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#### 122 (१२२)

*8.7.8. 7. Evening Prayer or Mariners.*

 

१ प्रभु यीशु कृपा सागर

तू है सचमुच ज्योत अपार ।

मेरा मन तू कर उजाला

अपने भक्त का कर निस्तार ।।

 

२ प्रभु मैं हूँ महा पापी

तुझे छोड़ा बारम्बार ।

मुझे अपनी ओर फिरा के

पास से मेरा कर उद्धार ।।

 

३ अपने आत्मा से परमेश्वर

मेरा मन पवित्र कर ।

तन और मन मैं सौंपता तुझे

कृपा करके ग्रहण कर ।।

 

४ मरन काल जो निकट आवे

प्रभु मेरा जी सम्भाल ।

मरने से मैं क्योकर डरूं

जो तू मेरा हो रखवाल ।।

 

#### 123 (१२३)

*"Father, I stretch my hands."*

*C. M. - S. S. S. 493.*

*CHARLES WESLEY, 1707-88.*

 

१ पिता मैं हाथ बढ़ाता हूँ

मुझे तू थामे रह

सहायक दूसरा है नहीं

तू मेरे हाथ को गह ।।

कोरसः- मैं मानता हूँ मैं जानता हूँ

कि यीशु त्राता है ।

कि वह है शक्त और उसका रक्त

मुझे बचाता है ।।

 

२ जब न मनुष्य न स्वर्गदूत

कुछ काम ही आया था

तब तूने भेजा प्यारा पूत

जो मुक्ति को लाया था ।।

 

३ हम उस को भजते रहते जो

अब स्वर्ग में है नरेश

उस ही ने बाप को भेजा हो

क्या ही उठाया क्लेश ।।

 

#### 124 (१२४)

*8. 7. 8. 7. Batty or Stuttgart.*

 

१ यीशु मरा दूत यह बचन

स्वर्गीय राग में गावें नित

ईश्वर के यह प्रेम का लक्षन

आओ सब देवें चित्त ।

 

२ यीशु मरा पापियों को

केवल इसी से उद्धार

उसकी मृत्यू से अब सब को

मिलता जीवन अधिकार ।

 

३ यीशु मरा क्या अच्म्भा

क्या ही कृपा क्या ही क्लेश

जगत जितना चौड़ा लम्बा

उतना फैले यह संदेश ।

 

४ यीशु मरा सोच हे पापी

प्रेम यह कैसा है असीम

अभी तक तू क्यों संतापी

इससे बंधा त्राण का नीम ।

 

५ यीशु मरा यह बात सुन के

गल जा मेरे पत्थर मन

उसकी आत्मिक सेवा चुन के

उसका शिष्य ओर आश्रित बन ।।

 

#### 125 (१२५)

*Bhajan Tunes 79.*

*HAR PRASAD.*

 

मैं कुछ जानुं न क्रूस सिवाय ।

१ जापै प्रभु यीशु जगदीसा, प्राण दियो निज आय ।।

२ कोई नाना विधि की विद्या, जानत भेद बजाय ।।

३ बहुतक गढ़ तोरन को जानत, बहुतक बाण चलाय ।।

४ बहुतक रूप सरूप दिवान, ईश्वर-प्रेम भुलाय ।।

५ कोई धन सम्पत्ति पै फूलत, निज प्रभु को बिसराय ।।

६ कोई निबल प्रभु यीशु क्रूस पै, रहिये दृष्टि लगाय ।।

 

---

### दुःख भोग का सप्ताह (Passion Week)

 

#### 126 (१२६)

*L. M. St. Cross or Abends.*

*Chord - C | S- Ballad | T-084*

 

१ आ मेरे संग विलाप करो

त्राता के पास तुम संग आओ ।

आकर संग संग विलाप करो

क्रूस पर ख्रीष्ट यीशु को देखो ।।

 

२ आँसु हम क्यों न बहावें

सुनकर शत्रुन की निंदा को ।

लो सहता कैसे धीरज से

क्रूस पर ख्रीष्ट यीशु को देखो ।।

 

३ सात वाणी बोला प्रियतर

चुपचाप रहा तीन घण्टें लों ।

पाप ही का भार पड़ा उसपर

क्रूस पर ख्रीष्ट यीशु को देखो ।।

 

