
Masihi Geet Sangrah
यात्रा और अगुवाई (Pilgrimage and Guidance)
438 (४३८)
“A few more years shall roll.” HORATIUS BONAR 1803-1889.
१ अब और हैं थोड़े वर्ष और थोड़े ही से मास कि गोर में करते जो विश्राम हम सोयेंगे उनके पास ।। कोरस :- उस दिन के लिये अब मन मेरा कर तैयार हे प्रभु अपने रक्त में धो और मेरे पाप उतार ।।
२ अस्त होगा थोड़ी बेर यह सूरज तेज स्वरूप उस सुन्दर देश में होंगे हम जहां न दौड़ न धूप ।।
३ इस तोर पर थोड़ी बेर होंगे प्रचण्ड बयार हिलकोरे न उठेंगे तब न आँधी भी उस पार ।।
४ परीक्षा थोड़ी और और थोड़ा ही वियोग अब थोड़े आंसू थोड़ा क्लेश पर फिर न होगा सोग ।।
५ थोड़े विश्राम के दिन हम काटते हैं इस पार पर पावेंगे अनन्त विश्राम पहुँचे जब उस पार ।।
६ अब रही थोड़ी बेर तब प्रभु आवेगा जो मरा था अब जीता है राज्य हमें देवेगा ।।
439 (४३९)
“He leadeth me.” L. M. -- S. S. S. 542. JOSEPH GILMORE, 1834-1919. Chord - C# | S- "---"/Ballad | T-"---"/082
१ उत्तम और शान्तिदायक बात कि ईश्वर लिये मेरा हाथ हर काम हर जगह हर समय मुझ यात्री को ले चलता है ।। को० -- ले चलता है ले चलता है वह मुझ को साथ ले चलता है विश्वास से मैं चलूँगा साथ कि ईश्वर थामता मेरा हाथ ।।
२ कभी वह बीच अंधेरे के कभी वह सुन्दर बारी में सुखदाई जल पास आँधी में हाथ से ले चलता है मुझे ।।
३ तू पकड़े रह नित्य मेरा हाथ न डर न रंज है तेरे साथ जो दशा हो संतुष्ट मैं हूँ कि तेरे संग मैं चल रहूँ ।।
४ और मेरा काम जब पूरा हो जब छोडूंगा इस जगत को जब तू ले चलता है मुझे मैं डरूंगा न मृत्यु से ।।
440 (४४०)
लड़के - १ किधर जाते यात्री लोगों, किधर जाते किये भेष लड़कियां - जाते हम एक दूर की यात्रा, पाया राजा का आदेश सब - जंगल पर्वत दुःख उठाते, उसके भवन को हम जाते, जाते हैं एक उत्तम देश ।। लड़के - २ छोटे झुण्ड क्या तुम न डरते, कठिन मार्ग है सूने देश लड़कियां - नहीं दोस्त अनदेखे पास हैं, स्वर्गीय दूत टाल देते क्लेश सब - यीशु स्वामी साथ ही चलता, रक्षक अगुवा आप ही रहता, जाने में उस उत्तम देश ।। लड़के - ३ क्या पाओगे यात्री लोगों, जाके दूर के उत्तम देश लड़कियां - उजले वस्त्र तेजवंत मुकुट, प्रभु देगा प्रेम विशेष सब - निर्मल अमृत जल पीवेंगे, ईश्वर पास हम नित्य रहेंगे, जब पहुँचेंगे उस उत्तम देश ।। लड़के - ४ यात्री लोगों हम भी साथ हो, चलें उज्जवल उत्तम देश लड़कियां - आओ सही भले आये, बीच हमारे हो प्रवेश सब - आओ संग न छोड़ो कभी, यीशु नाथ तैयार है अभी, लेने की उस उत्तम देश
441 (४४१)
“My days are gliding swiftly by.” 8. 7. 8. 7. Shining Shore. DAVID NELSON.
