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  • The Holy Spirit 168–181 | Masihi Geet Sangrah

    ### पवित्र आत्मा (The Holy Spirit) #### 168 (१६८) *“Come Spirit source of light.”* *8. 7. 8. 7. Evening Prayer or Batty.* *B. BEDDOME.* १ ज्योतिर्मय पवित्र आत्मा तेरे बिना सब अंधकार । मेरे मन में ही उजाला तू उजाला करनेहार ।। २ पाप के मैल से दे छुटकारा तन और मन पवित्र कर । तेरा मंदिर मैं बन जाऊँ अपना बास तू मुझमें कर ।। ३ ईश्वर से जब प्रार्थना करूँ प्रार्थना करना तू सिखला । धर्म पुस्तक जब मैं पढूँ मुझे उसका अर्थ बतला ।। ४ हे सहायक उपदेशक मेरे साथ तू सदा हो । सर्वदा तू मन रह के मार्ग दिखा मुझ अंधे को ।। #### 169 (१६९) *“The Comforter has Come.”* *12. 12. 12. 6. D. S. S. 198.* *F. BOTTOME.* १ जहाँ मनुष्य हो वहाँ संदेश करो जहाँ मनुष्य का मन निराश और दुःखित हो सभों के कानों में आनंद का शब्द कहो एक शान्तिदाता है ।। कोरसः- एक शान्तिदाता है एक शान्तिदाता है पवित्र आत्मा को पिता ने दिया है जहाँ मनुष्य हो वहाँ संदेश करो एक शान्तिदाता है ।। २ अंधेरा गया है और सूर्य का उदय अब हुआ जिसको देख मन होता है निर्भय और शोक की आंधी भी शान्त हो थम गई है एक शान्तिदाता है ।। ३ वह सर्वशक्तिमान चढ़ाके अपना प्राण मनुष्य को देता है आरोग्यता का दान छुटकारा पाने का है बंदीगृह में गान एक शान्तिदाता है ।। ४ वह प्रेम अथाह अपार अनुग्रह निर्विकार मैं कैसे शब्दों से बताऊँ उन का सार अब मुझमें तारणहार के गुण दिखानेहार एक शान्तिदाता है ।। ५ आनंद अब स्वर्ग में हो स्वर्ग दूत प्रचार करो और जग के सारे संत यह सुन आह्वादित हो अब मीठी वाणी से सराहों यीशु को वह शान्तिदाता है ।। #### 170 (१७०) *8. 7. 8. 7. 7. 7. St. Leonard or Irby.* *HEINRICH HELD.* १ जीवित आत्मा पास हमारे अनंत सच्चे ईश्वर आ तेरी सामर्थ हम में भरे होवे प्रबल सर्वदा मन के अंधियारे में ज्योत चमकीली देखने दे ।। २ भले पथों को दिखा दे उन पर हमें नित ले चल सब कुछ आगे को सरका दे कि हम दौड़ें ही सबल फिसले चरण होवे पाप मन में दे तब पश्चाताप ।। ३ ज्ञान परामर्श सोच विचार से पूर्ण कर बुद्धि और हृदय कि हम त्यागें मन और कर से जो कुछ तू न चाहता है और हम छूटें भ्रांति से तुझे पहचानने में ।। ४ तेरी साक्षी होवे मन में कि हम ईश्वर के संतान उसको ताके प्रत्येक क्षण में दुःख में रहें धीरजवान पिता से जो ताड़ना है मेरी करती है भलाई ।। ५ ईश्वर निकट जब हम आते हमें दान कर अपनी प्रीत जब हम बिन्ती करने जाते तेरी कृपा हो प्रतीत जब हमारा मन निराश तब तू उसमें भर दे आश ।। ६ शत्रु हमको पकड़ा चाहे तू हमारी रक्षा कर दुःख ओ निन्दा हम भी सहें हममें साहस धीरता भर जब संदेह हम करते हैं होवे वचन का निश्चय ।। #### 171 (१७१) *“Holy Spirit faithful guide.”* *7. 7. 7. 7. D. S. S. 194.* *M. M. WELLS.* १ धन्य आत्मा सत्य अगुवा शिष्यों पास तू है सदा धर के हाथ हमें ले चल यह संसार है मरुस्थल थके नित आनन्दित हो सुन उस मीठे वचन को प्रेम से कहता यात्री आ पीछे चल मैं हूँ अगुवा ।। २ सब से उत्तम मित्र तू सदा पास रह हे प्रभु शक में हमको तू न छोड़ दुःख में हमसे मुंह न मोड़ बादल जब आ घेरते हैं आंधी से दिल है बेचैन प्रेम से कहो यात्री आ पीछे चल मैं हूँ अगुवा ।। ३ प्रगट कर तू अपना प्यार चारों ओर जब है अंधकार जब कुछ नहीं रहता पास सिवाय स्वर्ग आनंद की आस मृत्यु छाया बीच में जब कष्ट सहित हम चलते तब प्रेम से कहो यात्री आ पीछे चल मैं हूँ अगुवा ।। #### 172 (१७२) *“Our blest Redeemer' ere He breathed.”* *8. 6. 8. 4. St. Cuthbert.* *HARRIET AUBER, 1783-1862.* १ हमारे प्रिय प्रभु ने जब छोड़ा जगत को एक शान्तिदायक भेजा तब कि अगुवा हो । २ पवित्रआत्मा तब उतरा है धन्य वह मेहमान वह दिल को करता घर अपना और शुद्ध मकान । ३ वह अपनी शान्तमय वाणी से सब भय को करता दूर और उसको स्वर्गीय ज्योति से है दिल भरपुर । ४ सब भले काम और शुद्ध विचार सब बुद्धि और दृढ़ता सब ज्ञान का शिक्षक वह अपार और शुद्ध कर्त्ता । ५ पवित्रआत्मा दृष्टि कर निर्बल संतानों पर हमारे मन में उतर आ और वास तू कर । #### 173 (१७३) *“Gracious spirit holy ghost.”* *7. 7. 7. 5. Charity or Capetown.* *CHRISTOPHER WORDSWORTH, 1805-85.* १ प्रिय आत्मा सुन तू ले तेरे और सब दानों से प्रेम ही श्रेष्ट कहा तू ने दे पवित्र प्रेम ।। २ प्रेम दयालु धीरजवान दीन न करता है अपमान मृत्यु से भी है बलवान दे पवित्र प्रेम ।। ३ होवेगा जब पुनरुत्थान टलेगा तब आगमज्ञान प्रेम ही नहीं है नाशमान दे पवित्र प्रेम ।। ४ आशा प्रेम विश्वास जो है तीनों में पूर्ण एकता है प्रेम ही श्रेष्ट इन सब में है दे पवित्र प्रेम ।। ५ प्रिय आत्मा सुन तू ले अपने पंख की चमक से हमों पर अब पड़ने दे प्रेम पवित्र प्रेम ।। #### 174 (१७४) *“L. M. D. -- St. Serf or Sweet Hour.”* *MARTIN LUTHER, 1483-1546.