
Masihi Geet Sangrah

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- Holiness and Prayer 347-361 | Masihi Geet Sangrah
पवित्रता और प्रार्थना (Holiness and Prayer) 347 (३४७) “More holiness give me.” 6. 5. 6. 5. D. S. S. S. 582 or Lyndhurst. PHILLIP BLISS. 1838-79. १ और शुद्धता तू दे और मन में उद्योग और धीरता हर दुख में और पापों से सोग और प्रभु की आशा और उसी से प्रीत और सेवा की लालसा और प्रार्थना में जीत ।। २ और कृतज्ञता दे और प्रभु में बास और उत्साह भी काम में और वचन की आस और प्रभु की संगति और दुःख में सहभाग और स्थिरता बिपत में और भी धन्यवाद ।। ३ और साधुता दे दे और जीतने का बल और मन की निर्दोषता और आत्मा का फल और शुद्ध मैं हो जाऊँ और काम का हर स्थान और होऊँ आशिशित और तेरे समान ।। 348 (३४८) “Pray always, pray.” १ नित्य प्रार्थना कर पवित्र आत्मा तो तुझ में जताता है जो मांगना हो ।। २ नित्य प्रार्थना कर बोझ तले पापों के तू लहू को तब देख ले यीशु के ।। ३ नित्य प्रार्थना कर जो थका आस्राहीन तू ईश्वर पास रह सकता है आधीन ।। ४ नित्य प्रार्थना कर कोलाहल हो आस पास प्रार्थना से मिलती टेक और दुःख में आश ।। ५ नित्य प्रार्थना कर जो सुख बढ़ जावे भी गीत गाने में यीशु के लगता जी ।। ६ नित्य प्रार्थना कर जो मीत मर जावें भी साथ उन के अक्षय संगत होती ही ।। ७ सांसारिक बात सब बीती जाती है। पर प्रार्थना से अमरता मिलती है ।। 349 (३४९) “Lord, I hear of showers of blessing.” ELIZABETH CONDER, 1860. Chord - E | S- Waltz | T-126 १ प्रभु तू आशिष बरसाता दया की भरपूरी से सूखे स्थान पर मेंह गिराता मुझ पर भी कुछ पड़ने दे मुझ पर भी मुझ पर भी मुझ पर भी कुछ पड़ने दे ।। २ छोड़ न मुझे मेरे पिता मुझ ही बड़े पापी को जो तू छोड़ता तो मैं मरता दया तेरी मुझ पर हो मुझ पर हो ।। (इत्यादि) ३ छोड़ न मुझे प्रभु प्यारे तुझ से प्रेम मैं रखूँगा मैं तो आता हाथ पसारे मुझको भी अब पास बुला मुझको भी ।। (इत्यादि) ४ छोड़ न मुझे शान्तिदायक आंख तू खोलता अंधों की तू है प्रार्थना में सहायक शान्ति दे अब मुझ को भी मुझ को भी ।। (इत्यादि) ५ प्रेम परमेश्वर का अटल है लोहू सेंत मेंत यीशु का और अनुग्रह भी असीम है मुझ में सब को तू बढ़ा मुझ में ही ।। (इत्यादि) ६ छोड़ न मुझे अब बचा के मुझे आप में जोड़ तू ले तू आशिष की बारिश भेज के मुझे अब पूर्ण आशिष दे मुझे दे ।। (इत्यादि) 350 (३५०) “There's power in the blood.” P. M. S. S. S. 145. L. E. JONES. १ पापों के बोझ से क्या बचोगे तुम यीशु में गुण यीशु में गुण पापों पर जयवंत होगे तुम हमारे यीशु में है गुण ।। कोरसः- गुण है गुण गुण पाप मिटाने गुण यीशु में गुण यीशु में गुण गुण है गुण गुण पाप मिटाने गुण प्रभु यीशु में है गुण ।। २ क्रोध और घमण्ड से क्या छूटोगे तुम यीशु में गुण यीशु में गुण कलवरी के पास अभी जल्द जाओ तुम हमारे यीशु में है गुण ।। ३ क्या दिल को धोके निर्मल होगे तुम यीशु में गुण यीशु में गुण पाप के कलंक से क्या साफ़ होगे तुम हमारे यीशु में है गुण ।। ४ यीशु के दास क्या बनोगे तुम यीशु में गुण यीशु में गुण हो रात और दिन उसकी जय बोलो तुम हमारे यीशु में है गुण ।। 