४ कठोर मनो तुम टूट जाओ

ख्रीष्ट के सब क्लेश को यों मानो

कि इसका कारण तुम ही हो

क्रूस पर ख्रीष्ट यीशु को देखो ।।

 

५ अब क्रूस के पास आ खड़े हो

लोहू की बूँदें पड़ने दो ।

वहाँ सब घमण्ड दूर करो

क्रूस पर ख्रीष्ट यीशु को देखो ।।

 

६ मन कुचला आँसु का निकास

माँगों तैयार वह देने को

है कुचला मन प्रेम का निवास

क्रूस पर ख्रीष्ट यीशु को देखो ।।

 

७ हे ईश के प्रेम, मानुष के पाप

यां तुम ने संग्राम किया था ।

और प्रेम की जय से है मिलाप

यीशु जब क्रूस पर चढ़ा था ।।

 

#### 127 (१२७)

*7. 7. 6. 7. 7. 8. Innsbruck.*

*PAUL GERHERDT 1607-1676.*

 

१ अब गलगथा पर आओ

और उस पर आँख उठाओ

जो बीच के क्रूस पर है ।

सुख दुःख का भोगी है ।।

 

२ कह किसने तुझे मारा

हे यीशु कष्ट का भारा

क्यों तुझ पर पड़ा है ।

हम ही तो है कुकर्मी

हे प्रभु तू है धर्मी

पर कष्ट तो तुझ पर पड़ा है ।।

 

३ अपराध जो हुए मुझसे

सो इतने बहुतेरे

कि रेत से अधिक हैं ।

इन्होनें तुझे मारा

और देके कष्ट संहारा

हाँ ये ही तेरे अधिक हैं ।।

 

४ जो कांटे सिर में गड़े

जो थप्पड़ मुँह पर पड़े

जो कष्ट उठाया था ।

तो कोड़ा तू ने खाया

जो दुःख तूने उठाया

मुझ पापी को उठाना था ।।

 

५ हे प्रभु तेरा रोना

और तेरा दुखित होना

क्लेश तेरे घावों का ।

और क्रूस पर तेरा मरना

समाधी में उतरना

मैं मन में स्मरण करूँगा ।।

 

६ हे प्रभु अपना मरण

और मेरे प्राण का तरण

तू मेरे मन में गाड़ ।

और अपने दुःख के द्वारा

तू मेरा मन कर निस्तार

और अंत को अपने पास उठा ।।

 

#### 128 (१२८)

*"Behold, the Lamb of God."*

*6. 6. 6. 4. 8. 8. 4. St. John.*

*M. BRIDGES.*

 

१ ईश्वर का मेम्ना देख ।

हे पापियों के मीत

तेरा पापनाशक मृत

न हो निष्फल ।।

तू ही बचा मुझ पापी को

और तेरी घायल पसली हो

एक शरण स्थल ।।

 

२ ईश्वर का मेम्ना देख

मैं अपने पाप के साथ

हे यीशु तेरे हाथ

पड़ जाऊँगा ।।

मेरे अपराधों को धो डाल

और मेरे मन से पाप निकाल

फिर जीऊँगा ।।

 

३ ईश्वर का मेम्ना देख

देहधारी ख्रीष्ट की जय

तू सदा प्रभु है

हे दीनानाथ ।।

तू भर दे हमको प्रीत से

सनातन आनंद हमको दे

संतों के साथ ।।

 

४ ईश्वर का मेम्ना देख

वह सारे जग का नाथ

ईश्वर के दहिने हाथ

अब बैठा है ।।

आत्मा और पिता के सहित

वह एक परमेश्वर, आनंद,

हित और ज्योति है ।।

 

#### 129 (१२९)

*8. 7. 8. 7. Glory to the Lamb*

*Chord - A | S- Waltz | T-120*

 

१ ख्रीष्ट यीशु क्रूस पर मुआ है

उसके नाम की होवे जय ।

वह मेरा साथी हुआ है

उसके नाम की होवे जय ।।

कोरस :- है प्रभु यीशु दयावान

मनोहर उसका मीठा नाम

वह मुझे देता जीवन दान

उसके नाम की होवे जय ।।

 

२ उठाया मेरा सारा भार

उसके नाम की होवे जय ।

मृत्यु से किया मुझे पार

उसके नाम की होवे जय ।।

 

३ दूर किया मेरा सारा पाप

उसके नाम की होवे जय ।

मिटाया मेरा सब संताप

उसके नाम की होवे जय ।।

 

