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कटनी (Harvest)

488 (४८८)

“Let us with a gladsome mind” 7. 7. 7. 7. Monkland or pleyel. JOHN MILTON. 1608-74.

१ धन्य कहो परमेश्वर को सदा उस की स्तुति हो कि सनातन और अक्षय उसकी दया रहती है ।।

२ धन्य कि हमें उस ने दी प्रतिदिन ज्योति सूर्य्य की कि (इत्यादि) ।।

३ धन्य कि देता चन्द्रमा रात पर करने प्रभुता कि (इत्यादि) ।।

४ धन्य कि मेंह बरसाता है जिस से अन्न बढ़ जाता है कि (इत्यादि) ।।

५ उस के कहे से हर खेत फलवंत है हमारे हेतु कि (इत्यादि) ।।

६ धन्य कि पूंजी अन्न की भी खलिहान में उस ने दी कि (इत्यादि) ।।

७ धन्य कि भोजन स्वर्ग का ही हमें देता है वही कि (इत्यादि) ।।

८ धन्य हैं ईश्वर का प्रसाद करो उस का धन्यवाद कि (इत्यादि) ।।

489 (४८९)

7. 7. 7. 7. Innocents or St. Bees.

१ वर्षा हुई भाइयो ईश्वर को सराहियो वर्षा भी है उस का दान उसकी सामर्थ है महान ।।

२ बुझी भूमि की है प्यास मगन हुए पेड़ और घास पशु पक्षी कीट पतंग सुखी हैं हमारे संग ।।

३ हे परमेश्वर दयावन्त तेरी कृपा है अनन्त तेरी दया है अपार नाम और गुण अपरम्पार ।।

४ प्रभु देख हम पापी जन भूखे हैं हमारे मन उन में कृपा तू बरसा और सब धर्म के फल उगा ।।

490 (४९०)

“We plough the fields and scatter. ” P. M. Wir Pflugen. MATHIAS CLAUDIUS, 1740-1815.

१ हम जोतते हैं और बोते बीज धरती पर बार बार और आशिष के हम होते ईश्वर से मांगनेहार वह ओस और मेंह बरसाता कि खेत की नमी हो वह हवा को चलाता और भेजता गरमी को ।। कोरस :- सारी अच्छी आशिष ऊपर से आती है सो धन्य हो हाँ धन्य हो पिता जां दयामय ।।

२ चांद सूरज और सब तारे और जो कुछ जग में हो जो चहुँ ओर हमारे सम्भालता वह सब को अनाज और सब आधार को वही उगाता है मनुष्य और सब जानदार को वही खिलाता है ।।

३ ईश्वर पिता तेरा हम करते धन्यवाद कि तेरी अत्यन्त कृपा असीम है और अगाध दीन होके अब हम आते पास तेरे साथ सत्कार और भेंट को जो हम लाते सो तुझे हो स्वीकार ।।

491 (४९१)

“O Lord of heaven and earth and sea. ” 8. 8. 8. 4. Alms giving. CHRISTOPHER WORDSWORTH, 1805-85.

१ हे स्वामी स्वर्ग और जगत के हम तेरी स्तुति करेंगे हम क्या दे सकते हैं तुझे जो देता सब ।।

२ पवन और घाम मनभावने और फल और फूल और सारे पेड़ है कटनी तेरी कृपा से जो देता सब ।।

३ प्रेम कुशल तू ने दिया है और जो कुछ जगत भर का है हम क्यों न करें तेरी जय जो देता सब ।।

४ और तू ने भेज के पुत्र को इस जग के लिये दिया है और उस के साथ भी सभों को तू देता सब ।।

५ तू आत्मा हमें देता है जो जीवनदान और अक्षय और उसके वर उंडेलता है हम सभों पर ।।

६ पापमोचन तुझ से मिला है और स्वर्ग का भी अमित निश्चय अब तुझे हम क्या दे सकें जो देता सब ।।

७ जो कुछ भी हम तुझे देते हैं सो क्षय न कभी होता है तू उसे ले वह तेरा है जो देता सब ।।

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