351 (३५१) “Jesus meek and gentle.” 6. 5. 6. 5. St. Constantine or Caswell. १ यीशु दीन और कोमल पुत्र ईश्वर के प्रेमी मुक्तिदाता बिन्ती को सुन ले ।। २ पापों को कर क्षमा बेड़ी को खोल डाल तोड़ दे हर एक मूर्ति फिर न हो जंजाल ।। ३ कर निर्बन्ध और निर्मल मन में प्रेम भर दे स्वर्ग की ओर हे यीशु हमें खींच तू ले ।। ४ यात्रा में संग होके मार्ग तू आप बता जग के घोर अंधेर से स्वर्ग में ले पहुँचा ।। ५ यीशु दीन और कोमल ईश्वर पूत महान सुन हमारी बिन्ती त्राता दयावान ।। 352 (३५२) 7. 7. 7. 7. St. Bees or Harts. Chord - E | S- 6/8 | T-086 १ यीशु करुणानिधान तेरे लिये मेरा प्राण गिड़गिड़ाता है सदा मेरे मन में उतर आ ।। २ बार बार मैं पुकारता हूँ दिन और रात कराहता हूँ मेरे प्यारे उतर आ कब आह कब तू आवेगा ।। ३ जैसे ग्रीष्म के समय हरनी प्यासी होती है प्रभु तेरे लिये यूँ मैं भी अब तरसता हूँ ।। ४ जीवन तेरे बिना क्या तेरे बिना सुख कहाँ ? मेरा सुख है हर समय कि तू मेरा जीवन है ।। ५ प्रभु मेरे हाथों से जो कुछ मेरा है सो ले केवल तुझे मैं सदा अपना सब कुछ जानूँगा ।। ६ अपना कान दीनबन्धु धर मेरे मन में डेरा कर तब तो तेरे संग सदा मैं स्वर्गधाम में रहूँगा ।। 353 (३५३) “Cleansing for me.” १ यीशु में लोहू से मिलती मुझे मन की सफाई मन की सफाई पाता हूँ पापों की क्षमा उससे मन की सफाई मन की सफाई पापी हो ईश्वर से दूर गया था और मैं शैतान से भी हार गया था ख्रीष्ट पर विश्वास कर मैं छूट गया था मन की सफाई मन की सफाई ।। २ पापों को छोड़ कर मैं पाता हूँ सुख मन की सफाई मन की सफाई हो गया दूर मेरे पापों का दुःख मन की सफाई मन की सफाई ख्रीष्ट मुक्तिदाता विश्वास योग्य है वह मुझे ग्रहण अभी करता है पापों से छूट के अब त्राण मिला है मन की सफाई मन की सफाई ।। ३ यीशु मिटाता है मनों की त्रास मन की सफाई मन की सफाई शान्ति और सुख का है यीशु निवास मन की सफाई मन की सफाई बातें बहुत मैं समझता नहीं पर मैं विश्वास रखता ख्रीष्ट पर सही कि उसकी सामर्थ से मिलती मुझे मन की सफाई मन की सफाई ।। 354 (३५४) “Search me O God, my actions try.” F. BOTTOMB. १ हे ईश्वर मुझे खोज के जान और मुझे शक्ति दे कि मैं भी जानूँ अपना प्राण तेरे ही जांचने से ।। २ कौन अन्तर्यामी तुझे छोड़ जान सके हृदय को मुझ से घिना के मुंह न मोड़ पर मैल से मुझे धो ।। ३ मन के अंधेरे भागों में उजाला तू फैला पाप चीन्हने को खराई से मेरा विवेक जिला ।। ४ खोज अपनी तीक्ष्ण दृष्टि से जब लों कि औंधे मुँह मैं अतिशय दीनताई से न खेदित हो गिरूँ ।। ५ यों पड़ा हुआ सीखूंगा मसीह का प्रेम अपार ईश्वर महान से मिलने का है केवल वही द्वार ।। 