१ जल्द मेरे दिन बीत रहे हैं मैं यात्रा करता जाता परदेश में होके दिन ब दिन मैं मार्ग का दुःख उठाता ।। कोरस :- हम खड़े हैं यर्दन किनार और एक एक निकल जाता विभव उस पार का बारम्बार इस पार तक दृष्ट हो आता ।।
२ ख्रीष्ट राजा की दृढ़ आज्ञा है मशालें तुम सुधारो उस पार के देश में अपना घर हम देखते हैं पियारो ।।
३ यात्रा के सारे दुःखों से हम भाई हार न जावें पर स्वर्ग के सच्चे आश्रित हो आशा का फल भी पावें ।।
४ यहाँ जो दुःख परीक्षा हो हम उसको क्यों न सहें तब अपने पिता पास उस पार हम शीघ्र जाके रहें ।।
442 (४४२)
“Thou art the way, Thee alone.” C. M. ― St. James. G. W. DOANE, 1799-1859.
१ तू मार्ग है केवल तेरे पास काल पाप से भाग सकें जो चाहे पिता ढूँढ़ने को तुझ ही में पावेंगे
२ तू सत्य है वचन तेरा ही सत बुद्धि देवेगा तू केवल मन को ज्ञान दिला और शुद्ध कर सकेगा ।।
३ तू जीवन है बन्ध तोड़ने से तू हुआ मृत्युंजय और जिनको तेरा आसरा है मृत्यु न करती क्षय ।।
४ तू मार्ग तू सत और जीवन है उस मार्ग पर हम चलें उस सत को पा लें जीवन भी अनंत को हम पावें ।।
443 (४४३)
“Guide me O Thou great Jehovah.” 8. 7. 8. 7. 4. 7. Zion or Dismissal. WILLIAM WILLIAMS 1717-91.
१ पन्थ बता महान परमेश्वर बाट के भूले पंथी को मैं बलहीन हूँ तू है बली मार्ग में मेरा साथी हो स्वर्गीय भोजन दे मुझ त्राण के भूखे को ।।
२ खोल दे अब वह कुण्ड बिल्लौरी निकली जिससे जीवन धार साथ और मेघ का खम्भ साथ देके मुझे यात्रा भर सम्भाल प्रबल यीशु हो तू मेरी ढाल तलवार ।।
३ मृत्यु नदी तीर जब जाऊँ चिंता भय को सब मिटा हे मुदांयक नरक नाशक चैन से बेड़ा पार लगा तेरी स्तुति करुगा मैं सर्वदा ।।
444 (४४४)
“I'm a pilgrim and I'm a stranger.” P. M.-- S. S. S. 827. MARY DONA SHINDLER.
१ मैं मुसाफिर और मैं परदेशी केवल रात भर केवल रात भर टिकूंगा मैं जल्दी जाऊँ क्यों करूँ देरी कि स्वर्ग पर जगह तैयार है मेरी मैं मुसाफिर (इत्यादि) ।।
२ उत्तम देश का जिस ओर मैं बढ़ता मेरा प्रभु मेरा प्रभु है प्रकाश वहाँ न शोक है न आहें भरना न पाप का रोना न कभी मरना मैं मुसाफिर (इत्यादि) ।।
३ वह प्रदेश है सदा उजेला उसको देखना उसको देखना चाहता हूँ इस लोक में रहता है नित्य अंधेरा जिस में दौड़ धूप तो नित होती मेरी मैं मुसाफिर (इत्यादि) ।।
४ उस प्रदेश में देख मेरे प्यारे तुम भी आओ तुम भी आओ कहते हैं अब जाने देओ यह शोक का स्थान है सांझ होती जाती संसार सुनसान है मैं मुसाफिर (इत्यादि) ।।
५ उस पार पहुँच कर फिर न परदेशी न मुसाफिर न मुसाफिर रहूँगा उस पार जा बसूँ वहाँ विश्राम है वहां आनंद और पूरा आराम है मैं मुसाफिर (इत्यादि) ।।
445 (४४५)
“I'm but a stranger here.” 6. 4. 6. 4. 6. 6. 6. 4. St. Barnabas. THOMAS TAYLOR, 1807-35.