४ वह सबको साहस देता है

उसके नाम की होवे जय ।

वह शोक और दुःख हर लेता है

उसके नाम की होवे जय ।।

 

५ जब उसके पास मैं जाऊँगा

करूँगा मैं धन्यवाद ।

तब यह सदा मैं गाऊँगा

होवे उसका धन्यवाद ।।

 

#### 130 (१३०)

*"When I survey the wondrous Cross."*

*L. M. Rockingham or Hamburg.*

*ISAAC WATTS 1674-1748.*

*Chord - A#/B | S- Waltz/"---" | T-090-100/"---"*

 

१ जिस क्रूस पर यीशु मरा था

वह क्रूस अद्भूत जब देखता हूँ

संसारी लाभ को टोटा सा

और यश को निंदा जानता हूँ ।

 

२ मत फूल जा मेरे मूरख मन

इस लोक के सुख और संपत पर

हो ख्रीष्ट के मरण से प्रसन्न

और उस पर सारी आशा धर ।

 

३ देख उसके सिर हाथ पावों के घाव

यह कैसा दुःख और कैसा प्यार

अनूठा है यह प्रेम स्वभाव

अनूप यह जग का तारणहार ।

 

४ जो तीनों लोक दे सकता मैं

इस प्रेम के योग्य यह होता क्यों

हे यीशु प्रेमी आप के तई

मैं देह और प्राण चढ़ाता हूँ ।

 

#### 131 (१३१)

*"Sweet the moments."*

*8. 7. 8. 7. Patty or Cassel.*

*WALTER SHIRLEY, 1725-86.*

*Chord - D# | S- Ballad | T-082*

 

१ जो समय क्रूस पास मैं काटता

शांति और प्रसन्नता से ।

जीवन चैन और कुशल पाता

मरते हुए मित्र से ।।

 

२ क्रूस के पास मैं जब जब देखता

रक्त की धारा यीशु के ।

जब वह लोहू मन पर गिरता

चैन मैं पाता ईश्वर से ।।

 

३ क्या मनोहर है यह दशा

क्रूस के निकट रहने से ।

जब मैं ख्रीष्ट की दया देखता

प्रकट उसकी आँखों में ।।

 

४ प्रभु मेरे मन को स्थिर कर

कि मैं क्रूस पर ध्यान करूँ ।

जब तक मैं निस्तार को पाकर

तुझे देखने न पाऊँ ।।

 

#### 132 (१३२)

*10. 7. 10. 7. 10. 10. 7. 7. Marter Christi.*

*CHRISTIAN VOV ZINZEN DORF, 1727-52.*

 

१ तेरा दुःख हे यीशु कौन बिसारे

तुझ में क्षेम जो पाता है

तेरी स्तुति करना हर एक पल में

मेरा मन यह चाहता है

मेरे भूखे प्राण निमित्त अहारा

मेरे मन के लिए अति प्यारा

दिन पर दिन अधिक हो जा

हे क्रूस घातित त्राणकर्त्ता ।।

 

२ लाखों स्तुति होवे प्रभु तुझे

दण्डवत करें देह और प्राण

तू ने अत्यन्त पीड़ा कष्ट ओ दुःख से

किया मेरे लिये त्राण

दे कि हर एक तुझ पर प्रीति रखे

और विश्वास में तेरी ओर निरखे

जब लों स्वर्ग में हम सब ना

तुझे देखेंगे सदा ।।

 

३ मेरा रोगी प्राण हे तारणहारे

तेरा क्रूस पकड़ता है

क्योंकि तेरे महाकष्ट के द्वारा

मुझे शांति मिलती है

तेरा रोदन करना और कहरना

तेरा घायल होना तेरा मरना

मुझे जब तक जीऊँगा

कुशल देता रहेगा ।।

 

४ हम जो यहा अब इकट्ठे हुए

अपने हाथ मिलाते हैं

तुझे जिसने सबके पाप उठाये

प्रेम से मानेंगे सदैव

अब तो चिन्ह के लिये कि यह गाथा

तुझ से ग्रहण हुआ तुझ को भाता

आमीन आमीन कहियो

कुशल कुशल तुम्हें हो ।।

 

#### 133 (१३३)

*"I gave my life for thee."*

*6. 6. 6. 6. 6. 6. Васа.*

*FRANCES R. HAVERGAL, 1836-79.*

*Chord - A# | S- Waltz | T-120*

 