355 (३५५) “Lord teach us how to pray aright.” JAMES MONTGOMERY, 1771-1854. १ हे प्रभु मुझे तू सिखा सिद्ध प्रार्थना करने को दयाल तू है और सामर्थी सहायक मेरा हो ।। २ तू मेरे पाप सब क्षमा कर दे मुझे धार्मिक ज्ञान और मेरे मन को शक्ति दे कि तुझ पर धरे ध्यान ।। ३ जब मुझे होवे सोग और रोग तब मेरा कर उपकार और अन्त में अपनी कृपा से तू मुझे पार उतार ।। 356 (३५६) Bhajan Tunes No. 62. कि अब मोरी सुरति मसीह जी से लागी । १ आतम दान यीशु ने दीना, प्रेम अगिन तब जागी । हिय धर्मातम वासु जु कीन्हा, कुमति छोड़ के भागी ।। २ जब से सुरति यीशु से लागी, लोग भये सब बागी । सब ने मिल के एका कीन्हा, दीनों मोहि तियागी ।। ३ कोई जग में भक्त कहावे, कोई बने बैरागी । प्रेम सहित यीशु गुण गावे, सोई संत बड़ भागी ।। 357 (३५७) Bhajan Tunes No. 63. करुणानिधान प्रभु यीशु सुनिये करुणा मेरी ।। १ तुम दीनन के हितकारी, नर देह आपनो धारी । तब मसीह नाम पायो, सब शिष्यन के मन भायो ।। २ हम दोषी दीन बिचारो, सब पापन ते निरवारो । तुम दयासिन्धु जग में, हम डूब रहे हैं अघ में ।। ३ नर प्राणन के रखवारो, भयमोचन नाम तिहारो । हम बूड़े जात या में, यह गान तुम्हारो गावें ।। ४ भवसिन्धु अगम अपारा, अब लीजे वेग उधारा । अब कृपा दृष्टि कीजे, तन मन अपनो कर लीजे ।। 358 (३५८) Bhajan Tunes No. 104. SABIR CHIMMAN LAL. Chord - D | S- Dholak/Ballad | T-088-094 १ भेष बदला क्या हुआ दिल का बदलना चाहिये । एक दो बातें नहीं बिल्कुल बदलना चाहिये ।। २ तन्दुरुस्ती के लिये कपड़े बदलना चाहिये । सत्य पर चलने के लिये दिल का बदलना चाहिये ।। ३ जो सुने बैबल से वह दिल से समझना चाहिये । दिल बदलने के लिये यीशु से मिलना चाहिये ।। ४ ऐ दिले पापों पर अपने आज रोना चाहिये । आज तो बेचैन हो पहलू बदलना चाहिये ।। ५ जो गये दुनिया से साबिर वे हमें मिलते नहीं । जो रहे उन को मसीह रूह पाक मिलना चाहिये ।। 359 (३५९) Bhajan Tunes No. 72. SABIR CHIMMAN LAL. मोरि मसीहा से लागी नजरिया । १ निर्गुण हूँ प्रभु गुण नहीं मुझ में, तेरे हाथ मोरि बारी उमरिया ।। २ दीनन पर किरपाल मसीहा, दीनबन्धु मोरि लीजो खबरिया ।। ३ धन सम्पत सपने सम जानो, ले जैहो क्या बांध गठरिया ।। ४ अगम अपार बहत है सागर, पार करो प्रभु मोरि नवरिया ।। ५ मानुष सौदा कर ले सबेरा, जग दो दिन की जान बजरिया ।। ६ साबिर पर प्रभु नेक निहारो, प्रभु यीशु तोरी प्यारी नजरिया ।। 360 (३६०) ग़ज़ल १ ऐ दिल तेरी बुराई को कब तक सहा करूँ । कौलों मसीह को छोड़ के किस का कहा करूँ ।। २ नाराज करके रूह मुकद्दस को बरमला । बहिरे फना की मौज में हर दम बहा करूँ ।। ३ जी चाहता है छोड़ के हुब्बे वतन की चाह । बस्ती में अपने प्यारे यीशु की रहा करूँ ।। ४ कहती है अनदलीब के बागे अरम में जा । हर शाख इ गुल पे बैठके मैं चहचहा करूँ ।। 