
Masihi Geet Sangrah
सत्संगति और सेवा (Fellowship & Service)
383 (३८३)
“O Master let me walk with Thee.” WASHINGTON GLADDEN, 1836-1918. Chord - D# | S- Ballad | T-080
१ इष्ट सेवा के सत मागों में हे प्रभु तेरे साथ चलूँ खोल अपने भेद और सामर्थ दे कि श्रम का बोझ और खेद सहूँ ।।
२ सहायता दे कि मन्दों को प्रेम पूर्ण शब्दों से जगा दूँ मुझे सिखा कि भटके पांव मैं स्वर्ग के मार्ग पर ले पहुँचाऊँ ।।
३ धीरज दिला नित्य तेरे संग तेरी निज संगति में रहूँ जिस काम से होता दृढ़ विश्वास जो आश जयवन्त है मैं करूँ ।।
४ उस आशा में जो देती ज्योति दूर तक मार्ग पर भविष्य के उस शान्ति में जो तेरी है साथ अपने प्रभु जीने दे ।।
384 (३८४)
“Am I a soldier of the cross.” C. M. -- S. S. S. 672. ISAAC WATTS, 1674-1748. Chord - C# | S- 6/8 | T-088
१ क्या मैं जो चेला मेम्ने का और क्रूस का योद्धा हूँ शर्माऊँ नाम के मानने से और सेवा न करूँ ।। कोरसः- नाम से प्यारे प्रभु के जिसने दिया अपना प्राण विश्वास से क्रूस उठाऊँगा ख्रीष्ट यीशु के समान ।।
२ जयफल परिश्रम संकट से औरों ने पाया है क्या बैठूँ मैं आराम के साथ सुख भोगूँ हर समय ।।
३ क्या दुष्टो का मैं सामना कर शैतान से न लडूँ संसार पर क्या मुक्त होने का भरोसा मैं करूँ ।।
४ जो राज्य मैं करना चाहता हूँ तो निश्चय लड़ना है सहूँगा दुःख परिश्रम को जब तक न हो विजय ।।
385 (३८५)
“Must I go and empty handed.” P. M. -- S. S. S. 89. C. C. LUTHER. Chord - B | S- Waltz | T-124
१ क्या मैं छूछे हाथ से जाऊं अपने प्यारे यीशु पास उसकी सेवा मैं न करूँ न और होऊं उसका दास ।। कोरसः- क्या में छूछे हाथ से जाऊं अपने प्यारे यीशु पास उसके पास कुछ न ले जाऊँ तो मैं रहूँगा उदास ।।
२ मृत्यु से मैं कुछ न डरूं प्रभु मुझे थामता पर मैं संग कुछ न ले जाऊँ इस से लज्जित होना है ।।
३ हाय मैं था निश्चित निकम्मा मौका मैं ने खोया था मौका मुझको फिर जो मिलता काम मैं करता प्रभु का ।।
४ जब तक दिन है कर परिश्रम मन लगा के साथ विश्वास उसका समाचार सुनाके ला बहुतेरे यीशु पास ।।
386 (३८६)
“Where cross the crowded ways.” L. M. -- Walton or Rockingham. FRANK MASON NORTH, 1850-1935.
१ जां मिलते जग की भीड़ के मार्ग जां होती जाति और कूल की छूत हम स्वार्थी युद्ध से भी अधिक तेरी सुनते मनुष्य के पूत ।।
२ कष्ट कंगालपन के अड्डों पर जां भय की छाया पड़ती है जिस मार्ग में लालच दबका है आंसू तेरे दरसते हैं ।।
३ कोमल बालपन की निर्बलता स्त्रियों का शोक मनुष्य की हार भूख पीड़ित प्राण और दुःख का बोझ सब तेरे दिल पर रखते भार ।।
४ जो प्याला तेरे नाम से हो उसमें अब तक है तेरा क्षेम पर तौभी भीड़ यह चाहती है कि देखें तेरे मुख का प्रेम ।।
५ हे प्रभु अब पहाड़ पर से तू दुःखित मन को चंगा कर इन अस्थिर भीड़ों में तू रह पांव नागरिक मार्गों में फिर धर ।।
६ जब तक लोग सीख के तेरा प्रेम तेरे निज पदों पर चलें और नगर अपने ईश्वर का तब उतरे तेरे स्वर्ग में से ।।
387 (३८७)
“Sow in the morn thy seed.” JAMES MONTGOMERY, 1771-1854.