१ यहाँ परदेशी हूँ स्वर्ग मेरा घर सराय में टिका हूँ स्वर्ग मेरा घर यहाँ है दुःख और क्लेश चारों ओर मेरे द्वेष स्वर्ग मेरा पैत्रिक देश स्वर्ग मेरा घर ।।
२ जो आँधी चले भी स्वर्ग मेरा घर यात्रा तो थोड़ी ही स्वर्ग मेरा घर दुःख सुख न रहेगा सुख शीघ्र मिलेगा स्वर्ग में जा रहूँगा स्वर्ग मेरा घर ।।
३ वहाँ यीशु के पास स्वर्ग मेरा घर होवेगी पूरी आश स्वर्ग मेरा घर संत लोग वां कुशल से प्यारे भी निज मेरे विश्राम नित्य पावेंगे स्वर्ग मेरा घर ।।
४ हर्षित मैं रहूँगा स्वर्ग मेरा घर कुछ भी मैं सहूँगा स्वर्ग मेरा घर क्योंकी मैं जाऊँगा प्रभु पास रहूँगा स्वर्ग में बास करूँगा स्वर्ग मेरा घर ।।
446 (४४६)
“Jesus lover of my soul.” 7. 7. 7. 7. D. Hollingside or Martyme. CHARLES WESLEY, 1707-88.
१ यीशु मेरे प्राण के मीत जब लों जग में रहता हूँ दुःख की धारा बहती है तेरी शरण लेता हूँ जब लो आँधी चलती हो अपने में मुझे छिपा अन्त में मेरे आत्मा को अनंत बंदरस्थान में ला ।।
२ दूसरी शरण हैं नहीं तुझ ही से मन लिपटा है मुझे तनिक भी न छोड़ नित्य सम्भाल हे दयामय तुझ ही पर भरोसा है तुझ ही से सहायता नीचे अपने पंखों के मुझ अनाथ को रख सदा ।।
३ यीशु तू है मेरी आश दया कर मुझ निर्धन पर पतित मूर्छित को उठा अन्धा रोगी चंगा कर तेरा नाम पवित्र है मैं अधर्म से हूँ भरपुर पापों से मैं घिरा हूँ तू अनुग्रह से है पूर ।।
४ मेरे पाप मिटाने को तुझ में पूरी दया है निर्मल धारा बहने दे मन को शुद्ध कर रख सदा तू है सोता जीवन का मेरे हृदय में तू बह मेरी प्यास बुझाने को सदा काल लो बहता रह ।।
447 (४४७)
“All the way my Saviour leads me.” FANNY CROSBY, 1820-1915. Chord - E | S- "---" | T-"---"
१ यीशु राह में साथ ले चलता इससे बढ़ कर क्या चाहूँ प्रभु अगुवे की शंका किस प्रकार मैं कर सकूँ कुशल क्षेम से बना रहता अब विश्वास से उसी में कि मैं जानता जो कुछ आवे शान्त रहूँगा यीशु में ।।
२ यीशु राह में साथ ले चलता ढाढ़स देता मुझी को दुःख में देता सहन शक्ति भूख में देता खाने को मेरा पांव जो ठोकर खावे मेरा मन भी प्यासा हो मैं तब देखता अपने साम्हने हर्ष से बहते सोते को ।।
३ यीशु राह में साथ ले चलता प्रेम की सब भरपूरी से पूरी शान्ति मुझे देगा घर में मेरे पिता के मेरा आत्मा जब उड़ जावे राज्य अनंत में ऊपर ही मैं यह गाऊँगा कि उसने मेरी अगुवाई की ।।
448 (४४८)
“Lead kindly light” P. M. -- Lux Benigna. JOHN H. NEWMAN. 1801-90.
१ रात अंधियारी प्रभु दूर है घर हो अगुवा कुछ सूझता नहीं मार्ग उजेला कर हो अगुवा न कहता मैं कि दूर तक राह दिखा कहां अब धरूँ पांव यह ही बता ।।
२ मेरी सदा यह बिनती नहीं थी हो अगुवा मन माने चला, तेरी सुध न की अब तू ले जा तब मोह के वश में हो घमण्ड से भर हठी मैं था यह सब न स्मरण कर ।।
३ तू इतने दिन से रहा अगुवा अब किस से डर दुःख क्या और बिपत मौत की छांह भी क्या मन धीरज धर जाता अंधेरा होता है बिहान स्वर्ग में मिलेगा सदा का कल्याण ।।
449 (४४९)
“Children of the Heavenly King.” JOHN CENNICK, 1718-55.