361 (३६१) H. T. B. 129. SHUJAAT ALI. १ मेरा नहीं है कोई मददगार या मसीह । तू ही है हम सभों का मददगार या मसीह ।। २ अब ले खबर शिताब न कर बार या मसीह । फरियाद मेरी तुझसे है हर बार या मसीह ।। ३ तेरे सिवाय कोई नहीं यार या मसीह । बन्दा हूँ तेरे दर का गुनहगार या मसीह ।। ४ तू ही है आसियों का खरीदार या मसीह । अजबसकि हूँ गुनाह में गिरफ्तार या मसीह ।। ५ करता है आसियों को तू ही प्यार या मसीह । हम आसियों को तुझ से है गुफ्तार या मसीह ।। ६ तेरी तरफ सभों की है रफ्तार या मसीह । करता हूँ मैं गुनाहों का इकरार या मसीह ।। ७ हूँ मैं गुनाह में अपने शरमसार या मसीह। हरगिज न डालियो मुझे दर नार या मसीह ।। ८ शैतान मुझ से करता है तकरार या मसीह । रूह-उल-कुदुस को दे मुझे तलवार या मसीह ।। ९ आसी को है तुझी सेती दरकार या मसीह । तुझ बिन करेगा कौन मुझे पार या मसीह ।।
- Harvest 488-491 | Masihi Geet Sangrah
कटनी (Harvest) 488 (४८८) “Let us with a gladsome mind” 7. 7. 7. 7. Monkland or pleyel. JOHN MILTON. 1608-74. १ धन्य कहो परमेश्वर को सदा उस की स्तुति हो कि सनातन और अक्षय उसकी दया रहती है ।। २ धन्य कि हमें उस ने दी प्रतिदिन ज्योति सूर्य्य की कि (इत्यादि) ।। ३ धन्य कि देता चन्द्रमा रात पर करने प्रभुता कि (इत्यादि) ।। ४ धन्य कि मेंह बरसाता है जिस से अन्न बढ़ जाता है कि (इत्यादि) ।। ५ उस के कहे से हर खेत फलवंत है हमारे हेतु कि (इत्यादि) ।। ६ धन्य कि पूंजी अन्न की भी खलिहान में उस ने दी कि (इत्यादि) ।। ७ धन्य कि भोजन स्वर्ग का ही हमें देता है वही कि (इत्यादि) ।। ८ धन्य हैं ईश्वर का प्रसाद करो उस का धन्यवाद कि (इत्यादि) ।। 489 (४८९) 7. 7. 7. 7. Innocents or St. Bees. १ वर्षा हुई भाइयो ईश्वर को सराहियो वर्षा भी है उस का दान उसकी सामर्थ है महान ।। २ बुझी भूमि की है प्यास मगन हुए पेड़ और घास पशु पक्षी कीट पतंग सुखी हैं हमारे संग ।। ३ हे परमेश्वर दयावन्त तेरी कृपा है अनन्त तेरी दया है अपार नाम और गुण अपरम्पार ।। ४ प्रभु देख हम पापी जन भूखे हैं हमारे मन उन में कृपा तू बरसा और सब धर्म के फल उगा ।। 490 (४९०) “We plough the fields and scatter. ” P. M. Wir Pflugen. MATHIAS CLAUDIUS, 1740-1815. १ हम जोतते हैं और बोते बीज धरती पर बार बार और आशिष के हम होते ईश्वर से मांगनेहार वह ओस और मेंह बरसाता कि खेत की नमी हो वह हवा को चलाता और भेजता गरमी को ।। कोरस :- सारी अच्छी आशिष ऊपर से आती है सो धन्य हो हाँ धन्य हो पिता जां दयामय ।। २ चांद सूरज और सब तारे और जो कुछ जग में हो जो चहुँ ओर हमारे सम्भालता वह सब को अनाज और सब आधार को वही उगाता है मनुष्य और सब जानदार को वही खिलाता है ।। ३ ईश्वर पिता तेरा हम करते धन्यवाद कि तेरी अत्यन्त कृपा असीम है और अगाध दीन होके अब हम आते पास तेरे साथ सत्कार और भेंट को जो हम लाते सो तुझे हो स्वीकार ।। 