१ बिहान को बीज बो दे हाथ सांझ को मत उठा हो अलग सारी चिंता से हर कहीं बीज फैला ।।
२ तू बीज फलदाई को न चीन्ह कर सकेगा आशिशित जहां कहीं हो वह सब उगावेगा ।।
३ प्रगट फिर होवेंगे अंकुर सुहावने और बोलें डंठल शोभा से सब पूरित होवेंगे ।।
४ निष्फल न होगा काम क्योंकी उस दाने को ठण्ड आवेंगे और मेंह और घाम सब पक्का करने को ।।
५ फिर दिन में ईश्वर के जब प्रभु आवेंगे दूत काटनेहारे उतर के खत्ते में रखेंगे ।।
388 (३८८)
“Sowing in the morning.” 6. 6. 6. 5. D. S. S. S. 757. KNOWLES SHAW. Chord - A | S- 6/8 | T-088
१ भोर के समय बोते दयारूपी बीज को धूप में भी परिश्रम करते संध्या लो धीरज से काम करते फल की बाट हम जोहते कटनी में आनंद से फल हम पावेंगे ।। कोरसः- काम का पूरा फल काम का पूरा फल लावेंगे आनंद से काम का पूरा फल ।।
२ हम दौड़ धूप को सहते छाया में भी बोते बादल से न ठण्ड से साहस छोड़ेंगे कटनी के समय पर पक्का फल मिलेगा तब आनंद से काम के फल हम पावेंगे ।।
३ प्रभु ख्रीष्ट के लिये रोते हुए बोवें यदि हानि देख के हम घबराते हों दुःख का अन्त तो होगा प्रतिफल वह देगा तब आनंद से काम के फल हम पावेंगे ।।
389 (३८९)
“To the work, to the work.” FANNY CROSBY, 1820-1915. Chord - D | S- 6/8/Shuffle | T-090
१ सेवा में सेवा में हम नित्य तत्पर रहें और यों ख्रीष्ट के आदेश को हम पूरा करें लेकर उस ही की शक्ति और होकर बलवान जगत भर में प्रचारें कि सेंतमेंत है त्राण ।। कोरसः- करो काम शक्ति भर करो काम धीरज धर रख के आश और विश्वास तन मन से काम कर यीशु का ।।
२ सेवा में सेवा में भूखों को सब खिला और पियासों को जीवन के सोते पर ला लेकर क्रूस को हम ख्रीष्ट का फिर करें बयान जगत भर में प्रचारें कि सेंत मेंत है त्राण ।।
३ सेवा में सेवा में हम सब होवें बलवन्त जिससे शत्रु के राज्य पर हम होवें जयवन्त लेकर प्रभु के नाम को जो है सर्वप्रधान जाकर सब को हम कहें कि सेंत मेंत है त्राण ।।
४ सेवा में सेवा में जो हम रहें लौलीन तो हम आगे न होवेंगे मुकुट विहीन और जब स्वर्ग में नित्य होवे हमारा निज स्थान तब वहां हम गावेंगे कि सेंत मेंत है त्राण ।।
390 (३९०)
“My glorious victor, prince divine.” L. M. -- Gideon or Melcombe. H. C. G. MOULE.
१ हे जयवन्त प्रभु दैविक मीत तू अपना दास बना मुझे अब मेरी इच्छा तेरी है तू मुझे अपने वश कर ले ।।
२ हे नाथ द्वार के पास ले जा वहां मनछेदन कर मेरा तुझ में दासत्व मोक्ष ही है तू मुझे दास कर रख सदा ।।
३ हां कान और हाथ और सोच और चाह तू अपनी सेवा में लगा स्वाधीनता को मैं करके त्याग आप डालता तेरे पांव तले ।।
४ वहां उसे दबाये रख तब हाथ भरपुर दान तेरे से तेरी सेवा में यत्न कर औरों को लाऊँ पास तेरे ।।
391 (३९१)
“L. M. Rivauls or Winchester New.”
१ हे प्रिय पिता यह वर दे कि तेरे मुख की ज्योति में मैं सदा शान्ति से रहूँ और तेरा नाम प्रचार करूँ ।।
२ तू मुझ बलहीन को शक्ति दे कि तेरे प्रेम के बल ही से मैं औरों को खींच सकूँ यों तेरी सेवा में रहूँ ।।
३ तू अपना प्रेम अब मुझ में भर और बार बार मुझे शुद्ध तू कर कि तुझ से मैं भरपुर रहूँ यों तेरी महिमा करूँ ।।
४ मैं बनूँ प्रभु तेरे तुल्य हो मुझमें तेरा रूप बहुमूल्य जब तक कि देखने से मुझे न देखने पावें सब तुझे ।।
५ यूँ पिता अपना प्रेम बता यूँ अपने को प्रत्यक्ष दिखा जब तक कि प्रेम की अग्नि से सब मेरा स्वार्थ न नाश होवे ।।
392 (३९२)
ग़ज़ल
जग सेवक चर हैं हम हम हम, सब सेवक वर हैं हम हम हम ।। १ सेवक चर हैं सेवक वर हैं सुचिता शील दया के घर हैं । सेवा में रहते तत्पर हैं करते हर दम श्रम श्रम श्रम ।। २ कष्ट कहीं पर जो सुन पावें सुनते ही एक दम वां धावें । जो कुछ कर सकें मदद पहुँचावें मुस्तैदी से हम हम हम ।। ३ चाहे पड़ रही धूप कड़ी हो वर्षा की लग रही झड़ी हो । कड़क के बिजली तड़क रही हो चमक रही हो चम चम चम ।।