१ स्वर्गीय राजा के संतान चलते करो स्तुतिगान धन्य कहो यीशु को उस का यश प्रचार करो ।।
२ चलते हो उस मारग से जिस से संत लोग चलते थे वे आनंदित होते अब उनके साथ तुम होओ सब ।।
३ अब पुकारो धन्य लोग ठहरोगे तुम राज्य के योग्य जगह है वहां तैयार राज्य और प्रतिफल उस पार ।।
४ आंख उठा के भाइयो देखो नई सृष्टि को वहाँ नित्य तुम रहोगे प्रभु को तुम देखोगे ।।
५ डरो मत हे भाइयो आनंद कर के खड़े हो प्रभु यीशु कहता है आगे बढ़ो हो निर्भय ।।
६ हम हे प्रभु चलेंगे सारे जग को छोड़ेंगे तू ही अगुवाई कर और हम होंगे अनुचर ।।
450 (४५०)
“Forever with the Lord.” JAMES MONTGOMERY, 1771-1854.
१ सदा मसीह के साथ आमीन यह ऐसा हो इस वचन में जी उठना है अमरता सदा लो इस बदन में सम्बद्ध दौड़ धूप उठाता हूँ और अपने स्वर्गीय घर की ओर दिन-दिन बढ़ जाता हूँ ।।
२ पिता का स्वर्ग में धाम घर मेरे आत्मा का विश्वास से कभी देखता हूँ सुनहरा द्वार उसका उस में पहुँचने से तब होगा मेरा क्षेम संतों का उजला है निवास स्वर्गीय यरुशलेम ।।
३ सदा प्रभु के साथ पिता जो इच्छा हो तो अब भी मुझ पर पूरी कर उस दृढ़ प्रतिज्ञा को हो मेरे दाहिने हाथ तब मैं न चुकूंगा सम्भाल मुझे कि स्थिर रहूँ लड़ कर मैं जीतूँगा ।।
४ जब मेरा पिछला स्वास उस ओट को फाड़ेगा मृत्यु से हूँगा मृत्युंजय अनंत मिलेगा और मुझे अपने पास उठावे तेरा हाथ तब गाऊँगा मैं बारम्बार सदा प्रभु के साथ ।।
451 (४५१)
“There's a land that is fairer than day.” S. F. BENNETT, 1867. Chord - E | S- 6/8 | T-084
१ हम विश्वास से एक देश देखते हैं जो इस पृथ्वी से है शोभायमान वहां यीशु कर रहा तैयार मेरे लिये एक रहने का स्थान ।। कोरस- थोड़ी देर में वहाँ प्यारो जाके हम सब मिलेंगे ।।
२ अपने काम से विश्राम करेंगे शोक और क्लेश और सब दुःख होंगे दूर भजन सुन्दर मनोहर वहाँ तब हम गावेंगे हर्ष से भरपुर ।।
३ प्रेम और आशिष अनुग्रह संपूर्ण आनंद पूर्वक मन खोल के सदा यह है पिता का अद्भुत वरदान हम तब करेंगे स्तुति का गान ।।
452 (४५२)
Bhajan Tunes No. 64 or 65. SHUJAAT ALI.
अरे मन भूल रहा जगमों, अरे मन भूल । १ यह जग को मन छोड़ चलोगे, यीशु को मत भूल । इस तन की मन आशा न कीजै, होगा धूल में धूल ।। २ जब लग जीवन है मन जगमों, तभी तलक मन फूल । सुन रे आसी मन चित देके, यीशु है जग मूल ।।
453 (४५३)
Bhajan Tunes No. 70. SHUJAAT ALI.