491 (४९१) “O Lord of heaven and earth and sea. ” 8. 8. 8. 4. Alms giving. CHRISTOPHER WORDSWORTH, 1805-85. १ हे स्वामी स्वर्ग और जगत के हम तेरी स्तुति करेंगे हम क्या दे सकते हैं तुझे जो देता सब ।। २ पवन और घाम मनभावने और फल और फूल और सारे पेड़ है कटनी तेरी कृपा से जो देता सब ।। ३ प्रेम कुशल तू ने दिया है और जो कुछ जगत भर का है हम क्यों न करें तेरी जय जो देता सब ।। ४ और तू ने भेज के पुत्र को इस जग के लिये दिया है और उस के साथ भी सभों को तू देता सब ।। ५ तू आत्मा हमें देता है जो जीवनदान और अक्षय और उसके वर उंडेलता है हम सभों पर ।। ६ पापमोचन तुझ से मिला है और स्वर्ग का भी अमित निश्चय अब तुझे हम क्या दे सकें जो देता सब ।। ७ जो कुछ भी हम तुझे देते हैं सो क्षय न कभी होता है तू उसे ले वह तेरा है जो देता सब ।।
- The Holy Spirit 168–181 | Masihi Geet Sangrah
### पवित्र आत्मा (The Holy Spirit) #### 168 (१६८) *“Come Spirit source of light.”* *8. 7. 8. 7. Evening Prayer or Batty.* *B. BEDDOME.* १ ज्योतिर्मय पवित्र आत्मा तेरे बिना सब अंधकार । मेरे मन में ही उजाला तू उजाला करनेहार ।। २ पाप के मैल से दे छुटकारा तन और मन पवित्र कर । तेरा मंदिर मैं बन जाऊँ अपना बास तू मुझमें कर ।। ३ ईश्वर से जब प्रार्थना करूँ प्रार्थना करना तू सिखला । धर्म पुस्तक जब मैं पढूँ मुझे उसका अर्थ बतला ।। ४ हे सहायक उपदेशक मेरे साथ तू सदा हो । सर्वदा तू मन रह के मार्ग दिखा मुझ अंधे को ।। #### 169 (१६९) *“The Comforter has Come.”* *12. 12. 12. 6. D. S. S. 198.* *F. BOTTOME.* १ जहाँ मनुष्य हो वहाँ संदेश करो जहाँ मनुष्य का मन निराश और दुःखित हो सभों के कानों में आनंद का शब्द कहो एक शान्तिदाता है ।। कोरसः- एक शान्तिदाता है एक शान्तिदाता है पवित्र आत्मा को पिता ने दिया है जहाँ मनुष्य हो वहाँ संदेश करो एक शान्तिदाता है ।। २ अंधेरा गया है और सूर्य का उदय अब हुआ जिसको देख मन होता है निर्भय और शोक की आंधी भी शान्त हो थम गई है एक शान्तिदाता है ।। ३ वह सर्वशक्तिमान चढ़ाके अपना प्राण मनुष्य को देता है आरोग्यता का दान छुटकारा पाने का है बंदीगृह में गान एक शान्तिदाता है ।। ४ वह प्रेम अथाह अपार अनुग्रह निर्विकार मैं कैसे शब्दों से बताऊँ उन का सार अब मुझमें तारणहार के गुण दिखानेहार एक शान्तिदाता है ।। ५ आनंद अब स्वर्ग में हो स्वर्ग दूत प्रचार करो और जग के सारे संत यह सुन आह्वादित हो अब मीठी वाणी से सराहों यीशु को वह शान्तिदाता है ।। #### 170 (१७०) *8. 7. 8. 7. 7. 7. St. Leonard or Irby.* *HEINRICH HELD.