* १ परमेश्वर प्रभु धर्मात्मा हे शान्तिदाता उतर आ दे हमको अपने उत्तम दान हाँ उनसे भर दे हर एक प्राण और हम में फूँक दे जीवित स्वास कि हममें उत्पन्न हो विश्वास और अपने प्रेम की अग्नि से हर अन्तःकरण जलने दे ।। २ हे इष्ट प्रकाश यह मन संवार हे गुरु श्रेष्ठ हमें सिंगार पवित्र वचन अर्थ और जड़ खोल दे और हम पर प्रगट कर दे हमको पाप से पश्चाताप यीशु के रक्त से हम पर छाप पिता से हमें दे मिला और बालक का सा मन दिला ।। ३ हे प्रबल आत्मा इष्ट रखवाल बलवान और स्थिर कर और संभाल कि अंत लों तेरी सेवा में निर्भय और अचल हम रहें शरीर की कामना दबा मार संसार के जाल से नित्य उधार शैतान पर हमें जय दिला मृतकाल में स्वर्ग का धाम दिला ।। #### 175 (१७५) *“Breathe on me breath of God.”* *S. M. -- Holyrood or Franconia.* *EDWIN HATCH, 1835-89.* १ हे आत्मा जीवन दे मन मेरा नया कर । मैं चाहूँ वह जो तू चाहे और बनूँ अनुचर ।। २ हे आत्मा जीवन दे मन जब लों शुद्ध न हो । हो मेरी चाह भी तेरी सी करने और सहने को ।। ३ हे आत्मा जीवन दे तब नाश न होऊँगा । जब लों न यह सांसारिक देह प्रकाशित हो चमके ।। ४ हे आत्मा जीवन दे तब नाश न होऊँगा । पर तेरे अनंत जीवन में सिद्ध हो नित जाऊँगा ।। #### 176 (१७६) *“Come holy spirit heavenly dove.”* *C. M. -- Marlow or Bedford.* *ISSAC WATTS, 1674-1748.* १ हे जीवनदाता शक्तिमय जिला हम सभों को । हमारे ठंडे मनों में तू स्वर्गीय अग्नि हो ।। २ वृथा सब गान हमारे हैं और राग भी वृथा सब । तुझ बिन होशना की झंकार और भक्ति शुद्ध है कब ।। ३ मृतक की नाईं जीना तो हमारा है निष्फल । हमारा प्रेम है शक्तिहीन पर तेरा है प्रबल ।। ४ हे जीवनदाता शक्तिमय जिला हम सभों को । कि ख्रीष्ट के प्रेम की अग्नि से यह मन प्रज्वलित हो ।। #### 177 (१७७) *“Come thou holy paraclete.”* *Chord - F/E | S- Waltz | T-124* १ हे पवित्र आत्मा आ और उजाला स्वर्ग का सा अपनी कृपा से चमका ।। २ उत्तम शान्तिदाता आ प्राण के प्रिय पाहुन आ हमें ढाढ़स अब बंधा ।। ३ श्रम में हमको विश्राम छाया हो जब पड़े घाम शोक और रोना सब मिटा ।। ४ हे पवित्र ज्योति अब भर दे हमें सब के सब सारा मन उजाला कर ।। ५ बिना तेरे उपकार हम मनुष्यों का क्या सार सब कुछ बिगड़ा सर्वथा ।। ६ धो ले जो कुछ मैला है सींच तू जो कुछ सूखा है चंगा कर जो घायल है ।। ७ जो कठोर है तू झुका जो निर्जीव है तू जिला भटके हुए मार्ग पर ला ।। ८ अपने प्रिय लोगों को आसरा रखनेहारों को सद्गुण के बरदान दिला ।। ९ धर्म की योग्यता तू दे मृत्यु समय मुक्ति दे स्वर्ग में सर्वदा सुख दे ।। #### 178 (१७८) *“Hover over me holy spirit.”* *Tune of Ruh Ilah Ruh Mukaddas.* *R. S. MANDRELLE, 1907-1971.* १ हे पवित्र आत्मा आके मेरे मन को शान्त तू कर अपना कर यह मन का मंदिर आके उस को कर भरपुर ।। कोरसः- कर भरपुर कर भरपुर अभी उसको कर भरपुर अपना कर यह मन का मंदिर आके उसको कर भरपुर ।। २ तेरा काम समझ न सकता तौभी मुझ में होता है मुझ को है अत्यन्त आवश्यक बास कर मुझ में हर समय ।। ३ मैं निर्बल अत्यन्त निर्बल हूँ मुझ से तू न होवे दूर हे प्रबल सामर्थी आत्मा बल से मुझको कर भरपुर ।। ४ शुद्ध कर शान्ति और आशिष दे हर एक पाप कर मुझसे दूर धन्य तेरा तू बचाता मुझ को करता है भरपुर ।। पिछले पद का कोरसः- हूँ भरपुर हूँ भरपुर अभी तुझ में हूँ भरपुर तेरा है यह मन का मंदिर तुझ से हुआ है भरपुर ।। #### 179 (१७९) *8. 8. 7. 8. 8. 7. 4. 8. 4. 8. Frankfort.* *MIEHAEL SOHIRMER, 1606-73.* १ हे पावन आत्मा उतर कर हमारे हृदय डेरा कर तू आ हे मन की ज्योति और अपने किरण कृपा से तू हम में चमकने दे- हे मन के तू लाल मोती । विशाल निहाल, अमित जीवन नित्य नूतन तुझ से पाते, जो विश्वास से तुझ पास आते ।। २ सच्चाई का तू सोता है, विश्वासी में जो बहता है ।। सो तरंग हम पर आवे । अनुग्रह कर निज मंडली पर कि मेल और प्यार में बढ़ती हो, और हम कहीं फैल जावे । यह वर तू दे की आशिष हम सभों पर हाल्लेलूयाह तेरी स्तुति सदा गावें ।। ३ कर स्वर्गीय सामर्थ हमें दान, कि जिससे होवें बलवान पवित्र युद्ध लड़ाई में तुझसे पाके रक्षा आड़ पराक्रम अपने शत्रु पर, शान्ति होवे हर समय में । दुख में सुख में, शान्तिदायक रह सहायक नित्य हमारे, जिससे दूर हो, जोखिम सारे ४ यह दे कि हम पवित्र होवें बितावें अपने जीवन को । हे आत्मिक बल हमारे, कि आगे हम को हो अज्ञात शरीर का अभिलाष आह्वाद, काम मृतक उसके सारे । खींच ले जीत ले, आत्मा प्यारे मन हमारे जग विलासी, कि हम होवें स्वर्ग-निवासी ।। #### 180 (१८०) *“Come Holy Ghost our souls inspire.”* *L. M. -- Melcombe or Tallis' Canon.* *CHARLES WESLEY, 1707-88.* १ हे शान्तिदाता अब उतर और हम में स्वर्गीय अग्नि भर । तू अभिषेक है करनेहार सातगुणा दात तू देनेहार ।। २ तू ऊपर से उंडेलता है सत्य जीवन शान्ति प्रेम अक्षय । मिटा अनंत उजाले से धुंधलेपन को हम सभों के ।। ३ हम व्याकुल हैं विराम तू दे अनुग्रह की भरपूरी से । दे बैरी से बचाके आड़ हाँ दुख और सुख में तू संभाल ।। #### 181 (१८१) भजन *P. D. GOTTLIEB.* टेकः- शुचि आत्मा तुम को धन्य-धन्य हो । १ तुम हो शान्ति कुशल के दायक । सत्य स्वरूप सुपथ के नायक ।। भक्तन ने दुःख माहि सहायक । ख्रीष्ट कीर्ति दरपन हो ।। २ पेन्तिकोस्त के दिन ज्यों आये । जीभ अग्निमय शक्तिहि लाये ।। शिष्यन के मन माहि भराये । तैसहि तब आवन हो ।। ३ विश्वासिन के संग रहो तुम । बुद्धि ज्ञान शुभ काम छहों तुम ।। पाप श्राप पाखंड दहों तुम । दास धर्म जन मन हो ।।