१ दी मैंने अपनी जान

और अनमोल रक्त को भी ।

कि तेरा होवे त्राण

छुटकारा मौत से ही ।

यह जान यूं दी तुझे

क्या देता तू मुझे ।।

 

२ मैं छोड़कर स्वर्गीय बास

इस जग में आया था ।

तज गौरव सुख हुलास

शोक दुःख उठाया था ।

यूं मैंने छोड़ा सब

क्या छोड़ता है तू अब ।।

 

३ जो दुःख अत्यन्त अपार

सो मैंने सब सहा ।

कि तेरा हो उद्धार

रक्त मेरा बहा था ।

यूं दुःख में मैं रहा

क्या तू ने कुछ सहा ।।

 

४ मैं लाया क्षमा त्राण

और कुशल का संदेश ।

स्वीकार कर मुक्तिदान

और स्वर्ग में कर प्रवेश ।

यह सब कुछ लाया है

अब तू क्या लाया है ।।

 

५ नित जीवन को व्यतीत

कर मेरी सेवा में ।

तू छोड़ इस जग की प्रीत

स्वर्ग लोक के मार्ग को ले ।

ज्यों छोड़ा मैंने सब

त्यों छोड़ तू अपना सब ।।

 

#### 134 (१३४)

*"Man of Sorrows."*

*7. 7. 7.7. Haleluyah, What a Saviour.*

*ISAAC WATTS. 1674-1748.*

*Chord - A# | S-6/8 | T-088*

 

१ "दुःखी पुरूष” ! कैसा नाम !

सत अवतार ने दिया दाम,

उसने किया मुक्त का काम,

जय मसीह की ! कैसा त्राता !

 

२ मेरे पाप की लाज और भार !

सब उठा के खाई मार,

लोहू दिया, क्या उद्धार,

जय मसीह की ! कैसा त्राता !

 

३ पापी हम और मन मलीन !

बलिदान मसीह पापहीन,

निष्खोट मेम्ना प्रेमाधीन,

जय मसीह की ! कैसा त्राता !

 

४ काठ पर दिया अपना प्राण !

हुआ पूर्ण हमारा त्राण,

स्वर्ग पर अब वह विराजमान,

जय मसीह की ! कैसा त्राता !

 

५ अधिराज वह आवेगा !

अपनों को संग लावेगा,

तब हर एक यह गावेगा,

जय मसीह की ! कैसा त्राता !

 

#### 135 (१३५)

*7.7.7.7. 7. Wolt Ihr Wissen.*

 

१ नित हो मेरे प्राण का घर

गलगथा की चोटी पर

जहां यीशु ख्रीष्ट पर श्राप

लाज और निन्दा और संताप

मेरे बदले पड़ा था ।।

 

२ वहां ख्रीष्ट के कांधे पर

गिरा मेरा पाप का भार

वहां उसके पांजर के

पावन जल और लहू से

धोया गया मेरा प्राण ।।

 

३ जो चलावे अपना बाण

मेरे शरण में शैतान

ख्रीष्ट है मेरी ढाल और नाथ

जिसके बेधे हुए हाथ

मेरे ऊपर पसरे हैं ।।

 

४ चाहे जग में हूं कंगाल

मैं संतुष्ट हूँ और निहाल

ख्रीष्ट ने क्रूस पर एक अपार

और सनातन अधिकार

मेरे लिये पाया है ।।

 

५ जब तक क्रूस पास खड़ा हूँ

मैं प्रमोद से भरा हूँ

यहाँ मुझे किस का भय

मेरा ईश्वर है सहाय

मैं सदा ठहरूँगा ।।

 

#### 136 (१३६)

*4. 7. 8. 7. 8. 7. St. Leonard Original.*

 

१ सुनो कौनसी भारी वाणी

क्रूस पर ख्रीष्ट उच्चारता है

होती है सूरज को हानि

सकल जगत डरता है

पूरा हुआ पूरा हुआ

ख्रीष्ट पुकार के मरता है ।।

 

२ जय हां जय सुखदाई

मंगल वाणी जय सदा

स्वर्ग पर से प्रवाह की नाई

आत्मिक दान अब उतरेगा

पूरा हुआ पूरा हुआ

श्राप का भय न होवेगा ।।

 