* १ जीवित आत्मा पास हमारे अनंत सच्चे ईश्वर आ तेरी सामर्थ हम में भरे होवे प्रबल सर्वदा मन के अंधियारे में ज्योत चमकीली देखने दे ।। २ भले पथों को दिखा दे उन पर हमें नित ले चल सब कुछ आगे को सरका दे कि हम दौड़ें ही सबल फिसले चरण होवे पाप मन में दे तब पश्चाताप ।। ३ ज्ञान परामर्श सोच विचार से पूर्ण कर बुद्धि और हृदय कि हम त्यागें मन और कर से जो कुछ तू न चाहता है और हम छूटें भ्रांति से तुझे पहचानने में ।। ४ तेरी साक्षी होवे मन में कि हम ईश्वर के संतान उसको ताके प्रत्येक क्षण में दुःख में रहें धीरजवान पिता से जो ताड़ना है मेरी करती है भलाई ।। ५ ईश्वर निकट जब हम आते हमें दान कर अपनी प्रीत जब हम बिन्ती करने जाते तेरी कृपा हो प्रतीत जब हमारा मन निराश तब तू उसमें भर दे आश ।। ६ शत्रु हमको पकड़ा चाहे तू हमारी रक्षा कर दुःख ओ निन्दा हम भी सहें हममें साहस धीरता भर जब संदेह हम करते हैं होवे वचन का निश्चय ।। #### 171 (१७१) *“Holy Spirit faithful guide.”* *7. 7. 7. 7. D. S. S. 194.* *M. M. WELLS.* १ धन्य आत्मा सत्य अगुवा शिष्यों पास तू है सदा धर के हाथ हमें ले चल यह संसार है मरुस्थल थके नित आनन्दित हो सुन उस मीठे वचन को प्रेम से कहता यात्री आ पीछे चल मैं हूँ अगुवा ।। २ सब से उत्तम मित्र तू सदा पास रह हे प्रभु शक में हमको तू न छोड़ दुःख में हमसे मुंह न मोड़ बादल जब आ घेरते हैं आंधी से दिल है बेचैन प्रेम से कहो यात्री आ पीछे चल मैं हूँ अगुवा ।। ३ प्रगट कर तू अपना प्यार चारों ओर जब है अंधकार जब कुछ नहीं रहता पास सिवाय स्वर्ग आनंद की आस मृत्यु छाया बीच में जब कष्ट सहित हम चलते तब प्रेम से कहो यात्री आ पीछे चल मैं हूँ अगुवा ।। #### 172 (१७२) *“Our blest Redeemer' ere He breathed.”* *8. 6. 8. 4. St. Cuthbert.* *HARRIET AUBER, 1783-1862.* १ हमारे प्रिय प्रभु ने जब छोड़ा जगत को एक शान्तिदायक भेजा तब कि अगुवा हो । २ पवित्रआत्मा तब उतरा है धन्य वह मेहमान वह दिल को करता घर अपना और शुद्ध मकान । ३ वह अपनी शान्तमय वाणी से सब भय को करता दूर और उसको स्वर्गीय ज्योति से है दिल भरपुर । ४ सब भले काम और शुद्ध विचार सब बुद्धि और दृढ़ता सब ज्ञान का शिक्षक वह अपार और शुद्ध कर्त्ता । ५ पवित्रआत्मा दृष्टि कर निर्बल संतानों पर हमारे मन में उतर आ और वास तू कर । #### 173 (१७३) *“Gracious spirit holy ghost.”* *7. 7. 7. 5. Charity or Capetown.* *CHRISTOPHER WORDSWORTH, 1805-85.* १ प्रिय आत्मा सुन तू ले तेरे और सब दानों से प्रेम ही श्रेष्ट कहा तू ने दे पवित्र प्रेम ।। २ प्रेम दयालु धीरजवान दीन न करता है अपमान मृत्यु से भी है बलवान दे पवित्र प्रेम ।। ३ होवेगा जब पुनरुत्थान टलेगा तब आगमज्ञान प्रेम ही नहीं है नाशमान दे पवित्र प्रेम ।। ४ आशा प्रेम विश्वास जो है तीनों में पूर्ण एकता है प्रेम ही श्रेष्ट इन सब में है दे पवित्र प्रेम ।। ५ प्रिय आत्मा सुन तू ले अपने पंख की चमक से हमों पर अब पड़ने दे प्रेम पवित्र प्रेम ।। #### 174 (१७४) *“L. M. D. -- St. Serf or Sweet Hour.”* *MARTIN LUTHER, 1483-1546.