  • The Lord’s Supper 209–218 | Masihi Geet Sangrah

    प्रभु भोज (The Lord's Supper) 209 (२०९) 7s. Zurich or Ratisbon. JOHANN FRANCK, 1677. १ अपने को हे प्राण संवार पाप का बंधन तोड़ उतार निकल आ उजाले में अपनी ज्योति चमकने दे क्यों जो तेरा त्राता है तेरे कने आता है ।। २ सिद्ध हो दुलहिन के समान उसकी भेंट को धन्य मान मन के फाटक को दे खोल उससे तू यह बातें बोल हे मन दूल्हा भीतर आ मेरे पास तू रह सदा ।। ३ कांपते कांपते कर हुलास दया देख है उसके पास मन्ना है चंगेरी में जीवित पान कटोरे में और वह कहता है कि ले यह है मेरा रक्त और देह ।। ४ बूझ के बाहर और अपार हे प्राण हितू यह अधार पर विश्वास मैं करता हूँ और यों निकट आता हूँ तेरी इच्छा है कि आ खा और पी और तृप्त हो जा ।। ५ मैं अयोग्य हूँ और अधमय सच तथापि हो सदय तो मैं जाऊँ किसके पास जो न खावे तेरा मांस तेरे रक्त को पीवे ना सो न जीवन चखेगा ।। ६ प्रीतम त्राणी मेरी सुन अपनी मृत के सारे गुण मेरे मन में जीवन भर इसी भोज से प्रगट कर और तब स्वर्ग बियारी में मुझे भोगी होने दे ।। 210 (२१०) “There is a fountain filled with blood.” C. M. -- S. S. SS. 129 or Remember Me. WILLIAM COWPER, 1731-1800. Chord - A# | S- Ballad | T-078 १ इम्मानुएल के लोहू से एक सोता भरा है जब उसमें डूबते पापी लोग रंग पाप का छूटता है ।। २ वह डाकू क्रूस पर उसे देख पाप मोचन पाया तब हम वैसे दोषी उसी में पाप अपना धोवें सब ।। ३ जब तक मसीह की मंडली पूर्ण सब पाप से बच न जाय तब तक उस अनमोल रक्त का गुण न कभी होगा क्षय ।। ४ मैं जब से तेरे बहते घाव विश्वास से देखता हूँ मोक्षदायी प्रेम को गा रहा और गाऊँ मरने लों ।। ५ और जब यह लड़खड़ाती जीभ कबर में चुप रहें तब तेरी स्तुति करूँगा और मीठे रागों से ।। 211 (२११) “I hear thy welcome voice.” S. S. S. 475. L. HARTSOUCH. Chord - C | S- "---"/E.Movie | T- "---" १ उस मीठी वाणी को, मैं सुनता हूँ तेरी बुलाती पास उस सोते के, जो बहता क्रूस से ही ।। कोरसः- आता तेरे पास, आता हूँ मसीह धोके शुद्ध कर सोते से, जो बहता क्रूस से ही ।। २ आता अशुद्ध निर्बल, देख मेरी दशा को मलीनता से कर शुद्ध और साफ़, कि एक भी दाग न हो ।। ३ पूरा पिया Vश्वास, तू देता है मसीह पूरी आशा और चैन विश्राम, इस जग और स्वर्ग में भी ।। ४ और मेरे मन में तू, अपने निज आत्मा से सब अच्छे गुणों को उपजा, और सिद्ध तू कर मुझे ।। ५ तू अपने भक्तों को, विश्वास दिलाता है कि अपनी हर प्रतिज्ञा को, तू पूरी करता है ।। ६ धन्य पावन रुधिर को, धन्य मुक्तिमय दया को हमारे प्रभु यीशु को, धन्य अब और सदा हो ।। 212 (२१२) “Twas on that night.” L. M. -- Rockingham. १ जिस रात को पकड़ा जाता था कि काठ के क्रूस पर मारा जाय उस रात मसीह ने रोटी ली और करके धन्यवाद तोड़ दी ।। २ वह शिष्यों से यों बोला तब देह मेरी लेओ खाओ सब और जब जब ऐसा करते हो तब मेरा स्मरण सदा हो ।। ३ कटोरा भी उसने उठा फिर धन्य माना पिता का तब उसे दिया उनके हाथ और बोला अत्यन्त प्रेम के साथ ।। ४ यह नये नेम का लोहू है जो मेरी देह से बहता है तुम पीयो सब विश्वासियों कि मोक्ष की पूरी आशा हो ।। 213 (२१३) “Nothing but the blood of Jesus.” S. S. S. 874. B. LOWRY. Chord - E | S- Ballad | T-082 १- मेरे पाप क्या धोवेगा, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू मुझे शुद्ध क्या करेगा, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू ।। कोरसः- वह कैसा सोता है, हो उसके गुण की जय न दूसरा है उपाय, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू ।। २- क्या दे सकता निर्मलता, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू कारण क्या है क्षमा का, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू ।। ३- कारण है मिलाप का क्या, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू कुछ न मेरी योग्यता, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू ।। ४- यह है मेरी पूरी आस, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू यह है धर्म मेरे पास, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू ।। 214 (२१४) “Not Worthy Lord to gather up the crumbs.” 