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463 (४६३)

8. 8. 8. 8. 7. Lasst Mich Gehen.

१ क्या सदा क्या सदा धूल में रहूँगा सदा नहीं जो शरीर यह गड़े ओ समाधि भीतर सड़े तौभी वह जी उठेगा ।।

२ गोर का द्वार गोर का द्वार तोड़कर यीशु ने उद्धार अनंत जीवन मुझे दिया उसने मृत्यु को हराया मृत्यु तेरी जय कहाँ ।।

३ धन्य समय धन्य समय देह जब फिर जी उठता है तब हम दुःख और सकल व्याधि और वह गोर के भीतर सड़े छोड़कर करेंगे जय जय ।।

४ तब निहाल तब निहाल रहेंगे हम अनंत काल सब वियोग से शोकित होना सकल हाय हाय मारना रोना उस समय होगा बन्द ।।

५ आश्चर्यमान आश्चर्यमान तेज स्वरूप ओ ज्योतिमान तब तो होगी देह हमारी आगे वह न मरनेहारी बरन ख्रीष्ट की देह समान ।।

६ अपने साथ अपने साथ हम को चैन हमारा नाथ स्वर्ग में देगा कि हम गावें उसकी स्तुति और बढ़ावें उसकी नाम संतों के साथ ।।

७ कर विश्वास कर विश्वास प्रिय प्राण जो है उदास ढाढ़स बांधो पिता माता रोदन थामो बहिन भ्राता होगा पुनर भेंट प्रकाश ।।

464 (४६४)

8. 8. 8. 8. 7. Lasst Mich Gehen. GUSTAV KNACK 1806-1878.

१ कब मैं जाऊँ कब मैं जाऊँ यीशु को कब देखने पाऊँ उस के चरणों पर सिर धरना उसके पास ही नित ठहरना अपने मन से चाहता हूँ ।।

२ सत्य प्रकाश सत्य प्रकाश जो अन्धकार को करता नाश कब मैं वहां पहुँचूँगा जहां तेरा मुँह मैं देखूँ मेरे मन के अभिलाष ।।

३ कैसा मीठा कैसा मीठा स्तुतिमान है दूतों का यदि पंख हमारे होते उड़ते हुए जल्द यहां से जाते हम सैहून पहाड़ ।।

४ उत्तम देश उत्तम देश तेरे फल हैं क्या विशेष अपने पास हे प्रिय प्रभु हम को स्वर्ग में स्थान तू दे परमधाम ही में प्रवेश ।।

465 (४६५)

“O think of the home over there.” P. M. S. S. S. 42. D. W. C. HUNTINGTON.

१ कर याद कि एक घर है उस पार सुन्दर जीवन की नदी के पास जहां संत लोग सब पाके उद्धार नित्य करते हैं हर्ष से निवास सुन्दर घर सुन्दर घर कर याद कि एक घर है उस पार ।।

२ कर प्यारों को याद जो उस पार हम से पहिले पहुँच गये हैं कि वे गाते हैं ईश्वर का प्यार और आनंद से बिताते समय यर्दन पार यर्दन पार कर याद कि हैं प्यारे उस पार ।।

३ उद्धार कर्त्ता रहता उस पार हैं सब भाई और बन्धु वहाँ छोड़ के रंज और सब दुःखों का भार उनके पास मैं उस पार जाऊँगा मैं उस पार जाऊँगा उन के पास जो हैं गये उस पार ।।

४ अब जाऊँगा जल्दी उस पार जीवन यात्रा का अन्त दिखता है मेरे प्यारे जो गये उस पार मेरे आने की बाट जोहते हैं जोहते हैं जोहते हैं मेरे आने की बाट वां उस पार ।।

466 (४६६)

11. 11. 11. 11. 8, 11. Wo Findet.