* १ परमेश्वर प्रभु धर्मात्मा हे शान्तिदाता उतर आ दे हमको अपने उत्तम दान हाँ उनसे भर दे हर एक प्राण और हम में फूँक दे जीवित स्वास कि हममें उत्पन्न हो विश्वास और अपने प्रेम की अग्नि से हर अन्तःकरण जलने दे ।। २ हे इष्ट प्रकाश यह मन संवार हे गुरु श्रेष्ठ हमें सिंगार पवित्र वचन अर्थ और जड़ खोल दे और हम पर प्रगट कर दे हमको पाप से पश्चाताप यीशु के रक्त से हम पर छाप पिता से हमें दे मिला और बालक का सा मन दिला ।। ३ हे प्रबल आत्मा इष्ट रखवाल बलवान और स्थिर कर और संभाल कि अंत लों तेरी सेवा में निर्भय और अचल हम रहें शरीर की कामना दबा मार संसार के जाल से नित्य उधार शैतान पर हमें जय दिला मृतकाल में स्वर्ग का धाम दिला ।। #### 175 (१७५) *“Breathe on me breath of God.”* *S. M. -- Holyrood or Franconia.* *EDWIN HATCH, 1835-89.* १ हे आत्मा जीवन दे मन मेरा नया कर । मैं चाहूँ वह जो तू चाहे और बनूँ अनुचर ।। २ हे आत्मा जीवन दे मन जब लों शुद्ध न हो । हो मेरी चाह भी तेरी सी करने और सहने को ।। ३ हे आत्मा जीवन दे तब नाश न होऊँगा । जब लों न यह सांसारिक देह प्रकाशित हो चमके ।। ४ हे आत्मा जीवन दे तब नाश न होऊँगा । पर तेरे अनंत जीवन में सिद्ध हो नित जाऊँगा ।। #### 176 (१७६) *“Come holy spirit heavenly dove.”* *C. M. -- Marlow or Bedford.* *ISSAC WATTS, 1674-1748.* १ हे जीवनदाता शक्तिमय जिला हम सभों को । हमारे ठंडे मनों में तू स्वर्गीय अग्नि हो ।। २ वृथा सब गान हमारे हैं और राग भी वृथा सब । तुझ बिन होशना की झंकार और भक्ति शुद्ध है कब ।। ३ मृतक की नाईं जीना तो हमारा है निष्फल । हमारा प्रेम है शक्तिहीन पर तेरा है प्रबल ।। ४ हे जीवनदाता शक्तिमय जिला हम सभों को । कि ख्रीष्ट के प्रेम की अग्नि से यह मन प्रज्वलित हो ।। #### 177 (१७७) *“Come thou holy paraclete.”* *Chord - F/E | S- Waltz | T-124* १ हे पवित्र आत्मा आ और उजाला स्वर्ग का सा अपनी कृपा से चमका ।। २ उत्तम शान्तिदाता आ प्राण के प्रिय पाहुन आ हमें ढाढ़स अब बंधा ।। ३ श्रम में हमको विश्राम छाया हो जब पड़े घाम शोक और रोना सब मिटा ।। ४ हे पवित्र ज्योति अब भर दे हमें सब के सब सारा मन उजाला कर ।। ५ बिना तेरे उपकार हम मनुष्यों का क्या सार सब कुछ बिगड़ा सर्वथा ।। ६ धो ले जो कुछ मैला है सींच तू जो कुछ सूखा है चंगा कर जो घायल है ।। ७ जो कठोर है तू झुका जो निर्जीव है तू जिला भटके हुए मार्ग पर ला ।। ८ अपने प्रिय लोगों को आसरा रखनेहारों को सद्गुण के बरदान दिला ।। ९ धर्म की योग्यता तू दे मृत्यु समय मुक्ति दे स्वर्ग में सर्वदा सुख दे ।। #### 178 (१७८) *“Hover over me holy spirit.”* *Tune of Ruh Ilah Ruh Mukaddas.* *R. S. MANDRELLE, 1907-1971.