
Masihi Geet Sangrah
1 (१)
7. 7. 7. 7. Innocents.
१ अब अंधेरा गया है
फिर उजाला आया है
मेरा मन उजाला कर
प्रभु मन को प्रेम से भर ।।
२ पाप की इच्छा आज जो हो ।
बल दे उसे मारने को ।
यीशु तू सहारा दे
कि मैं बचूं पापों से ।।
३ मन के बुरे सोच मिटा
मुझे जोखिम से बचा ।
कभी मुझे तू न छोड़
अपना मुंह न मुझसे मोड़ ।।
४ आवेगा जब मरण काल
मुझ बलहीन को तब संभाल ।
प्रभु तू हो कृपामय
मृत्यु पर दे मुझे जय ।।
2 (२)
"Come to me Lord when first I wake."
L. M. Morning Hymn or Melcombe.
१ आ मेरे पास हर प्रातःकाल
जब जागूं मेरे मन में डाल
पवित्र सोच, हे मेरे नाथ
कि दिन बिताऊं तेरे साथ ।
२ आ मेरे पास मध्यान्हकाल
हो दिन भर मेरा प्रतिपाल
कि काम में बहुत लगने से
न तुझे बिसारूं मन से ।।
३ आ मेरे पास हर संध्याकाल
बुराइयों को तू मुझ से टाल
जब कभी भटके मन मेरा
तब उसे अपने पास फेर ला ।।
3 (३)
S. M. - Franconia or holyrood.
१ ईश्वर का धन्य हो
जो रात भर रक्षक है
तू दिन भर भी सहायक हो
यह दास की बिनती है ।।
२ मैं रात को सो रहा
विश्राम और चैन के साथ ।
और तू ने रक्षा करने को
बढ़ाया अपना हाथ ।।
३ तेरी ही स्तुति हो
इस जग के हे रखवाल ।
सुरक्षित मुझे दिन भर रख
और सदा तू संभाल ।।
४ तू अपनी आड़ में ले
अगुवाई मेरी कर ।
सब हानि और बुराई से
कर रक्षा जीवन भर ।।
५ बचा बुराई से
भलाई में बढ़ा
कि अन्तिम दिन लों जीवन के
मैं रहूँ भक्त सदा ।।
4 (४)
"Christ, Whose glory fills the skies."
7s. Ratisbon.
E. COOPER. 1805.
CHARLES WESLEY, 1707-88
१ ख्रीष्ट तू है सत ज्योतिमय
स्वर्ग पर तेरी महिमा ।
धर्म के सूरज हो उदय
पाप का अंधकार मिटा ।
मेरे हित प्रकाशित हो
प्रगट कर तू अपने को ।।
२ जो तू मेरे साथ न हो
दिन भर रहूँगा उदास
तू न प्रीत दर्शावे तो
रहूँगा मैं नित निरास ।
प्रगट कर तू प्रेम मुझ पर
मेरा मन प्रफुल्लित कर ।।
३ दर्शन दे हे सत प्रकाश
पाप की रात को नाश कर दे ।
मोह दुर्बुद्धि अविश्वास
बिला जाएं हृदय से ।
अधिकाई से सदा
मुझे अपनी ज्योत दिखा ।।
5 (५)
"Jesus stand among us."
6. 5. 6. 5. Caswall.
१ यीशु जीवनदाता
बीच हमारे आ ।
जब प्रणाम हम करते
अपने को दिखा ।।
२ प्रभु अपना आत्मा
हर एक मन में धर ।
डर और पाप और शंका
दूर तू हम से कर ।।
३ सो हम साहस पाके
लेवें अपना मार्ग ।
और सनातन दिन की
जोहते रहें बाट ।।
४ धन्य होवे पिता
धन्य पुत्र हो ।
और सनातन आत्मा
सदा धन्य हो ।।
6 (६)