18s. Eventide. १ मैं नहीं योग्य हूँ प्रभु लेने को चूरचार जो गिरते तेरी मेज पर से देख ले इस थकित अधम पापी को जो आता तेरे ही बुलाने से ।। २ मैं तेरा पुत्र के होने योग्य नहीं न सब से नीचे मेज पास बैठने के मैं दूर तक भटका धोखा खाया भी अब मांगता केवल क्षमा तुझी से ।। ३ केवल एक बात हे प्रभु मुझ से बोल तो मैं फिर साहस पाके लडूंगा इस बात को मन में रख मैं बिना डोल जग और शैतान के क्रोध को सहूँगा ।। ४ है दया करना तेरा अधिकार दया असीम अगाध तू करता है हे प्रभु क्षमा कर मुझ दुराचार कृपा दिखाना गौरव तेरा है ।। ५ तू मुझसे कहता आके ले विश्राम मैं छेदित पाँवो पास जल्दी आता हूँ तू मुझे लाता है बीच अपने धाम यहाँ मैं तेरा भोजन करता हूँ ।। ६ आह मेरी स्तुति केवल है विनय और मेरी चाह तुझ में लीन होती है मुझ में बास कर हे प्रभु हर समय साथ खाने दे और साथ खा कृपामय ।। 215 (२१५) “Rock of Ages.” 7s Toplady or Redhead 76. A. M. TOPLADY, 1740-78. १ यीशु मेरा शरणस्थान तुझ में मेरा है कल्याण तेरे छिदे पंजर से लोहू जल जो बहे थे मेरे पाप को धोते हैं हर कलंक को खोते हैं ।। २ भला जो मैं करता हूँ आँसू जो मैं भरता हूँ धर्म का कर्म जो मेरा हो मेरे पाप छुड़ाने को तनिक काम न आता है केवल तू छुड़ाता है ।। ३ छूछे हाथ मैं आता हूँ तेरा क्रूस मैं पकड़ा हूँ मेरी सब मलीनता को अपने लोहू से तू धो नंगा हूँ अधम लाचार धर्म से मुझे तू संवार ।। ४ सांस जब तलक चलती हो वा जब सांस निकलती हो जब मैं उड़ूँ लोकों पार होगा जब मेरा विचार यीशु मेरे शरणस्थान तुझ में मेरा है कल्याण ।। 216 (२१६) “O King of mercy, from Thy throne on high.” 10. 10. Coena Domini or Pax Tecum. १ हे कृपा नाथ कान धरके स्वर्ग से हमारी सुन और हमें दर्शन दे ।। २ रक्त से बचाई हुई भेड़ों को चराके नित्य उनका रखवाला हो ।। ३ हे प्रभु अपने मरने से दिला हम मृतकों को जीवन सदा का ।। ४ तू स्वर्गीय रोटी है हम तुझ से खायें और नित्य उस आत्मिक भोज से तृप्त हो जावें ।। ५ पापी का मित्र आश्रहीन की आस तू है और मन का सुख भी तेरे पास ।। ६ अब आके हमें तू आनन्दित कर आँख तेरी रहें अपने दासों पर ।। ७ मेघ में हर दिन हमारे आगे जा और रात को आग से सदा राह दिखा ।। ८ संग सदा चल रह जहाँ हम रहें संभाल इस जीवन भर और मृत्यु में ।। 217 (२१७) L. M. Hamburg or Rockingham. १ हे प्रभु तेरी आज्ञा से हम मिल के बैठते खाने को तू जैसा बोला शिष्यों से कि मुझे स्मरण यूँ करो ।। २ हाँ यीशु तुझे जीवन भर निरंतर स्मरण करेंगे और तेरी उत्तम सेवा पर तन मन आनन्द से सौंपेंगे ।। ३ दाखरस और रोटी का दृष्टान्त निज देह का तू ने दिया है रक्त तेरा शान्ति देता है देह तेरा सच्चा भोजन है ।। ४ तू दे हम सबको सत्य विश्वास न खाने में निष्फलता हो और कृपा कर कि तेरे दास सब पावें स्वर्गीय भोजन को ।। 218 (२१८) Bhajan Tunes No. 26. PRABHU DAS. रुधिर अमोल यीशु जी को भाई । १ मुक्ति अमोल पदारथ अघसे - आदम दीन गंवाई ।। २ ईश्वर पुत्र दयाल हमारे - हम हित मुक्ति कमाई ।। ३ भटके खोजन यीशु आये - मानुष देह बनाई ।। ४ अपना लोहू बदला देके - हम हित मुक्ति कमाई ।। ५ जैसे गिरि से गंगा उतरी - मानुष पियन नहाई ।। ६ पापिन तारण कारण यीशु - अपना रुधिर बहाई ।। ७ रुधिर अमोल यीशु का जग में - मुक्ति हेतु ठहराई ।। ८ धारा पाँच मसीहा जी ने - बादल सम बरसाई ।। ९ दिवस तीसरे यीशु जी ने - मृत्यु पर जय पाई ।। १० प्रभुदास की बिन्ती प्रभु जी - लीनो माहि बचाई ।।

  • The Lord Jesus Christ 51-80 | Masihi Geet Sangrah

    भु यीशु मसीह (The Lord Jesus Christ) 51 (५१) C. M. St. Peter or Irish १ आनन्दित हो हे मेरे प्राण एक नाम को नित उच्चार एक नाम को केवल उत्तम जान वह श्रेष्ट है प्रेम का सार ।। २ वह नाम है यीशु तेरा नाम सो करना धन्यवाद सनातन लो हो मेरा काम और मेरा पूर्ण आह्वाद ।। ३ मैं पाप के कारण शोक विलाप और रोदन करता था पर तेरे नाम से मेरा पाप कुहास सा मिट गया ।। ४ और अब तक मुझे तेरा नाम आनन्दित करता है हाँ मुझे दुख में भी विश्राम इस नाम से मिलता है ।। ५ तू मुझ से दूर हो हे संसार सब तेरा धन है धूल यीशु जो मेरा तारनहार है मेरे हर्ष का मूल ।। ६ अन्धकार में मेरा दिया है मृतकाल में मेरी ढाल हर समय अति प्रिय है और सब कुछ सदाकाल ।। ७ हे मेरे प्राण तू हर्षित हो और बड़ी बाणी से यीशु के नाम की स्तुति हो और जय जयकार उसके ।। 52 (५२) 8. 5s. Hold the fort PHILLIP BLISS, 1838-76. Chord - A# | S-6/8 | T-094-098 १ आओ यीशु गुण हम गावें उस के नाम की जय उसका प्रेम और गुण बखानें उस के नाम की जय गीत गा गाके बीन बजावें उस के नाम की जय बोलो हे सब प्यारे भाइयो उस के नाम की जय ।। २ ईश्वर ने यों प्रेम दिखाया उस के नाम की जय यीशु त्राता जग में आया उस के नाम की जय क्रूस पर अपना रक्त बहाया उस के नाम की जय जय जय करो प्यारे भाईयो उस के नाम की जय ।। ३ स्वर्ग में जो अत्यंत महान है उस के नाम की जय अपनो का कृपा निधान है उस के नाम की जय पापियों पर दयावान है उस के नाम की जय उसकी स्तुति करो भाईयो उस के नाम की जय ।। ४ जग में बड़ा था अंध्यारा उस के नाम की जय इस पर यीशु प्रात का तारा उस के नाम की जय उदय हुआ सत अवतारा उस के नाम की जय धन्य कहो हर्ष से भाईयो उस के नाम की जय ।। ५ सुन्दर तारक को पियारो उस के नाम की जय जग के पालक को निहारो उस के नाम की जय उसके प्रेम को मत बिसारो उस के नाम की जय जय जय गाओ जी से भाईयो उस के नाम की जय ।। 