१ कहाँ पाता है मेरा प्राण सुख विश्राम कौन चैन देगा मुझे और क्लेश से विराम न कहीं मैं पाऊँगा ऐसा आश्रय जहां न पाप न मरण होता है नहीं नहीं इस लोक में ना वह आनंद जो रहे सदा सर्वदा ।।

२ हे प्यारो संसार को छोड़ देकर प्रस्थान कर ईश्वर के मार्ग पर तो पाओगे त्राण यरुशलेम स्वर्ग का चमकीला अपार वह है अनन्तकाल लों प्राण निमित्त आधार हाँ हाँ हाँ हाँ केवल वहाँ है दुःख से शुभ शरण ओ आनंद सदा ।।

३ आह कैसा सुखदायक है स्वर्गीय निधान पाप मृत्यु शोक व्यथा वहां हैं अनजान संत लोगों का भजन और सुन्दर जो गान सो करेगा हर्षित सदा मेरा प्राण वाह वाह वाह वाह कब जाऊँगा यहाँ से कि स्वर्ग में मैं रहूँ सदा ।।

४ तो चलो हे भाइयो समीप है विश्राम कुछ देरी के पीछे प्राप्त होगा स्वर्गधाम यहाँ हमको लड़ना और दुःख सहना है पर स्वर्ग में हम पायेंगे आनंद और जय जय जय जय जय निरंतर जय हम जो लेते मसीह पास आश्रय ।।

467 (४६७)

“When this passing world is done” R. M. CHEYNE. 1813-43.

१ जब आ जावे महा कष्ट जब यह जगत का होगा नष्ट जब मैं स्वर्ग में उतरुं पार पाऊँ सदा का निस्तार तब ही प्रभु समझ लूँ तेरा कितना धारता हूँ ।।

२ तेरे पास खड़ा हूँ महिमा जब पहिनूँ देख तेरा तेज अपार निर्मल मन से करूँ प्यार तब ही प्रभु समझ लूँ तेरा कितना धारता हूँ ।।

३ जब मैं सुनूँ स्वर्ग का गान उठता हुआ गर्ज समान पानी का सन्नाटा सा शब्द जो मीठा बीन का सा तब ही प्रभु समझ लूँ तेरा कितना धारता हूँ ।।

४ जग में भी ज्यों ऐने में तेरी महिमा देख पड़े क्षमा ऐसी मीठी हो आत्मिक शक्ति प्रबल हो कि यहाँ कुछ समझ लूँ तेरा कितना धारता हूँ ।।

५ मेरी निज की न भलाई क्रोध से भागने को जगाये ख्रीष्ट के पांजर में गुप्त हो आत्मा से भी शोधित हो नित्य सिखा कि बताऊँ तेरा कितना धारता हूँ ।।

468 (४६८)

“Hush ! blessed are the dead” 6s. Dolomite Chant.

१ हैं धन्य वे ही मृतक जो मरते प्रभु में कि करते हैं विश्राम अब अपने कार्यों से ।।

२ दर्शन बिन परदे का वे सदा पाते हैं सत ईश्वर ज्योतिर्मय वे देखते रहते हैं ।।

३ वे इस दुःख सागर से अब छूट के निकले हैं न दुःख न पीड़ा को फिर कभी जानेंगे ।।

४ अच्छा गड़रिया उन्हें रखता है वह अमृत पानी के तीर पर ले चलता है ।।

५ न उन्हें, पर हम को आँसू बहाना है हां उन के मरने से हम दुःखित हैं निश्चय ।।

६ हम शोक से रोते हैं सुधि क्योंकर मिटेगी न हम पर दोष लगा कि रोया यीशु भी ।।

७ पर अन्तिम दिन को जब लौट आवे मेरा साथ हम सब आनंद से फिर मिल रहेंगे एक साथ ।।

469 (४६९)

“There is no night in heaven”

१ न रात है स्वरग में उस लोक में तेजस्वी थकावट काम में न होगी कि काम भी प्रेम है ही ।।

२ न दुःख है स्वर्ग में सुख सदा रहेगा न आँसू नई सृष्टि में कभी देख पड़ेगा ।।

३ न पाप है स्वर्ग में देख भीड़ सब संतों की पवित्र है नित्य उनका गीत पवित्र वस्त्र भी ।।

४ न मौत है स्वर्ग में वहाँ जो रहेंगे सो अमर होवेंगे जयवंत वे फिर न मरेंगे ।।

५ हे यीशु अगुवा हो कि योंही हम चलें कि दुःख पाप और मृत्यु पार उस लोक में जा रहें ।।

470 (४७०)

“8. 7. 8. 7. Evening Prayer or Galilee.”