३ कर्म व्यवस्था में जो छाया

जो दृष्टांत है और उपमा

सो सब पूर्ण और बंद हो गया

आगम बाचा के समान

पूरा हुआ पूरा हुआ

पूरा है हमारा त्राण ।।

 

४ बीणा लाओ और बजाओ

ख्रीष्ट को गाओ भाइयो

नित नित उसका क्रूस सराहो

उसके नाम को गौरव दो

हल्लेलुयाह हल्लेलुयाह

मेम्ना को महातम हो ।।

 

#### 137 (१३७)

*9. 8. 9. 8. 7. 7. 10 Agnus Dei.*

*NICOLAUS, DECIUS 1541.*

 

१ हे ईश्वर के मेम्ना निर्दोषी

जो क्रूस पर घात किया गया ।

निरंतर रहा तू संतोषी

तथापि तू निन्दित भया

तू ने जग पाप उठाया ।

और हमें त्राण कमाया

हे यीशु कृपा कर ईश्वर के पूत ।।

 

२ हे ईश्वर के मेम्ना निर्दोषी

जो क्रूस पर घात किया गया ।

निरंतर रहा तू संतोषी

तथापि तू निन्दित भया

तू ने जग पाप उठाया ।

और हमें त्राण कमाया

हे यीशु कृपा कर ईश्वर के पूत ।।

 

३ हे ईश्वर के मेम्ना निर्दोषी

जो क्रूस पर घात किया गया ।

निरंतर रहा तू संतोषी

तथापि तू निन्दित भया

तू ने जग पाप उठाया ।

और हमें त्राण कमाया

हे यीशु कुशल दे ईश्वर के पूत ।।

 

#### 138 (१३८)

*7. 9. 6. Lamm Gottes.*

 

१ हे ख्रीष्ट ईश्वर के मेम्ने

जो ले जाता है जगत का पाप

हम पर अनुग्रह कर ।।

 

२ हे ख्रीष्ट ईश्वर के मेम्ने

जो ले जाता है जगत का पाप

हमारी रक्षा कर ।।

 

३ हे ख्रीष्ट ईश्वर के मेम्ने

जो ले जाता है जगत का पाप

अपना कुशल हमको दे

आमीन ।।

 

#### 139 (१३९)

*11. 11.11. 5. Herzliebster Jesu.*

*YOHANN HEFIMANN, 1585-1647.*

 

१ हे प्रीतम यीशु तूने क्या ही किया

कि ऐसा कठिन न्याय लोगों ने किया ।

क्या दोष है तेरा कि तू पापी जैसा इस दण्ड में फँसा ।।

 

२ थूक मार और ठट्ठा तुझे दिया जाता

कंटीला मुकुट कोड़े मार तू सहता ।

तू सिरके से जब क्रूस पर टंगा रहता पिलाया जाता ।।

 

३ क्या है इस सारे दुःख और कष्ट का कारण

आह तुझ पर पड़ा मेरे पाप का ताड़न ।

हे प्रभु मुझे यह सब सहना पड़ता जो तू न सहता ।।

 

४ क्या दण्ड अचम्भित यहाँ मैं निहारता

अपनी भेड़ी के लिये भेड़पाल मरता ।

और अपने दोषी सेवकों का लेखा प्रभु भर देता ।।

 

५ आह अत्यन्त प्रेम असीम अकथ्य दया

जिससे तू इसी पीड़ा मार्ग पर आया ।

मैं जगत भोग में सुख बिलासी रहता और तू दुःख पाता ।।

 

६ जो तेरी दया की समानता पाता

सो मेरी बुझ में कमी नहीं आता ।

मैं उसके बदले क्या दान तुझे देऊँ कहा लेऊ ।।

 

७ मैं अपने सारे पाप को तुझ पास लाऊँ

कि तेरे लोहू में मैं धोया जाऊँ ।

और तेरे आत्मा से शुद्ध हृदय पाऊँ नवीन हो जाऊँ ।।

 

८ तब तेरी कृपा का नित स्मरण करके

तुझ निमित्त जगत भोग के लिये मर के ।

मैं तेरी इच्छा केवल मन में धरूँ और उस पर चलू ।।

 

९ मैं तेरे कारण से सब कुछ उठाऊँ

न क्रूस न कष्ट न निंदा से मैं भागूँ

न उपद्रव न मुत की पीड़ाओं से मन मेरा डरे ।।

 