53 (५३) "O, come let us sing," 5. 7s. १ एक-दिल होके गाओ यीशु मसीह की स्तुति उसकी कीर्ति बढ़ाओ जिसने सिद्ध की है मुक्ति क्योंकि सोता बहाया निज हृदय के खून से जहाँ धोके हम छूट जाते मन के दोष और औगुण से । जै जै तारणहारा तेरा प्रेम हम गावेंगे जब तू पाप की माया आत्मा से दूर करेगा २ जब मैला है दिल पाप से क्या ही दुःख आता और दुनिया का छल हमें बार बार फँसाता पर प्रभु का बचन आस और ज़ोर हमें देता क्योंकि वह देता मोचन और सब शतरून जीत लेता ।। ३ शायद मौत का समय जल्द हम पर आवेगा जो विश्वास का विजय और विश्वास हमें देगा मृत्यु सागर के पार जब हम तुझे देखेंगे ।। और अमर की छाया अपने पास सदा देगा ।। 54 (५४) "Wonderful love of Jesus." Chord - F | S- Waltz | T-128-130 कोरस : ओहो कैसे अच्म्भे का प्यार ।। ४ १ वह हमको बचाने सलीब पर मुआ यीशु का कैसे अच्म्भे का प्यार ।। २ अच्म्भे अच्म्भे अच्म्भे का प्यार क्रूस ही से बहती है लोहू की धार ।। ३ अब उस में सब पापी पा सकते उद्धार यीशु का कैसे अच्म्भे का प्यार ।। ४ तो सोच करके ध्यान देके आनन्द से गाओ वैसे ही ईश्वर के रास्ते पर जाओ ।। ५ सो गीत गाके खुश होके करो प्रचार यीशु का कैसे अच्म्भे का प्यार ।। 55 (५५) "How sweet the name of Jesus sounds." C. M. St. Peter or Irish JOHN NEWTON, 1725-1807. १ क्या ही मधुर यीशु का नाम विश्वासियों को है । वह शोक और दुःख में है सुखधाम सब डर भगाता है ।। २ वह चंगा करता मनों को और शांति का है धाम । है मन्ना भूखी आत्मा को और थकों को विश्राम ।। ३ वह प्रिय नाम असीम भंडार अनुग्रह से भरपूर है मेरी ढाल चट्टान आधार सब भय को करता दूर ।। ४ यीशु तू मेरा मीत रखवाल प्रवक्ता याजक है । तू राजा स्वामी दीनदयाल कृपालु हर समय ।। ५ मन मेरा नहीं शक्तिमान प्रेम में है वह निर्बल । जब देखूँ तेरा रूप तेजवान तब हूँगा भक्त अटल ।। ६ जब तक कि मुझ में रहे प्राण प्रेम तेरा गाऊँगा । और मरते समय तेरा गान मैं करता चलूँगा ।। 56 (५६) 6. 5. 8. 7. 6. 10. We in ich Ihn F. VON HARDENBERG, 1772-1801. १ कौन है स्वर्ग पर मेरा यीशु केवल तू । न संसार में कोई मेरा मनहरण है केवल तू । तेरे पास भरपूरी आनन्द आशिष कुशलक्षेम और प्रीति की ।। २ यदि तू हो मेरा छोडूंगा सब कुछ । रहूँगा मैं बन्दा तेरा तुझे छोड़ सब जानूँ तुच्छ । तेरे पीछे होलूँ चौड़े मार्ग पर भीड़ को जाने देऊँ ।। ३ प्रभु जहाँ तू हो रहूँ मैं वहाँ सोता जानता हूँ मैं तुझको सारे उत्तम दानों का भाइयों के संग में गाऊँगा मैं तेरा यश नित स्वर्ग में ।। 57 (५७) 7s. Grosser Gott or Redhead. १ खीष्ट के तुल्य कौन और क्या कहाँ ऐसी महिमा एसा तेजस और विभव कहाँ प्रेम की ऐसी लौ ऐसा बल औ ज्ञान कहाँ ख्रीष्ट को मैं सराहूँगा ।। २ सकल वस्तु का करतार सब जीवधारी का आधार जग की ज्योत और धर्म उदय पाप का नाशक यीशु है मेरा प्रभु सर्वदा ख्रीष्ट को मैं सराहूँगा ।। ३ क्या है जगत तेरा सुख भीड़ और भार और निरा दुःख राख और धूल है तेरे दान तेरी प्रीति केवल हान धोखा तेरी मित्रता ख्रीष्ट को मैं सराहूँगा ।। ४ कौन है यीशु से कृपाल ऐसा दीन और दीनदयाल ऐसा कोमल और सदय दुर्बलों पर धीरजमय ख्रीष्ट के तुल्य कोई न ख्रीष्ट को मैं सराहूँगा ।। 58 (५८) 7. 7. 7. 7. Harts or Innocents. १ जितने होवे जग के बीच छोटे बड़े ऊँच और नीच । बोलो धन मसीह सदय बोलो सब मसीह की जय ।। २ वह उतारने पाप का भार खोलने को वह स्वर्ग का द्वार । देने पापियों को सुख आया था कि सहे दुःख ।। ३ अपना लहू दिया है अपना प्राण चढ़ाया है । यीशु है सब ग्रहण योग जय जय करें सारे लोग ।। ४ भाई बोलो यीशु नाम देखो सिद्ध है त्राण का काम बोलो सारे झूठ की क्षय बोलो सब मसीह की जय ।। 59 (५९) "O for a thousand tongues to sing." C. M. Winchester Old or St. Anne. CHARLES WESLEY, 1707-88. १ जो लाखों जीभें मेरी हों तो बस न होवेंगी । कि उचित रीति से करूँ स्तुति त्राणकर्त्ता की । २ यीशु का नाम दूर करता डर और शोक मिटाता है । हर पापी उस के सुनने से सुख पूरा पाता है ।। ३ वह तोड़ के पाप की शक्तियां छुड़ाता बन्धुवा । रक्त उसका मन शुद्ध करता है और मुझे शुद्ध किया ।। ४ जब यीशु बोलता मृतक लोग तब जीवन पाते हैं । उदास तब ढाढ़स पाते और आशा रखते हैं ।। ५ हे बहिरो सुनो उसकी बात हे गूँगा स्तुत करो । हे अन्धो देखो प्रभु को हे लंगड़ो उछालो ।। ६ हे मेरे प्रभु दीनदयाल यह होवे मेरा काम । कि मैं सम्पूर्ण जगत में प्रचारूँ तेरा नाम । 