१ मनुष्य धूल है घास का फूल है शीघ्र वह मर जाता है आज वह आता कल वह जाता फूल सा वेग मुरझाता है ।।

२ क्या धनवान हो क्या कंगाल हो दोनों मौत उठाती है बलवन्तों और निर्बलों को दोनों को गिराती है ।।

३ स्वर्गीय पिता सब बुराई दूर कर मेरे मन में से बुद्धिमानी और तैयारी न्याय के दिन को मुझे दे ।।

471 (४७१)

“When all my labours and trials are o'er.” CHARLES H. GABRIEL, 1850-1932.

१ मेरा दुःख धन्धा जब हो चुकेगा कुशल से स्वर्ग जब पहुँच जाऊँगा यीशु के साथ जब रहूँगा सदा मुझे तब होवेगा पूरा आनंद कोरस :- पूरा आनंद पूरा आनंद पूरा आनंद पूरा आनंद जब उसके मुख को मैं देख पाऊँगा मुझे तब होवेगा पूरा आनंद ।।

२ मुझको जब स्वर्ग में एक रहने का स्थान दया से यीशु करेगा प्रदान प्रभु की वाणी जब सुनेंगे कान मुझे तब होवेगा पूरा आनंद ।।

३ मेरे सब प्यारे मिलेंगे मुझे जगत के बोझ मुझ से दूर होवेंगे जब तारणहार मुझ पर दृष्टि करे तब उससे पाऊँगा पूरा आनंद ।।

472 (४७२)

“Jerusalem my happy home” C. M. ― St. Fulbert. F. B. P.

१ यरुशलेम तू है सुखधाम मनोहर मीठा नाम कब तुझ में जग के संकट से मैं पाऊँगा विश्राम ।।

२ कब तेरी सुन्दर भीतों को और बाहर रतन द्वार सुनहली सड़क देखूँगा और पाऊँगा उद्धार ।।

३ हाँ कब मैं तुझ में बसूंगा हे ईश्वर के सुख धाम जहां न पाप न मृत्यु है न पीड़ा शोक न घाम ।।

४ जहाँ सनातन आनंद और कुशल क्षेम सदा है आह तुझ में मुझे जाना है पर दिन कब आवेगा ।।

५ संतों की मंडली है वहाँ और संग है यीशु नाथ और मेरे प्यारे भी अनेक वहाँ हैं उनके साथ ।।

६ मैं तेरी लालसा रखता हूँ हे ईश्वर के सुखधाम जब तेरा हर्ष मैं देखूँगा मैं करूँगा विश्राम ।।

473 (४७३)

“Here we suffer grief and pain”

१ हम यहाँ दुःख सहते हैं कि एक साथ न रहते हैं स्वर्ग लोक है मेल का स्थान । तब हम करें खुशी खुशी खुशी खुशी जब हम जब ही मिलके अलग फिर न होवेंगे ।।

२ सब जो चाहते यीशु को उनका जब कि मरना हो स्वर्ग लोक को जावेंगे ।

३ खुशी तब मनावेंगे जब हम देखने पावेंगे ख्रीष्ट को सिंहासन पर ।

४ तब एक मन और एक ही स्वर गावेंगे हम खुशी कर यीशु मसीह की जय ।।

474 (४७४)

“Asleep in Jesus” L. M. - Rest. MRS. MARGARET MACKY, 1832.

१ मसीह में सोये श्रेष्ठ आराम उठकर न करेगा विलाप एक शान्त निश्चित निडर विश्राम दूर हुआ पाप का सारा श्राप ।।

२ मसीह में सोये महा सुख कि इस आराम के योग्य हो कि साथ निश्चय के गा सकें मसीह ने मारा मृत्यु को ।।

३ मसीह में सोये शान्त आराम उठकर पाओगे परमानन्द उस के पराक्रम के समय होंगे हर व्याधि से निर्बन्ध ।।

४ मसीह में सोऊ मुझे भी यह उत्तम आश्रय मिल सके कि पुनरुत्थान के समय लों यह देह विश्राम से सोयेगा ।।

५ मसीह में सोये तुझ से दूर जो तेरे प्यारे पड़े हों तौभी है तेरा श्रेष्ठ आराम जी उठके देखेगा उनको ।।

475 (४७५)

“The sands of time are sinking” 7. 6. 7. 6. D. Rutherford. ANNE ROSE CAUSIN, 1824-1906.