१० जब स्वर्ग विभव में तेरे पास मैं जाऊँ

मैं मुकुट सिर पर धर के खड़ा रहूँ ।

तब पूर्णता से मैं तेरा धन्य मानूं और भजन गाऊँ ।।

 

#### 140 (१४०)

*"Go to Dark Gethsemane."*

*7.7.7.7.7. 7. Gethsemane or Readhead 76.*

*JAMES MONTGOMERY, 1771-1854.*

*Chord - G#m (+5) | S- Ballad | T-088*

 

१ हे परीक्षित लोगों सब

जाओ अब गतसमने को ।

युद्ध हमारे त्राता का

जाग के देखते तुम रहो ।

उसकी बिन्ती अब सुनो

प्रार्थना करना तुम सीखो ।।

 

२ न्यायालय तक चलो तुम

जीवन नाथ पर करो ध्यान ।

कैसा व्याकुल खेदित हो

सहता था निंदा अपमान ।

उसके क्लेश को अब देखो

दुःख उठाना तुम सीखो ।।

 

३ कलवरी पर्वत पर चलो

देखो पाप का बलिदान ।

पूरा करके अंत लों सब

यीशु देता अपना प्राण ।

"पूरा हुआ” तुम सुनो

मरना अब उससे सीखो ।।

#### 141 (१४१)

*“Sacred head, now wounded."*

*7. 6. 7. 6. D. Passion Chorale.*

*PAULUS GERHARDT, 1607-71.*

*Chord - Am | S- Ballad/ "---" | T-088-094/ "---"*

 

१ हे माथ जो घाव से भरा

और निन्दित है अपार

लोगों ने निज पर धरा

कंटीला निंदक हार

हे माथ जो आगे शोभित

और आदरवंत रहा

पर अभी ऐसा निन्दित

प्रशंसित हो सदा ।।

 

२ हे मुख जो था तेजस्वी

संसार का डर ओ भय

अब हुआ क्या ही दुःखी

क्यों थूक अब तुझ पर है

रूप तेरा बदल गया

और आँखों का प्रकाश

निर्दोष जो पाया गया

अब कैसे हुआ नाश ।।

 

३ जो भार तूने उठाया

है प्रभु मेरा पाप

जो ठट्ठा तेरा हुआ

सो मेरे दोष का श्राप

दृष्टि कर हे दीन दयालु

मुझ अधम पापी पर

और मुझ पर हो कृपालु

पाप मेरा क्षमा कर ।।

 

४ धन तेरा हे पियारे

हे यीशु तेरा धन

कि मुआ पाप के मारे

बचाने को लोकगण

दे कि वर तुझे धरूं

अभी से मरने लों

कि तेरे प्रेम में मरूँ

और अंत तुझही में हो ।।

 

५ जब छोडूंगा इस जग को

तब मुझे त्याग न दे

जब भोगूँगा मैं मृत को

तब मेरी सुधि ले

जब मुझे डर और त्रासा

धर लेंगे मृत समय

तब तू हो मेरी आशा

जो मेरा त्राता है ।।

 

#### 142 (१४२)

*W. R. JAMES.*

*Chord - C/C# | S- Ballad | T-084*

 

१ और किसी बात की बड़ाई न करें

यीशु मसीह के क्रूस को छोड़ ।।

२ यीशु के साथ मैं चढ़ाया गया

तौभी अब तक जीता हूँ ।।

३ मैं तो नहीं पर यीशु मसीहा

वही अब मुझ में जीता है ।।

४ मृतों में से वह जिलाया गया

जिससे मैं धर्मी ठहरा हूँ ।।

५ जब मैं पापी हो ही रहा था

मेरे लिये वह मर गया ।।

६ पाप के लिये मैं मृतक होके

ईश्वर के लिये जीऊँगा ।।

७ यीशु मसीह ने शरीर में आके

पाप पर दण्ड की आज्ञा दी ।।

८ उसके संग जो हम दुःख उठावें

तो महिमा भी पावेंगे ।।

९ अपने आप को प्रसन्न न करके

बुरों की निंदा उसने सही ।।

१० और किसी बात को हम न जानें

क्रूस पर चढ़ाये मसीह को छोड़ ।।

११ दाम दे ख्रीष्ट ने हमें मोल लिया

तो उसकी महिमा प्रगट हो ।।

 

#### 143 (१४३)

*G. 608.*

*Bhajan Tunes No. 83.*

*BANDHU MASIH.*

 