१ क्यों मन भूला है यह संसारा, मन मत दे टुक कर ले गुजारा । इस जग में सुख नित नहि भाई, यह तो है जस पानी की धारा ।। २ मात पिता अरु खेश कुटुम्ब सब, संग नहिं कोई जावनहारा । अन्त समय सब देखन आइहैं, छन भर में सब होइहैं नियारा ।। ३ जो कुछ अंग में होगा तुम्हारे, वह भी सब मिल लै हैं उतारा । नरक अगिन में जब तुम पड़िहो, तब नहिं कोई बचावनहारा ।। ४ भाई मुक्त की खोज करो तुम, यीशु मसीह प्रभु तारणहारा । आसी तो प्रभु दास तुम्हारा, तुम बिन नाही कोई हमारा ।।
454 (४५४)
Bhajan Tunes No. 73. J. UMRAIL.
छाया समान ढलि जाय रे उमरिया । १ यश कर ले हितसों मन मुरख । एक दिन आखिर जाय रे कबरिया ।। २ सौदा जग का जग में कर ले । अन्त मिले नहि फेर बजरिया ।। ३ इस जग में मत भूल मुसाफिर । हो तैयार ले बांध कमरिया ।। ४ मुक्ति की राह प्रभु यीशु से पूछो । वा बिन पैहो न कोई डगरिया ।। ५ सोई जग तारक मुक्ति सुदाता । वा बिना नहीं कोई और दुसरिया ।। ६ निशि दिन वाहि को भज ले रे गाफिल । वाहि ने ली नित्य तेरी खबरिया ।। ७ अब विश्वास प्रभु यीशु पर लाओ । एक दिन चलना है वाकी नगरिया ।।
455 (४५५)
Bhajan Tunes No. 86. SHUJAAT ALI.
१ छोड़ो जग की माया मनुवा, या जग में सुख नाहीं मनुवा । इस जग की प्रतीत न कीजे, झूठा है यह जग रे मनुवा ।। २ यीशु मसीह की शरण गहो तुम, सरगबास तब पैहो मनुवा । यह तन में मन भूल रहे हो, इस में तो है दुःख रे मनुवा ।। ३ वाहि समे में क्या करिहो तुम, जब विकसैगी काया मनुवा । इतनी बिन्ती आसी की सुनियो, यीशु है बचवैया मनुवा ।।
456 (४५६)
Bhajan Tunes No. 41 or 42. JOHN CHRISTIAN.
दुनिया में दिल नहीं लगाना, इस जिन्दगी का कौन ठिकाना । १ ख्वाबों में जस माल खजाना, पाय करे मन मौज अपाना । चौंक पड़े सब धूरि मिलाना, तैसहि दुनिया मानु नदाना ।। २ पर नारी धन देखि दिवाना, फजिहत खाये प्राण गमाना । जौपै मिले नहि काम भराना, बुदबुद छूवत बात उड़ाना ।। ३ होश करो नर बयस सिराना, यीशु मसीह पर लाओ इमाना । जान अधम यहि सांच सिखाना, जौं सुख चाहो अमर निधाना ।।
457 (४५७)
Bhajan Tunes No. 58.
भाई नहीं जैहो, धन बांध गठरिया । १ जब तोहि काल आनि कै घेरे, छोड़ चले घरबार अटरिया ।। २ जो कुछ अंग में होगा तुम्हारे, उसकी सब मिल बांधे मुटरिया ।। ३ अब ही चेत करो नर मुरख, प्रलयकाल की कर ले खबरिया ।। ४ एक दिना प्रभु लेखा मंगिहैं, तब तेरो है कहु कौन बचैया ।। ५ जो प्रभु यीशु मर्म न जान्यो, फुंकि जैहो जैसे बन की लकड़िया ।। ६ प्रभुदास बिन्ती कर ठाढ़ो, यीशु चरण पै ध्यान धरो भैया ।।
458 (४५८)
Bhajan Tunes No. 59.