१ संसार का दिन ढल जाता और स्वर्ग का बिहान जिस भोर की आश मैं रखता वह भोर अब हैं ज्योतिमान रात थी बहुत अंधेरी अब करता दिन प्रवेश और विभव विभव रहता इम्मानुएल के देश ।।

२ मसीह है प्यार का सोता उस जल की क्या मिठास संसार में मैं ने चखा पर स्वर्ग में बुझती प्यास वहाँ एक बड़ा सागर उसका प्रेम अशेष और विभव विभव रहता इम्मानुएल के देश ।।

३ मसीह है मेरा प्यारा वह मुझ से रखता प्रेम जौनार के घर में लाता अशुद्ध और दुराचार मैं उस पर रखता आस्रा पूर्ण होगी आश विशेष जहां वह विभव रहता इम्मानुएल के देश ।।

४ दुलहिन तो अपने भेष पर लगाती नहीं ध्यान वह विभव नहीं ताकती पर वह लोहू लुहान न आँख लगाती ताज पर हाथ छिदे हैं विशेष मेम्ना है सारा विभव इम्मानुएल के देश ।।

५ जीवन के थान में उसने विचार से बुना क्षेम और शोक की ओस पर सदा चमकता उसका प्रेम जिस हाथ ने ठीक चलाया जिस चित से था उपदेश उन को मैं नित्य सराहूँ इम्मानुएल के देश ।।

६ मैं स्वर्ग की ओर हूँ ताकता जब चली बयार प्रचण्ड अब थके पथिक नाईं जो टेकता अपना दण्ड आयु के संध्या समय ज्यों मौत का है संदेश मैं विभव उदय ताकता इम्मानुएल के देश ।।

476 (४७६)

8. 7. 8. 7. 8. 8. 7. Luther's Hymn. JOSHUA STEGMANN.

१ हे मौत अब तेरा डंक कहाँ कहाँ परलोक जय तेरी शैतान अब हम से करे क्या चाहे शक्ति हो घनेरी परमेश्वर ही ने किया है हमारे लिये उत्तम जय ख्रीष्ट यीशु ही के द्वारा ।।

२ सांप कैसे फनफनाता था जब यीशु उससे लड़ा छल बल से उस पर आता था पर उससे मारा गया हां ख्रीष्ट की एड़ी डसने से वह पा न सका उस पर जय सिर सांप का कुचला गया ।।

३ ख्रीष्ट वैरीयों पर जयवंत हो पाताल से निकल आया और मौत को भी हराया मृत गोर को भी हराया अब कोपित होवें सारे दल शैतान और उसका पूरा बल जयवंत मसीह हो गया ।।

४ ख्रीष्ट यीशु मौत में पड़ा था पर देख फिर जीवित भया अब जीवे उसके अंग सदा जब सिर जिलाया गया जो यीशु पर विश्वास करे न रहेगा वह कबर में वह जीवे जोभी मरा ।।

५ जो दिन दिन उठे ख्रीष्ट के साथ पाप मौत से मन फिरावे न होगा उस पर मौत का हाथ न उस पर आने पावे ख्रीष्ट ने मौत को किया क्षय वही निर्दोषता लाया है अमरता अनंत जीवन ।।

६ ये हैं निस्तार के पर्व के दान ख्रीष्ट यीशु ही के द्वारा कि मुक्ति आनंद और कल्याण अब है सदा हमारा सो बाट हम जोहें धीरज से जब लों न महा दिवस में हमारे देह जी उठें ।।

477 (४७७)