L. M. Cantionale or Mainzer.
१ सिद्ध हो सबेरे मेरे प्राण
ईश्वर को गा और धन्य मान
रात बीती है हुआ बिहान
प्रभु की दया है एकसान ।।
२ प्रभु तुझे सराहता हूँ
और तेरी स्तुति करता हूँ
कि रात और दिन सांझ और बिहान
तू बिना बदल कृपावान ।।
३ अंधकार के भय और वश में से
मुझे फेर लाया तेरा स्नेह
हे प्रभु आज तू हर समय
कर मेरी रक्षा और सहाय
४ स्वर्ग मार्ग पर मुझे तू बढ़ा
और फिसल जाने से बचा
परीक्षा में हो मेरी ढाल
और पाप को मुझमें कुचल डाल ।।
५ हे पिता अपनी कृपा से
दिन भर तू सुधि मेरी ले
रह प्रीतम यीशु मेरे पास
धर्मात्मा मुझ में कर निवास ।।
7 (७)
"Awake my soul, and with the sun."
L. M. - Talls' Canon or Morning Hymn.
THOMAS KEN, 1637-1711.
Chord - D# | S- Waltz | T-130
१ हे प्राण जाग उठके पूरी कर
इस दिन की दौड़ को शक्ति भर ।।
कर आलस छोड़ के स्तुतिगान
और चढ़ा भोर का बलिदान ।।
२ काट अपना समय बुद्धि से
इस दिन को पिछला समझ ले ।
ईश्वर के दान का कर विचार
और न्याय के लिये हो तैयार ।।
३ जाग उठ हे प्राण और गाता रह
ईश्वर महान को धन्य कह ।
दूतों की नाई जो सदा
यश गाते हैं यहोवा का ।।
४ मेरे मनोरथ होवें शुद्ध
न तेरी इच्छा के विरूद्ध
कर मुझ पर सारी प्रभुता
अपने से भर तू मन मेरा ।।
8 (८)
"Awake my soul in joyful lays."
8. 8. 8. 8. 9. 8. Loving Kindness
SAMUEL MEDLEY, 1738-1799.
१ हे मन तू जाग और करले गान
और अपने चैन का कर बखान
सब सुख है यीशु का प्रेम दान
वह मंगलदाता है महान
वह मंगलदाता मंगलदाता
वह मंगलदाता है महान ।।
२ वह देखता था तेरा बिगाड़
तौभी न छोड़ा तेरा प्यार
तेरी दुर्गति करके दूर
है मुक्तिदाता प्रेम से पूर
है मुक्तिदाता मुक्तिदाता
है मुक्तिदाता प्रेम से पूर ।।
३ जब तेरे बैरी थे अनेक
न प्रगट हुआ मन का टेक
तब आया ख्रीष्ट ज्योतिस्वरूप
वह दयासिन्धु था अनूप
वह दयासिन्धु दयासिन्धु
वह दयासिन्धु था अनूप ।।
४ जब लज्जित हो तू रोता था
जब पाप से क्लेशित होता था
सदा मसीह था तेरे साथ
था धीरजदाता तेरा नाथ
था धीरजदाता धीरजदाता
था धीरजदाता तेरा नाथ ।।
9 (९)
"Day-spring of eternity."
7s Morgenglanz or Ratisbon
CHRISTIAN KNORR, 1636-1689.
Chord - D# | S-6/8 | T-086
१ हे सनातन सत प्रभा
हमको अपना तेज दिखा
तड़के हम पर हो प्रकाश
कर हमारी रात विनाश
और हमारे प्राणों में
दिन की ज्योत चमकने दे ।।
२ भोर की ओस के अनुसार
अपनी दया को उतार
हर एक थका प्राण सम्भाल
शोकितों को कर निहाल
सब को जिन के मन हैं चूर
कर तू शांति से भरपूर ।।
३ हम में तेरे प्रेम की आग
भसम करे हर एक दाग
और कि ज्योति के समान
निर्मल होवे देह और प्राण
अपनी ओर हे इष्ट प्रभा
सारे मन को ले उठा ।।
४ हे प्रकाश जो ऊपर से
उदय हुआ यह भी दे
कि जब अन्त के दिन की पौ
फटती है और तब तू न्याय
करने को फिर आता है
तो हम ठहरें निर्भय ।।
५ इष्ट उजाला आगे जा
अपने लोग वेग पहुँचा
जहाँ पाप से पूर्ण उद्धार
अनन्त सुख आनन्द अपार
जहाँ तेरी ज्योति में
हम निरन्तर चलेंगे ।।
10 (१०)
Bhajan Tunes No. 22
जै जै ईश्वर जै प्रभु यीशु, जै सब विधि सुखदाई ।
१ रैन समय प्रभु चैन दियो तुम, प्रातहि दियो जगाई ।।
२ सकल दिवस के कारण हे प्रभु, किजे मोर सहाई ।।
३ मन मतंग पै ज्ञान तिहारो, अंकुश राखु लगाई ।।
४ सुत पर पिता दयालू जैसे, करहू जानि भलाई ।।
५ सेवक पर नित तैसो कीजे, रखिये पाप बचाई ।।
11 (११)
Bhajan Tunes No. 74
JOHN CHRISTIAN.