60 (६०) Chord - D# | S- Ballad | T-084 तू मेरे दिल का है अज़ीज़, या मसीह (३) तुझ बिन नहीं हैं कोई चीज़, या मसीह (३) तू मेरा राजा है यीशु, बचाने वाला सत गुरू तन मन और धान का मालिक तू, या मसीह (३) १ हो दौलत दूसरे लोगों की, या मसीह (३) तू सच्ची दौलत है मेरी, या मसीह (३) क्या फायदा सोना चांदी से, जब मौत आवे मेरे लिये पुकारूँगा तब मैं तुझे, या मसीह (३) २ रात दिन तुझी से बात और चीत, या मसीह (३) हो दुआ हो या गाऊँ गीत, या मसीह (३) तू सब से पहिले और पीछे, तसल्ली देता हैं मुझे तू प्यारा है सब लोगों से, या मसीह (३) 61 (६१) "Crown Him with many crowns." D. S. M. Diademata. MATTHEW BRIDGES, 1800-94. १ मेम्ना जो तख्त पर है कर शोभित ताजों से दबाये जाते सब और राग उस स्वर्गीय गीत ही से । उठ मेरे प्राण और गा गान उसका जो मुआ अपना अनूठा राजा मान तू अब और सर्वदा ।। २ मनुष्य के पुत्र को देह धारी ईश्वर जो पहिना दो बहुत राजकीय ताज कि करे हम पर सदा राज वह कृपा-नाथ जो है और सोता दया का वह सुन्दर कमल नाई है कीच से ही निकलता ।। ३ ताज प्रीतिनाथ को दे देख हाथ पैर पंजर को घाव जिनके स्वर्ग में प्रगट हैं वहां के सभों को । स्वर्ग में न कोई दूत उन पर दर्श कर सके पर अपनी आँख मूँद लेते हैं उनके प्रमाप ही से ।। ४ ताज शान्तिनाथ को दे जिस पास नित राज दण्ड है कि सारे जग में बन्द हो युद्ध बैर क्रोध सब होवे क्षय । राज्य उसका है अनन्त और घायल पांव के पास उन परादीस के फूलों से सुगन्ध का है निकास ।। ५ ताज अमरनाथ को दे सब युग सँभालने हार जो संसार का सृजक है पालक और पोषनहार जय त्राता तेरी जय जो क्रूस पर मरा था मैं तेरी स्तुति करूँगा स्वर्गलोक में सर्वदा ।। 62 (६२) Ils Ihr Kinderlein or Frere. १ प्रशंसा कर यीशु को हे मेरे प्राण कौन कहीं दयालु है उसके समान लौलीन हो सराह उसका बड़ा पियार मत अपने त्राणदाता को कभी बिसार ।। २ मलीन होके पापी और अति दुखमय मैं साँस भर के बैठा रहा बिन आश्रय तब यीशु से मुझे आ मिला निस्तार आह प्राण कभी मत उसकी कृपा बिसार ।। ३ देख तुझे बाने को मानुष का रूप आप धारण कर उतरा परमेश्वर अनुप और दुःख उस पर पड़ा था निन्दा और मार आह प्राण कभी मत ऐसी दया बिसार ।। ४ धर्म जीवन उजाला आह्वाद और कल्याण सब हैं तेरे यीशु की कृपा के दान वह है तेरा दुल्हा और तेरा रखवार आह प्राण कभी मत अपने हित को बिसार ।। ५ संसार के आचार और व्यवहार को तू त्याग मोह मदन बिलास और कुकर्मों से भाग सब वस्तु को तुच्छ और निकम्मी विचार आह प्राण कभी मत यीशु ख्रीष्ट को बिसार ।। ६ हे यीशु तू मेरा है सब कुछ सदा दयाल हो और अपने से मुझे मिला संसार और शैतान और विनाश से उद्धार और कभी मत मुझे हे प्रभु बिसार ।। 63 (६३) "I sing the praise of love unbounded." 9. 8. 9. 8. 9. 9. St. Petersburg. GERHARDT TERSTEEGN, 1697-1769. १ मैं प्रेम के गुण प्रशंसा करता जो यीशु ख्रीष्ट में प्रकट है । और अपने को समर्पण करता उसको जो मेरा प्रेमी है । निज दुर्बलता मैं बिसर जाता प्रेम सागर में मैं डुबकी मारता ।। २ तू मुझ पर क्या ही प्रीति रखता मन तेरा मुझे चाहता है । इस प्रेम के बल से खींचा जाता सब कुछ जो मेरे भीतर है । आह प्रेम असीम जो स्वर्ग से आया मैं तेरा हूँ तू मेरा है ।। ३ मन जीवन मेरा तू ने लिया हे मुक्तिदाता धन अपार । हाँ मेरे लिये आप को दिया और मेरा किया है उद्धार । हे पतित पापियों के त्राता मैं तेरा गाऊँ नित गुणगाथा ।। ४ हे यीशु अपना नाम मनमाहीं नित रहने ओ चमकने दे । और अपना प्रेम अत्यन्त सुखदाई मन बच ओ कर्म में दिखने दे कि आत्मा प्राण ओ देह हमारे मेरा सम्मान करें हे प्यारे ।। ५ यीशु के नाम की गावें स्तुति जिस में पियार का सोता है । जिस से यहाँ प्रेम धारा आई जिससे स्वर्गवासी पीते हैं । वे कैसे झुकते दीनहीन रूप से और हाथों जोड़ कर आनन्द करते ।। 64 (६४) C. M. - Evan or St. Agnes. १ मैं पापी जब मसीह का नाम । सोचूँ तब छूटता भय वह यीशु है और उसका काम । पाप से बचाना है ।। २ ईश्वर का बेटा और मसीह । और जगत का निस्तार मण्डली का सिर और दुल्हा भी । धर्मात्मा देनेहार ।। ३ भला रखवाला भेड़ों का । और जगत का प्रकाश राजा यहूदी लोगों का । अन्य देशियों की आश ।। ४ वह अमृत जल और मन्ना । और जीती दाखलता मध्यस्थ जो बिनती करता है । और मेम्ना ईश्वर का ।। ५ वह मार्ग और सत्य और जीवन है । श्रेष्ठ याजक बलिदान स्वयम्भू प्रथम पिछला है । पहिलौठा पुनरूथान ।। ६ पर नहीं बनता है मुझ से । यीशु के योग बखान प्रभु दयाल तू मुझे दे । कि पाऊँ तुझ से त्राण ।। 65 (६५) "I will sing of my Redeemer." 8. 7. 8. 7. My Redeemer. PHILLIP BLISS, 1838-76. Chord - F | S- "---" | T-"---" १ यीशु नाथ के प्रेम अपार का करूँगा मैं स्तुतिगान । उसने क्रूस पर प्राण दे अपना मुझे मुक्ति की प्रदान कोरस :- गाओ गाओ प्रेम मसीह का जिस रक्त से हुआ त्राण ।। मेरा सारा ऋण भर दिया जिसने क्रूस पर दिया प्राण ।। २ उस के इस अनोखे प्रेम का नित करूँगा मैं बखान । पापियों को तारने निमित प्राण को किया बलिदान ।। ३ उस की स्तुति क्यों न गाऊँ जिसकी सामर्थ है अक्षय । मृत्यु नरक पाप के ऊपर मुझे देता कैसी जय ।। ४ प्रेम का प्रेरित हो मैं गाऊँ यीशु का अनूठा प्यार । उसने मुझे जीवित किया वह है मेरा प्राणधार ।। 66 (६६) "Fairest Lord Jesus" 5. 5. 8. D. Crusader's Hymn. FROM MUNSTER GESAN & BUCH, 1877. १ यीशु पियारे प्रभु हमारे सत मनुष्य और सत ईश्वर तू मेरा प्रीत है यही सुहावना सब से मन भावना तू मेरे मन का है प्रेमनाथ ।। २ खेत लहलहाता बन डहडहाता बड़ी सुन्दरता के साथ यीशु प्रकाशी सब से प्रतापी तू मेरे मन का है प्रभा ।। ३ सूरज चमकता चाँद भी झलकता सब से प्रतीत है और सब मण्डल तारों का बिराजमान है मन मेरे पर ।। 