
Masihi Geet Sangrah

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देशी जीवन (National Life)
495 (४९५)
“National Anthem.”
जन गण मन अधिनायक जय हें भारत भाग्य विधाता ! पंजाब सिन्ध गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंग ! विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छल जलधि तरंग ! तव शुभ नामे जागे तव शुभ आशिष मांगे गाहे तव जय गाथा जन गण मंगल दायक जय हे भारत भाग्य विधाता जय हे, जय हे, जय हे, जय, जय, जय, जय हे
496 (४९६)
JDUTT.
कोः - वरो प्रभु ! हम को यह वरदान, करें हम मातृ-भूमि सम्मान । १ कपट कलह को हम सब छोड़ें, द्वेषराग से नाता तोड़ें, प्रेम नेम से मुख नहीं मोड़ें, करें आत्म उत्थान ।। २ दुर्गुण को हम दूर भगावें, सतगुण को हम कंठ लगावें, धर्म भाव और बुद्धि बढ़ावें, भरें हृदय में ज्ञान ।। ३ दीन दुःखी के बनें सहारा, बीमारों की जीवनधारा, परस्वारथ हो धर्म हमारा, रखें यही हम बान ।। ४ सदा देश का कलह निवारें, देश-दशा को शीघ्र सुधारें, देशोन्नति में सब कुछ वारें बनें देशहित प्राण ।।
497 (४९७)
Bhajan Tunes No. 119. Chord - D | S- Ballad | T-086
प्यारा हिन्दुस्तान हमारा प्यारा हिन्दुस्तान । १ यही सुखों की कल्याणों की सब ही गुणों की खान, निश्चय सब ही गुणों की खान, सब ही गुणों की खान हमारा प्यारा हिन्दुस्तान।।
२ चिन्ता इसकी करें हमेशा इसका धर अभिमान, सभी मिल इसका धर अभिमान, इसका धर अभिमान हमारा प्यारा हिन्दुस्तान ।।
३ देवें धन को देवें मन को अर्पण कर दें प्राण, सभी मिल अर्पण कर दें प्राण, अर्पण कर दें प्राण हमारा प्यारा हिन्दुस्तान ।।
४ स्वदेश सेवा करे न जन जो जीवित नहीं मृत जान, न जन जो जीवित नहीं मृत जान, जीवित नहीं मृत जान हमारा प्यारा हिन्दुस्तान ।।
५ भारत देश को ऐ परमेश्वर करो सदा लो त्राण, प्रभु जी करो सदा लों त्राण, करो सदा लो त्राण हमारा प्यारा हिन्दुस्तान ।।
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Bhajan Tunes No. 120. THOMA DAS.
मेरा सोने का हिन्दुस्तान मेरा सोने का हिन्दुस्तान ।। तू है मेरे दिल का रोशन तू है मेरी जान ।।
कोरसः- मेरा सोने का हिन्दुस्तान ।
१ नदी नाले तुझ में घनेरे, बढ़ाते तेरी शान । कैसे सुहावन हैं तेरे जंगल, पहाड़ी और मैदान ।।
२ भांति भांति के फूल खिले हैं, पक्षी करते गान । कन्दमूल हैं तुझ में घनेरे, मेवा और मिष्ठान ।।
३ तांबा पीतल तुझ में मिलते, जिससे तू धनवान । हीरा मोती तुझ में मिलते, सोने रुपे की खान ।।
४ भक्त करते भक्ति तुझ में, ध्यानी करते ध्यान । कोई तो धोता पाप की गठरी, कर गंगा में स्नान ।।
५ पाप की नींद से जाग हे भारत, मत हो तू अज्ञान । तेरे खातिर यीशु मसीह ने दी है अपनी जान ।।
६ तेरे खातिर यीशु मसीह ने दी है अपनी जान । उसको अपना मित्र समझ कर, कर उस का सनमान ।।
७ दास विनय यह करता तुझ से, हे प्रिय हिन्दुस्तान । कर विश्वास प्रभु यीशु मसीह पर, तब तेरा कल्याण ।।