Bhajan Tunes No. 121. PRABHU DAS

अपना कोई नहीं है जी ।। बिना प्रभु यीशु हर्गिज मुक्ति नहीं है जी । १ धन जोबन का गर्व न कीजै सिर पर मौत न मानी । इक दिन ऐसा होगा बन्दे तू डूबे बिन पानी ।। २ मानुष चोला हुआ पुराना कब लग सीवे दरजी । दुःख का भंजन कोई न मिलिया जो मिलिया सो गरजी ।। ३ जब लग तेल दिया में बाती जग मग जग मग हो रही । जल गय तेल निपट गई बाती ले चल ले चल हो रही ।। ४ माटी ओढ़ना माटी बिछौना माटी का सिरहाना । इक दिन ऐसा होगा बन्दे माटी में मिल जाना ।। ५ सदा न बाग में बुलबुल बोले सदा न बाग बहारा । सदा न रहती हुस्न जवानी सदा न सुहबत यारां ।। ६ माई कहे यह पुत्र हमारा बहिन कहे बिर मेरा । भाई कहे यह भैया हमारा नारि कहे नर मेरा ।। ७ तीन दिना तेरी तिरिया रोवे जीवे जब लग माता । मरघट तक तेरा कुटुम्ब कबीला हंस अकेला जाता ।। ८ घर की तिरिया झुर झुर रोवे बिछुड़ गई मेरी जोड़ी । प्रभुदास उठ के यों बोले जिन जोड़ी तिन तोड़ी ।। ९ दुःख की गठरी सिर पर भारी जाकर कहाँ उतारी । यीशु जी ने हांक पुकारी दुःख की गठरी टारी ।।

478 (४७८)

H. T. B. 22

अस घर जग में कोई नहीं । जिस घर मैं न जाती हूँ ।। १ ताक लगाये हाजिर रहती । जिधर इशारा पाती हूँ ।। २ जिसे बुलाता साईं मेरा । मैं ही लेने जाती हूँ ।। ३ हुक्मी चेरी मैं हूँ उस की । तुरतहि हुक्म बजाती हूँ ।। ४ लोहा लकड़ी कछु नहि लाती । चुपके तीर चलाती हूँ ।। ५ डरती कभु न फिराऊन से । खुले खजाने आती हूँ ।। ६ भाई भतीजे रोवत पीटत । मात पिता से छुड़ाती हूँ ।। ७ जो कोई है शैतान का बन्दा । नरक उसे ले जाती हूँ ।। ८ यीशु मसीह के बलिबलि जाओ । निर्बल तुम्हें बताती हूँ ।।

479 (४७९)

Bhajan Tunes No. 23 or 24. HINGAN.

जगत में ना निश्चय पलकी । १ सुमरण करिये प्रभुहि सुमरिये, को जाने कलकी ।। २ हंस रहे जौलोग घट भीतर, हरख रहे दिल की ।। ३ हंस निकल जब जावे घट से, माटी भूतल की ।। ४ कौड़ी कौड़ी वित्त बटोरे, बात किये छल की ।। ५ भारी गेठ धरे सिर ऊपर, क्योंकर हो हल्की ।। ६ सांझ पहर दिनकर जस छीजे, जोत झला झलक ।। ७ आयुर बल झट बीतत तैसे, बिजली जस दमकी ।। ८ काम क्रोध मद माया तजि के, कुटिल बात खलकी ।। ९ सेवक यीशु चरण पर निहुरत, सुनिये निरबल की ।।

480 (४८०)

Bhajan Tunes No. 82. NAINSUKH.

जो तुम जीवो तो करलो विचारा, यीशु है मेरो सृजनहारा ।। १ जीवन मरन यही संसारा, यीशु नाम से होत उधारा ।। २ मातु पिता दुःख देखनहारे, कोई नहीं दुःख बांटनहारा ।। ३ बेटी बहिन अरु घर की नारी, रोवत विलपत सब परिवारा ।। ४ लोग बाग सब सोचन लागे, हंस कहां गया बोलनहारा ।। ५ अबही चेतो हे अभिमानी, काल सिरहाने आय पुकारा ।। ६ उठ रे पापी तोहि बुलाई, अगिन जहां नहीं बूझनहारा ।। ७ यीशु के लोग जहां जात होई, सुनत नहीं यह बोल करारा ।। ८ धर्मरूप तब कहत सुनाई, चलिये प्रभु दर्शन को प्यारा ।।

481 (४८१)

Bhajan Tunes No 46. JOHN CHRISTIAN.