67 (६७) "There is no name so sweet on earth." 8. 7. 8. 7. D. Sweetest name. E. ROBERTS Chord - F | S- Ballad | T-084 १ यीशु सरीखा मीठा नाम न पृथ्वी पर न स्वर्ग में जो जन्म से पहले ईश्वर ने त्राणकर्ता का ठहराया ।। कोरस :- हम यीशु नाम को गाते है हमारा प्यारा यीशु जो शब्द हम कान से सुनते हैं सभों में प्यारा यीशु २ यीशु के क्रूस के ऊपर भी यह नाम था लिखा गया कि सब लोग जाने उसको हम क्यों प्यार न करें सदा ।। ३ अब ईश्वर के सिंहासन पर त्राणकर्ता राजा यीशु पापों की क्षमा करने को वह अधिकार को रखता ।। ४ यीशु अनोखे नाम का यश कभी नहीं घटेगा वह आज है कल था और सदा एक सा रहेगा यीशु ।। 68 (६८) "All praise to him who reigns above." C.M. and Chorus Chord - G | S-6/8 | T-084 १ सिंहासन पर विराजनेहार की होवे महिमा कि पुत्र भेजकर किया है उद्धार मनुष्यों का ।। कोरस :- धन्य यीशु नाम, धन्य यीशु नाम, धन्य प्रभु यीशु का नाम धन्य यीशु नाम, धन्य यीशु नाम, धन्य प्रभु यीशु का नाम २ सब नामों से वह नाम है ऊर्द्ध प्रशंसा योग और श्रेष्ठ ईश्वर के दूत भी भजते हैं कि यीशु है नरेश ।। ३ मनुष्यों का तू मित्र है उद्धारक रक्षक भी और तू ने अपनी मृत्यु से मनुष्य की मुक्ति की ।। ४ और अद्भुत युक्ति करनेहार प्रधान है शान्ति का इस जग के राज्यों पर प्रबल है नाम ख्रीष्ट यीशु का ।। ५ त्राण पाकर सारे जातिगण मसीह के होकर दास करेंगे योग्य स्तुति गान प्रभु के चरणों पास ।। 69 (६९) भजन JOHN CHRISTIAN एक नाम यीशु सांच । सर्व झूठ औरू रे ।। १ तेहि नाम छांड़ि मूढ़ । पड़त भरम भैरू रे ।। अमिय मूरि सुखद कन्द । लखत नाहि बौरू रे ।। २ आन नाम छलहि ठाम । हाथ लाय छौरू रे ।। उदर नाहि भरत खाय । घाट श्वान कौरू रे ।। ३ जैसे ही तृषित हिरिन । गहन चहत दौरू रे ।। आय निकट दूरि जात । जात प्राण ठौरू रे ।। ४ यीशु नाम तरण धाम । नाहि जगत औरू रे ।। जान जेइ सेइ लहत । शीस मुक्ति मौरू रे ।। 70 (७०) Bhajan Tunes No. 71. C. D. JADHAV Chord - C# | S- Ballad | T-084 क्यों नहि गैहों गुण शतवारा । अस मित है नहि या संसारा ।। १ तीन लोक पति नर तन लेके, सह्यो दुःख और शोक अपारा ।। २ प्राण दान जग हेतु कियो है, जगत कहीं नहि ऐसो प्यारा ।। ३ यीशु समीप चलो नर, वह निश्चय जग तारणहारा ।। ४ बैरिनहित बैरिन में आयो, छल कर बैरिन वाहि संहारा ।। ५ मित्र निमित नर मरन न कोई, शत्रुन को प्रभु कीन्ह उधारा ।। ६ आश्रित लाखों धन्य कहतु है, धन्य सदा प्रभु नाम तिहारा ।। 71 (७१) Bhajan Tunes No. 89. कोरस :- जै जै यीशु जै जै यीशु, जय मृत्युं जै जै जैकार सिरजनहार पालनहार तारणहार । १ दीनों का दुःख हरनेवाला, हृदय में शान्ति भरनेवाला जय जनरंजन जय दुःखभंजन, जै जैकार सिरजनहार, पालनहार तारणहार । २ नर तन धार लियो अवतारा, दै निज प्राण कियो छुटकारा जै जगत्राता जै सुखदाता, जै जैकार सिरजनहार, पालनहार तारणहार । ३ मृत्यु के बन्धन भंजनहारा, अक्षय जीवन देवनहारा रोगिन शोकिन एक अधारा, जै जैकार सिरजनहार, पालनहार तारणहार । ४ जै जैकार करो सब प्यारो, नर नारि एक संग पुकारो नारा मारो जै ललकारो, जै जैकार सिरजनहार, पालनहार तारणहार । 72 (७२) Bhajan Tunes No. 13 or 14. JOHN CHRISTIAN जय जनरंजन जय दुःखभंजन, जय जय जय सुखदाई । १ आशरन के शरनागति दायक, प्रभु यीशु जगराई ।। २ पाप निवारन दुष्ट बिदारन, सन्तन के सहजाई ।। ३ अद्भुत महिमा जगत दिखाए, भूमि निवासन आई ।। ४ अलख अगोचर अन्तरयामी, नर तन देह धराई ।। ५ अत गुन तेरो कत मैं गुनिहों, तारन तें अधिकाई ।। ६ उदधि समाना प्रेम तिहारो, जा मध जगत समाई ।। ७ जान अधम जन को प्रभु दीज, बिन्दु समाना ठांई ।। 73 (७३) Bhajan Tunes No. 22 JOHN CHRISTIAN जय प्रभु यीशु जय प्रभु यीशु दानी । १ परम पदारथ के अधिकारी, सद्गुण के तुम खानी ।। २ दुःखितन के दुःखहरता तुम्ही, शील सरल सनमानी ।। ३ जग में जेते जीव चराचर, धारण कर निज पाणी ।। ४ नित दिन ताके पोषण करता, भक्षण आगे आनी ।। ५ जौं कृतघ्न पापिन नर नारी, क्रूर कुटिल अज्ञानी ।। ६ कर सुखदायक तदहु न मूनत, पालत निज जन जानी ।। ७ दय चित तिहि गुण मिल जुल गाओ, चैतन जेते प्राणी ।। ८ जान अधम नर शुभ इत लहि हैं, उत लहि हैं गति त्राणी ।। 74 (७४) Bhajan Tunes No. 50. JOHN CHRISTIAN. जै प्रभु यीशु जै प्रभु यीशु, जै प्रभु यीशु स्वामी ।। १ जै जगत्राता जै सुखदाता, जै जै प्रभु अनुपामी ।। २ जै भयभन्जन जै जनरंजन, जय पूरन समकामी ।। ३ पाप तिमिर धन नाशक तुमही, धर्म दिवाकर नामी ।। ४ कलिमल दूषण हरता तुमही, संकट बट सहगामी ।। ५ नर तन धारि लियो अवतारा, तजि सुन्दर दिवधामी ।। ६ दै निज प्राण उबारि लियो तुम, पापिन बहु दुरकामी ।। ७ अस गुण तेरो कस मैं गाओं, छन्द प्रबन्ध न ठामी ।। ८ अटपटि टेरन जानक सुनिये, पतित उधारण नामी ।। 