प्रभु हे प्रातहि तव गुण गावों ।
१ दुहु कर जोरे हिय मख खोरे, मन अनुराग सुनावों ।।
२ दो नयनन पट तुमही खोलो, देखि प्रभा सुख पावों ।।
३ असन बसन बिनु कारण दायक, किन यह हाथ उठावों ।।
४ नभ धरणी के तुम्ही धारी, चरणन सीस नवावों ।।
५ और न दाता तुम सम दूजा, जिनके दास कहावों ।।
६ पुत्र दियो मम तारण कारण, यीशु प्रेम सुभावों ।।
७ जान अधम तव गुण नित गइहै, जिनु तिहि दूर दुरावों ।।
12 (१२)
Bhajan Tunes No. 39.
JOHN CHRISTIAN.
१ भजन करो नित भोरे भाई, भजन करो नित भोरे ।
यीशु चरण पै सीस नवाये, रहो सदा कर जोरे ।।
२ भजनहि गाये कलिमय जाये, पापी मन सुन मोरे ।।
गान करहु प्रेम उपजाये, तब मिलि है सुख तोरे ।।
३ भक्ति बिना झूठे नर गावत, दै पीड़ा तन कोरे ।
प्रेम बिहिन भजन मन मानो, श्वान करत जिमि शोरे ।।
४ सूर उदित खगचर सब जागे, गान करहि हिय खोरे ।
नर पापी सोवत अलसाने, लज्जित मनहु न होरे ।।
५ जागि उठो चित चेत करो तुम, खेदन तें अघ धोरे ।
जान अधम नर निज मन गुनो, जीवन जग दिन थोरे ।।
13 (१३)
Н. Т. В. 28. Bhajan Tunes No. 30
JOHN CHRISTIAN.
१ भोर भयो तू अब लों सोवत, उठ यीशु गुण गावो रे ।।
प्रात समय नव गीतहि गाए, चरणन सीस नवावे रे ।।
२ भोरहि भैरो राग अलापो, प्रेम सुतान मिलाओ रे ।।
बीन मजीरा भेरि पखावज, ऊंचहि नाद सुनावे रे ।।
३ हिरदै जंत्र सुतंत्रहि साधो, सतकृत ताल लगावो रे ।।
तान पुरा सुरनाई नादो, भक्ति सुधारस पावो रे ।।
४ गावन को गुण जोइ सिखावत, देत मधुर सुर भावो रे ।।
जान अधम तुम सदगुण ताके, प्रातहि गाय रिझावो रे ।।
14 (१४)
Bhajan Tunes No. 84.
ILAHI BAKSH.
भजन सुरज निकला हुआ सवेरा, अब तक तू क्यों सोता है ।।
१ काल खड़ा है सिर पर तेरे, नाहक जीवन खोता है ।।
२ ज्ञानी पण्डित ज्ञान बिचारे, वेद पढ़े जस तोता है ।।
३ कुकरम करके माया जोड़ी, पाप नहीं निज धोता है ।।
४ तसबी पढ़ पढ़ उमर गुजारी, कलमे से क्या होता है ।।
५ दिल में चोर घुसा है भाई, हर दम सोचे रोता है ।।
६ चेला बन के गुरू बना फिर, कडुवे बीज बोता है ।।
७ चेलो पियासो पास यीशु के, सोई जल का सोता है ।।
८ निर्बल को वह बली बनावे, जो कह दे सो होता है ।।