
Masihi Geet Sangrah
दृढ़ीकरण (Confirmation)
206 (२०६)
7. 7. 8. 8. 7. 7. Lowliness or Weil Ich Jesu.
१ मरने तक तू विश्वस्त हो (२)
कोई दुख मसीह के क्रूस से
तेरा मन न अलग कर
चुन तू ले सकेत मार्ग को
मरने तक तू विश्वस्त हो ।।
२ मरने तक तू विश्वस्त हो (२)
जीवन का वह मुकुट पावे
जो कि अंत तक जयवंत होवे
सो तू मार निज इच्छा को
मरने तक तू विश्वस्त हो ।।
३ मरने तक तू विश्वस्त हो (२)
अपने मन से घमण्ड दूर कर
कामना से छुटकारा पाकर
तू संसार से सावधान हो
मरने तक तू विश्वस्त हो ।।
४ मरने तक तू विश्वस्त हो (२)
अपना लंगर डाल मसीह पर
उसका बल है सबसे बढ़ कर
ताकता रह तू उसी को
मरने तक तू विश्वस्त हो ।।
५ मरने तक तू विश्वस्त हो (२)
दृष्टि रख उस तेजवान ताज पर
उसी घर को तू पयान कर
मेम्ने पास तैयार है जो
मरने तक तू विश्वस्त हो ।।
६ दे कि मैं विश्वस्त होऊं (२)
ताकूँगा हे यीशु तुझे
सद्गुण दे तू सदा मुझे
अनुगामी मैं होऊँ
मरने तक विश्वस्त रहूँ ।।
207 (२०७)
“I could not do without Thee.”
7. 6. 7. 6. D. Munich or Passion Chorale.
FRANCES, R. HAVERGAL, 1836-79.
१ लाचार मैं हूँ बिन तेरे
हे जग के तारणहार
तू अपना रक्त बहाके
ले गया पाप का भार
मुझे है एक ही आसरा
एक बात से शान्ति है
अधर्म और पाप की क्षमा
उस रक्त से होती है ।।
२ लाचार मैं हूँ बिन तेरे
न मेरी शक्ति है
कि ठहरूँ बिना टेक के
न धर्म न बुद्धि है
पर तू हे प्यारे त्राता
तू सब कुछ मेरा है
दुर्बल सामर्थी होगा
जो तू रहे सहाय ।।
३ लाचार मैं हूँ बिन तेरे
और मार्ग हैं संकटमय
मैं अति थकित होके
कहरता खाके भय
क्या कर सकूं बिन तेरे
मार्ग नहीं जानता हूँ
तू जानता और ले चलता
कि मैं न भूल जाऊँ ।।
४ लाचार मैं हूँ बिन तेरे
हे यीशु दयामय
जौ भी तू है अनदेखा
पर निकट है निश्चय
यीशु जो तू न रहता
हमारी संगत में
न चैन न शान्ति होती
इस चंचल जीवन में ।।
५ लाचार मैं हूँ बिन तेरे
अकेले तुझी को
है प्रगट मेरी इच्छा
जिस बात की घटी हो
हे धन्य प्रभु तू ही
अकेला मन में आ
संतोष चैन कुशल शान्ति
तू देता सर्वथा ।।
६ लाचार मैं हूँ बिन तेरे
काल बीतता जाता है
और मुझे थोड़े दिन में
मृत्यु पार जाना है
तू मुझे न छोड़ेगा
और जब मैं डर जाऊँ
तू निकट आ बोलेगा
“मत डर मैं तुझ पास हूँ ।।”
208 (२०८)
“O Jesus I have promised.”
7. 6. 7. 6. D. Day of Rest or Angels Story.
JOHN BODE, 1816-1874.
१ हे यीशु तेरा सेवक
मैं रहूँगा सदा
तू स्वामी है और मित्र
तू मुझे न बिसरा
मैं डरूँगा न कभी
जब बैरी करें डाह
और मैं नहीं भटकूंगा
जो तू दिखावे राह ।।
२ मैं तुझे निकट जानूँ
पर पाप है सदा पास
बार बार मुझे फुसलाते
भरम और सुख बिलास
नित बैरी मुझे घेरते
और मन में रहते भी
पर उनसे निकट तू है
और आड़ है जोखिम की ।।
३ शब्द तेरा सुनने पाऊँ
जब पाप की आँधी हो
तू आज्ञा देके थांभकर
बन्द कर उस झक्कड़ को
बोल मुझ से शान्ति वचन
और वाणी से संभाल
जब बोले तू मैं सुनूं
हे हृदय के रखवाल ।।
४ मैं तेरे पीछे पीछे
हो लेऊँ हे मसीह
और तुझसे पाऊँ शक्ति
ठीक मार्ग पर चलने की
खींच मुझे अपने प्रेम से
नित मेरी कर सहाय
और ग्रहण कर उस लोक में
कि पाऊँ सुख अक्षय ।।