मन मरन समय जब आवेगा, मन मरन समय । १ धन संपत्ति अरु महल सराये, छुटि सबै तब जावेगा ।। २ ज्ञान मान विद्या गुण माया, केते चित्त उरझावेगा ।। ३ मृगतृष्णा जस तिरखित आगे, तैसे सब भरमावेगा ।। ४ मातु पिता सुत नारी सहोदर, झूठे माथ ठठावेगा ।। ५ पिंजर घेरे चहुँदिश विपिन, सुगवा प्रिय उड़ जावेगा ।। ६ ऐसो काल शमशान समाना, कर गहि कौन बचावेगा ।। ७ जान अधम जन जौं विश्वासी, यीशु पार लगावेगा ।।

482 (४८२)

H. T. B. 70. PREM DAS.

रहेगा हंसा चार दिना जग माहीं । १ मुक्ति गहन जनि बारि लगाओ । घटत दिवस अब जाहीं ।। २ पथिक नींद अस यह संसारा ।। छन सोवत पथ माहीं ।। ३ दारा पति सुत बन्धु सजाती । साथी ये सब नाहीं ।। ४ जो तुम पाप कियो तन मन से । बांट न लेहीं ताहीं ।। ५ धन्य दयालु पिता परमेश्वर । प्रेम असीम दिखाहीं ।। ६ पापिन भार उतारन कारण । निज सुत जगत पठाहीं ।। ७ दास आस निज तापर राखो । पाप श्राप नट जाहीं ।।

483 (४८३)

H. T. B. 105 J. UMRAIL.

१ जरा टुक सोच ऐ गाफिल कि क्या दम का ठिकाना है । निकल जब ये गया तन से तो सब अपना बिगाना है ।। २ मुसाफिर तू है और दुनिया सरां है भूल मत गाफिल । सफर मुल्क-इ-अदम आखिर तुझे दरपेश आना है ।। ३ लगाता है अबस दौलत पै क्यों तू दिल को अब नाहक । न जावे संग कुछ हरगिज यहीं सब छोड़ जाना है ।। ४ न भाई बन्ध है कोई न कोई आशना अपना । बखूबी गौर कर देखा तो मतलब का जमाना है । ५ लगा रह याद में हक की अगर अपनी शफा चाहे । अबस दुनिया के धन्धों में हुआ गुल क्यों दिवाना है ।।

484 (४८४)

H. T. B. 103. SHUJAAT ALI.

१ सुनो ऐ जान इ मन तुम को यहां से कूच करना है । रहो तुम याद-इ-हक्क में जब तलक यहां आबदाना है ।। २ अरे गाफिल तू क्यों भूला है इस दुनिया के लालच में । रखो कुछ खौफ भी हक का अगर जन्नत को जाना है ।। ३ करो टुक गौर दिल में कहा क्या क्या तुम्हें उसने । किया था हुक्म जो हक ने उसे तुम ने न माना है ।। ४ पड़े सोते हो गफलत में जरा टुक आँख को खोलो । हुई है शाम उठ बैठो मुसाफिर घर को जाना है ।। ५ न दौलत काम आयेगी न इस दुनिया से कुछ हासिल । अगर तुम सोचकर देखो यह सब कुछ छोड़ जाना है ।। ६ जो मलक-उल-मौत आवेगी तुम्हें इस जां से लेने को । बहाना क्या करोगे तुम वह तुम से भी सियाना है ।। ७ खुदा जब तुम से पूछेगा तू क्या लाया उस आलम से । दिया था उमर और दौलत तो क्या तुहफा कमाया है ।। ८ अगर गाफिल रहे हक से तुम्हें दोजख में डालेगा । रहे हो याद में हक की तो जन्नत घर तुम्हारा है ।। ९ हयात अब दी अगर चाहो तो कह यीशु मसीह से तू । वही शाफी है उम्मत का कि जिसका नाम यीशु है ।। १० सलीब ऊपर उसे रखकर किया है कत्ल जालिम ने । उसे मत भूल ऐ आसी वही तेरा ठिकाना है ।।

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