75 (७५) Bhajan Tunes No. 67. NAINSUKH. मसीह अस टेर सुनाई, सब चित में लेहु समाई । १ द्वादश शिष प्रभु संग लिवाये, नगरन धूम मचाई ।। बात कहत अरधांगि उठायो, मृतक बहुत जिलाई ।। २ कोढ़िन को प्रभु चंगा कीन्हा, बधिरन दीन्ह सुनाई ।। पांच सहस्त्र को पांचहि रोटि, टूकन ढेर उठाई ।। ३ एक समय प्रभु नौका बैठ्यो, चलत बयार सवाई ।। चेले सब घबरावत बोले, प्रभु जी लहु बचाई ।। ४ ठाढ़े हो प्रभु हांक पुकारी, सब दुःख दीन्ह भगाई ।। ऐसे काम प्रभु अगणित कीन्हें, जग में नाम चलाई ।। 76 (७६) Z 516. JOHN CHAMBERLAIN. मैं गुण तुम्हारे गाऊँगो यीशु मैं गुण तुम्हारे गाऊँगो । १ विभव स्वरग भुवन में छोड़के आप या भुवन में आये निस्तार करनो जन । २ भये ईश्वर अवतार कहा करूंगो विस्तार शीशु है अनाथ को धन । ३ आप ने कियो जब आरम्भ बहुत से किये तब अचंभ जिनतें ईश्वर प्रकट भये । ४ अन्धे देखन पावत भये । गूँगे बचन बोलत भये । लंगड़े कूदत फिरत रहे । ५ आप से रोगी अच्छे भये मरे जीके फिर उठ गये । ऐसे तुमने किये बहुत । ६ पकड़े जे थे भूतन ते निकरे गये भूत उनतें सब तुम्हारे बशी-भूत । ७ जैसे आपने यह सब किये जैसे हमतें अब कीजे मिटाईवे को हमारो पाप । ८ वचन चलन लोचन देउ मरे सभनकुँ जिलाउ हमतें टारो सब संताप । ९ हम सब पापी अपराधी गुण तुम्हारे सअगाधी आप ने दियो प्रान को दान । १० कैसो प्रेम तुम्हारो प्रभु ऐसो कौन मिलेगो कभु हे यीशु हो हमारो त्रान । 77 (७७) Bhajan Tunes No. 43 or 44. JOHN CHRISTIAN. यीशु नाम यीशु नाम, यीशु नाम गाउ रे । १ यीशु नाम गुणन धाम, धर्म ग्रन्थ ठाउ रे । ध्यान नाम पुरत काम, सत्य प्रेम भाउ रे ।। २ सूर उदित जलज मुदित, अस्तहि मुरझाउ रे। सन्त कमल नाम किरण, तैसही लगाउ रे ।। ३ नाम अस्त्र शस्त्र नाम, युद्ध बुद्ध दाउ रे । त्रिविध ताप जेहि दाप, सर्व दूरि जाउ रे ।। ४ सबहि हाल सबहि काल, भक्त शक्ति पाउ रे । जान अधम सोई नाम, नरनि मुक्ति ठाउ रे ।। 78 (७८) Bhajan Tunes No. 90 PREM DAS Chord - D | S- Ballad/Dholak | T-086-090 हम से बरनी न जाय मसीह तुम्हारी महिमा । १ तुम स्वर्ग छोड़ कर आये, तुम मुक्ति और जीवन लाये, कि पापी लिये बचाये । २ अन्धों को आँखें दीना, कोढ़िन को चंगा कीना, कि मुर्दे दिये जलाये । ३ पानी पर चल दिखलाया, तू ने हवा को डांट थमाया, कि चेले लिये बचाये । ४ मेरे पाप क्षमा सब कीना, मेरे दिल में दर्शन दीना, कि प्रभु से दिया मिलाये । ५ सूली पर बरछी खाई, तूने अमृत धार बहाई, कि दास सदा गुण गाये । 79 (७९) AJIZ. १ खुदा की मुहब्बत जो हम देखते हैं । तो अदल ओ रहम हम बहम देखते हैं ।। २ मसीह का तसव्वर जो करते हैं दिल में । जनबा इ इलाही को हम देखते हैं ।। ३ मसीह के सिवा कोई शाफी नहीं है । खुदा की खुदाई में हम देखते हैं ।। ४ मुकिर अपनी इसियां के होते हैं जिस दम । मसीह की शफाअत को हम देखते हैं ।। ५ न है खौफ अज़िज़ को कुछ रोज़ इ महशर । सलीब इ मसीह को जो हम देखते हैं ।। 80 (८०) J.UMRAIL. १ तुझ सा जहाँ में देखा नहीं पुर वफा कहीं, हमसर न तेरे कोई अजल से बना कहीं । २ बदले में हम सभों के, लो क्या क्या न दुःख सहा, सदमें कहीं, सलीब कहीं और जफा कहीं । ३ इमदाद हम सभों की हाँ क्या क्या न बन के की, मुंजी कहीं, तबीब कहीं, रहनुमा कहीं । ४ करते हैं खुबियों का तेरी शोर जा बजा, बुलबुल कहीं, चमन कहीं, बादे सबा कहीं । ५ कर दास को भी फजल से मेरे मसीह अता, दिल भी कहीं, दिमाग और ताबे रसां कहीं ।

  • The House of God 186-188 | Masihi Geet Sangrah

    ### गिर्जा घर (The House of God) #### 186 (१८६) *S. M. -- Bolyston or Franconia.* *Chord - C | S- Ballad | T-078* १ अब आये गिर्जे में जो घर आराधना का आराधना में लगे रहें और करें हम प्रार्थना ।। २ शिक्षक को शक्ति दे और सुनने वालों को कि सत्यता और आत्मा से आराधना सुन्दर हो ।। ३ प्रार्थना को ग्रहण कर और गीत भी ग्राह्य हो शिक्षा जो अब अवश्य हो तू दे हम सभों को ।। #### 187 (१८७) *“O Lord of hosts whore glory fills.”* *L. M. -- Melcombe or Old Hundred* *J. M. NEALS.* १ हे स्वामी सारी सृष्टि के यह घर हो तेरा अभी से और तेरी आँखें दिन और रात इस ओर हो आशीवाद के साथ ।। २ जब तुझे ढूँढ़े तेरे लोग हो उनकी प्रार्थना ग्रहण योग्य कर दया दृष्टि उन्हीं पर और स्वर्ग के सुन के क्षमा कर ।। ३ जब यहाँ तेरा समाचार उपदेशक करेंगे प्रचार तब आदर पावे तेरा नाम और प्रगट हों आश्चर्य काम ।। ४ जब गीत गा गाके धन्य मान लोग यहाँ करें स्तुति गान तब सुनके उन्हें ग्रहण कर और कुशल हर एक मन में भर ।। ५ वास कर न केवल घर ही में पर हम भी तेरे मंदिर हो नवीन कर हर एक हृदय को कि तेरे योग्य सिंहासन हो ।। #### 188 (१८८) *L. M. Hursley.* १ जब गिर्जे में हम जाते हैं ईश्वर के संमुख आते हैं प्रशंसा उसकी गाने को और आशिष उससे पाने को ।। २ क्या ही पवित्र उसका नाम यह है यहोवा ही का धाम जब उसके निकट जाना है आदर से जानला उचित हैं ।। ३ वह बूझता है हमारे ख्याल वह देखता है हमारी चाल हम डर के साथ झुकावें सिर और गिरे उसके पावों पर ।। ४ हे प्रभु अब उपस्थित हो दे आशिष अपने दासों को जो आपको जानता निरुपाय तू उसकी करेगा सहाय ।।

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