पातक दण्ड छुड़ावन यीशु क्रूस उठायो अति दुखदाई

१ पर्वत नाईं अघ मम भारी, अपनो तन पर लीन्ह उठाई ।

बोझ लिये प्रभु अंग पसीना, रूधिर समाना टपकत जाई ।।

२ हाय हाय हाय अस पाप हमारा, जीवन पति को जगत भुलाई ।

मेरे पातक कारण सोंपे, जो दुःख लीन्ह कहा नहिं जाई ।।

३ निशिभर बैरिन अति दुःख दीन्हा, प्रात बिचार आसन पहुँचाईं ।

बहु बिधि झूठे दोष लगाये, तौ प्रभु अद्भुत धीर दिखाई ।।

४ बांधे कर सिा कंटक गूंधे, कांधे पर फिर क्रूस धराई ।

तब प्रभु को डाकुन के साथे, बिकट काठ पर घात कराई ।।

५ यीशु दयामय जगजन त्राता, क्रूस चढ़ाये संकट पाई ।

ठोंके कील हाथ पगु सुन्दर, रक्त बहा नर मुक्ति उपाई ।।

६ कहि है दास धरो मम प्यारो, प्रभु पर आशा सब सुखदाई ।

बाढ़े धर्म करें शुभ कामा, शोक दोष मध साहस पाई ।।

 

#### 144 (१४४)

*Н. Т. В. 128.*

*SHUJAAT ALI.*

 

१ मुजरा है मेरा उसको जो फर्जन्दे खुदा है ।

उम्मत की शफाअत के लिये आप मुआ है ।।

२ जब चोर की मानिन्द उसे आये पकड़ने ।

चूमा जिसे आ करके यहूदा ने दिया है ।।

३ और घेर के जब उसके तई ले गये जालिम ।

फिर झूठी गवाही दे बहुत फतवा दिया है ।।

४ मरने के वक्त उसने यह खुद आप कहा था ।

ऐ मेरे खुदा तू ने अकेला क्यों रखा हैं ।।

५ दुश्मन के लिये उसने दुआ बाप से मांगी ।

तू मुआफ कर ऐ बाप जो अस सब ने किया है ।।

६ जब मर गया उसके तईं मदफून किया था ।

यह मुअजिजा उसका है कि फिर जीके उठा है ।।

७ जो लावे यकीं मौत पर यीशु कीं अजीजो ।

जन्नत है मकां उसका जहाँ नूर इ खुदा है ।।

८ इस आसी पर तू फजल कर ऐ मेरे मसीहा ।

हरगिज नहीं बचने का वह जो तुझ से जुदा है ।।

 

#### 145 (१४५)

*Η. Τ. Β. 127.*

*SHUJAAT ALI.*

*Chord - B | S- Waltz | T-124*

 

१ यीशु की मुसीबत जिस दम तुम्हें सुनाऊँ ।

आँखों सेती मैं आँसू क्योंकर नहीं बहाऊँ ।।

२ दुश्मन जब उसको पकड़े बेआबरू कैसे किये ।

ओ मानिंद चोर की बांध के उसे शामिल अपने लिये ।।

३ हाय हाय वे उसे घूसे और तमाचे मारे खींच के ।

रखा था उसके सिर पर कांटों के ताज को सज के ।।

४ नरकट के नल को लेके वे सिर पर उसके मारें ।

हाय हालत उसकी देख जो खुदा के थे दुलारे ।।

५ मुंह पर भी उसके थूके और ठट्ठे में उड़ाये ।

बुराइयां उसकी करके सलीब को तब धराये ।।

६ और मारने को ले जाके कपड़े भी सब उतारे ।

हाय हाय अफसोस की जा है लोगों ने ठट्ठे मारे ।।

७ लोहे की मेखें ठोंक के हाथ पांव को उसके फोड़े ।

सलीब को झटका देके बंद बंद उन्होंने तोड़े ।।

८ छः घण्टे पूरे यीशु रहें इस सख्त अजाब में ।

तब मर के कामिल किया सब कुछ नजात के बाब में ।।

९ हाय हाय यह क्या अजीब है गुनाह तो था हमारा ।

पर मारा गया यीशु खुदा का बेटा प्यारा ।।

१० ईमान अब उस पर लावें सब लोग जो सुनने वाले ।

महबूब ओ शाफी जानके भरोसा उस पर डालें ।।

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