सब दिन नाहि बरोबर बीते, कबहु तपन कभु छांही । १ कभु मन शोगी कभु सुख भोगी, जिमि दिन रात बिलाही । एक दिवस मिलि है सुख राशी, अगले दिवस नसाही ।। २ बादल रंग रंग जस होते, तस जग बदलत जाही । राजा परजा धनी भिखारी, सब को है गति याही ।। ३ जग में कभु आंसू कभु हांसी, सागर जस लहराही । या भवसिन्धु बीच बहुतेरे, मुक्ति रतन बिसराही ।। ४ सोचहु मन या चंचल जग में, कौन दयाल बचाही । दीन दयाल कृपानिधि यीशु, जोखिम पार लगाही ।। ५ सत विश्वासह लंगर जानो, ख्रीष्ट तीर ठहराही । दास सदा लौलीन रहो तुम, तौ कुछ शंका नाही ।।
459 (४५९)
H. T. B. 126. CHIMMAN LAL.
१ उठ मुसाफिर कर तैयारी अब तो कुछ दिन भी नहीं है । दिल कहीं दीदा कहीं और अश्क आँखों में नहीं है ।। २ लग रहा है चल यहां रात ओ दिन एकसां बराबर । मौत का डंका बजे तुझे कुछ गम नहीं है ।। ३ मौत क्या जाने लड़कपन क्या बुढ़ापा क्या जवानी । क्या अमीरी क्या फकीरी मौत को परवाह नहीं है ।। ४ क्या तेरी आँखों में अब तक नींद गफलत की भरी है । भाई ओ मादर पिदर यां कोई भी अपना नहीं है ।। ५ माल ओ दौलत शान ओ शौकत इन में धोखा है सरासर । सारी दुनिया कोई कमावे तौभी कुछ हासिल नहीं है ।। ६ है खुशी यीशु मसीह में राह इ हक्क साबिर वही है । क्यों फिरे भटका मुसाफिर और तो कोई राह नहीं है ।।
460 (४६०)
H. T. B. 120. SHUJAAT ALI.
१ कोई दम में दम जब यह जाता रहेगा । तो ऐ दिल बात किस से नाता रहेगा ।। २ जरा नींद इ-गफलत से बेदार हो अब । तो फिर कौन तुझ को जगाता रहेगा ।। ३ तू अब नाज ओ नखवत में फूला फिरे है । यही तुझ को आखिर रुलाता रहेगा ।। ४ मुसाफिर है तू और यह दुनिया सरां है । तू कब तक यहां दिल लगाता रहेगा ।। ५ इताअत मसीह की जो करता रहे तू । तो बेशक वह तुझ को बचाता रहेगा ।। ६ जो होवे भलाई तो कर ले रे गाफिल । यहां कौन फिर फिर के आता रहेगा ।। ७ ऐ आसी कहा दिल का हरगिज न कीजो । बले तुझ को वह यां फंसाता रहेगा ।।
461 (४६१)
H. T. B. 122. SHANKAR DAYAL.
१ मिले खाक में नौजवां कैसे कैसे । गये कब्र में नुक्तेदां कैसे कैसे ।। २ सहे हैं मसीहा ने दुनिया की खातिर । जजर कैसे कैसे जिया कैसे कैसे ।। ३ दिये पांव लुंजों को अन्धों को आँखें । तवाना किये नातवां कैसे कैसे ।। ४ लाजर को हासिल हुई जान-इ-ताज । जुबां पा गये बे-जुबां कैसे कैसे ।। ५ जवानी को मरकद की चक्की ने पीसा । हुए चूर चूर उस्तुखां कैसे कैसे ।। ६ न सोहराब बाकी रहा है न रुस्तम । जमीं खा गई पहलवां कैसे कैसे ।। ७ कोई मंजिल-इ-गोर से फिर न पलटा । रवाना हुए कारवां कैसे कैसे ।। ८ करें याद किस किस को किस किस को रोयें । इन आँखों ने देखे समां कैसे कैसे ।।
462 (४६२)
AJIZ.
१ रही यह है बाकी उमर खोते खोते । रवां यह हुआ दिन अबस सोते सोते ।। २ गुलिस्तां-इ-दिल में जरा जाके देखो । कि तुख्म-इ-गुनाह है बढ़ा बोते बोते ।। ३ गुनाहों के दागों को धो, ऐ मसीहा । मैं आजिज हूँ अजखुद उन्हें धोते धोते ।। ४ करम की नजर कर इस अजिज पर यीशु । है तालिब तेरा नातवां रोते रोते ।। ५ बशीर और है थोड़ी यह मंजिल तुम्हारी । चलो अब वतन को सुबह होते होते ।।