले जो कुछ मैला है
सींच तू जो कुछ सूखा है
चंगा कर जो घायल है ।।
७ जो कठोर है तू झुका
जो निर्जीव है तू जिला
भटके हुए मार्ग पर ला ।।
८ अपने प्रिय लोगों को
आसरा रखनेहारों को
सद्गुण के बरदान दिला ।।
९ धर्म की योग्यता तू दे
मृत्यु समय मुक्ति दे
स्वर्ग में सर्वदा सुख दे ।।
#### 178 (१७८)
*“Hover over me holy spirit.”*
*Tune of Ruh Ilah Ruh Mukaddas.*
*R. S. MANDRELLE, 1907-1971.*
१ हे पवित्र आत्मा आके
मेरे मन को शान्त तू कर
अपना कर यह मन का मंदिर
आके उस को कर भरपुर ।।
कोरसः- कर भरपुर कर भरपुर
अभी उसको कर भरपुर
अपना कर यह मन का मंदिर
आके उसको कर भरपुर ।।
२ तेरा काम समझ न सकता
तौभी मुझ में होता है
मुझ को है अत्यन्त आवश्यक
बास कर मुझ में हर समय ।।
३ मैं निर्बल अत्यन्त निर्बल हूँ
मुझ से तू न होवे दूर
हे प्रबल सामर्थी आत्मा
बल से मुझको कर भरपुर ।।
४ शुद्ध कर शान्ति और आशिष दे
हर एक पाप कर मुझसे दूर
धन्य तेरा तू बचाता
मुझ को करता है भरपुर ।।
पिछले पद का कोरसः- हूँ भरपुर हूँ भरपुर
अभी तुझ में हूँ भरपुर
तेरा है यह मन का मंदिर
तुझ से हुआ है भरपुर ।।
#### 179 (१७९)
*8. 8. 7. 8. 8. 7. 4. 8. 4. 8. Frankfort.*
*MIEHAEL SOHIRMER, 1606-73.*
१ हे पावन आत्मा उतर कर हमारे हृदय डेरा कर
तू आ हे मन की ज्योति और अपने किरण कृपा से
तू हम में चमकने दे- हे मन के तू लाल मोती ।
विशाल निहाल, अमित जीवन नित्य नूतन
तुझ से पाते, जो विश्वास से तुझ पास आते ।।
२ सच्चाई का तू सोता है, विश्वासी में जो बहता है ।।
सो तरंग हम पर आवे । अनुग्रह कर निज मंडली पर
कि मेल और प्यार में बढ़ती हो, और हम कहीं फैल जावे ।
यह वर तू दे की आशिष हम सभों पर
हाल्लेलूयाह तेरी स्तुति सदा गावें ।।
३ कर स्वर्गीय सामर्थ हमें दान, कि जिससे होवें बलवान
पवित्र युद्ध लड़ाई में तुझसे पाके रक्षा आड़
पराक्रम अपने शत्रु पर, शान्ति होवे हर समय में ।
दुख में सुख में, शान्तिदायक रह सहायक
नित्य हमारे, जिससे दूर हो, जोखिम सारे
४ यह दे कि हम पवित्र होवें बितावें अपने जीवन को ।
हे आत्मिक बल हमारे, कि आगे हम को हो अज्ञात
शरीर का अभिलाष आह्वाद, काम मृतक उसके सारे ।
खींच ले जीत ले, आत्मा प्यारे मन हमारे
जग विलासी, कि हम होवें स्वर्ग-निवासी ।।
#### 180 (१८०)
*“Come Holy Ghost our souls inspire.”*
*L. M. -- Melcombe or Tallis' Canon.*
*CHARLES WESLEY, 1707-88.*
१ हे शान्तिदाता अब उतर
और हम में स्वर्गीय अग्नि भर ।
तू अभिषेक है करनेहार
सातगुणा दात तू देनेहार ।।
२ तू ऊपर से उंडेलता है
सत्य जीवन शान्ति प्रेम अक्षय ।
मिटा अनंत उजाले से
धुंधलेपन को हम सभों के ।।
३ हम व्याकुल हैं विराम तू दे
अनुग्रह की भरपूरी से ।
दे बैरी से बचाके आड़
हाँ दुख और सुख में तू संभाल ।।
#### 181 (१८१)
भजन
*P. D. GOTTLIEB.*
टेकः- शुचि आत्मा तुम को धन्य-धन्य हो ।
१ तुम हो शान्ति कुशल के दायक । सत्य स्वरूप सुपथ के नायक ।।
भक्तन ने दुःख माहि सहायक । ख्रीष्ट कीर्ति दरपन हो ।।
२ पेन्तिकोस्त के दिन ज्यों आये । जीभ अग्निमय शक्तिहि लाये ।।
शिष्यन के मन माहि भराये । तैसहि तब आवन हो ।।
३ विश्वासिन के संग रहो तुम । बुद्धि ज्ञान शुभ काम छहों तुम ।।
पाप श्राप पाखंड दहों तुम । दास धर्म जन मन हो ।।