* १ हे पवित्र आत्मा आके मेरे मन को शान्त तू कर अपना कर यह मन का मंदिर आके उस को कर भरपुर ।। कोरसः- कर भरपुर कर भरपुर अभी उसको कर भरपुर अपना कर यह मन का मंदिर आके उसको कर भरपुर ।। २ तेरा काम समझ न सकता तौभी मुझ में होता है मुझ को है अत्यन्त आवश्यक बास कर मुझ में हर समय ।। ३ मैं निर्बल अत्यन्त निर्बल हूँ मुझ से तू न होवे दूर हे प्रबल सामर्थी आत्मा बल से मुझको कर भरपुर ।। ४ शुद्ध कर शान्ति और आशिष दे हर एक पाप कर मुझसे दूर धन्य तेरा तू बचाता मुझ को करता है भरपुर ।। पिछले पद का कोरसः- हूँ भरपुर हूँ भरपुर अभी तुझ में हूँ भरपुर तेरा है यह मन का मंदिर तुझ से हुआ है भरपुर ।। #### 179 (१७९) *8. 8. 7. 8. 8. 7. 4. 8. 4. 8. Frankfort.* *MIEHAEL SOHIRMER, 1606-73.* १ हे पावन आत्मा उतर कर हमारे हृदय डेरा कर तू आ हे मन की ज्योति और अपने किरण कृपा से तू हम में चमकने दे- हे मन के तू लाल मोती । विशाल निहाल, अमित जीवन नित्य नूतन तुझ से पाते, जो विश्वास से तुझ पास आते ।। २ सच्चाई का तू सोता है, विश्वासी में जो बहता है ।। सो तरंग हम पर आवे । अनुग्रह कर निज मंडली पर कि मेल और प्यार में बढ़ती हो, और हम कहीं फैल जावे । यह वर तू दे की आशिष हम सभों पर हाल्लेलूयाह तेरी स्तुति सदा गावें ।। ३ कर स्वर्गीय सामर्थ हमें दान, कि जिससे होवें बलवान पवित्र युद्ध लड़ाई में तुझसे पाके रक्षा आड़ पराक्रम अपने शत्रु पर, शान्ति होवे हर समय में । दुख में सुख में, शान्तिदायक रह सहायक नित्य हमारे, जिससे दूर हो, जोखिम सारे ४ यह दे कि हम पवित्र होवें बितावें अपने जीवन को । हे आत्मिक बल हमारे, कि आगे हम को हो अज्ञात शरीर का अभिलाष आह्वाद, काम मृतक उसके सारे । खींच ले जीत ले, आत्मा प्यारे मन हमारे जग विलासी, कि हम होवें स्वर्ग-निवासी ।। #### 180 (१८०) *“Come Holy Ghost our souls inspire.”* *L. M. -- Melcombe or Tallis' Canon.* *CHARLES WESLEY, 1707-88.* १ हे शान्तिदाता अब उतर और हम में स्वर्गीय अग्नि भर । तू अभिषेक है करनेहार सातगुणा दात तू देनेहार ।। २ तू ऊपर से उंडेलता है सत्य जीवन शान्ति प्रेम अक्षय । मिटा अनंत उजाले से धुंधलेपन को हम सभों के ।। ३ हम व्याकुल हैं विराम तू दे अनुग्रह की भरपूरी से । दे बैरी से बचाके आड़ हाँ दुख और सुख में तू संभाल ।। #### 181 (१८१) भजन *P. D. GOTTLIEB.* टेकः- शुचि आत्मा तुम को धन्य-धन्य हो । १ तुम हो शान्ति कुशल के दायक । सत्य स्वरूप सुपथ के नायक ।। भक्तन ने दुःख माहि सहायक । ख्रीष्ट कीर्ति दरपन हो ।। २ पेन्तिकोस्त के दिन ज्यों आये । जीभ अग्निमय शक्तिहि लाये ।। शिष्यन के मन माहि भराये । तैसहि तब आवन हो ।। ३ विश्वासिन के संग रहो तुम । बुद्धि ज्ञान शुभ काम छहों तुम ।। पाप श्राप पाखंड दहों तुम । दास धर्म जन मन हो ।।
- The Lord’s Supper 209–218 | Masihi Geet Sangrah
प्रभु भोज (The Lord's Supper) 209 (२०९) 7s. Zurich or Ratisbon. JOHANN FRANCK, 1677. १ अपने को हे प्राण संवार पाप का बंधन तोड़ उतार निकल आ उजाले में अपनी ज्योति चमकने दे क्यों जो तेरा त्राता है तेरे कने आता है ।। २ सिद्ध हो दुलहिन के समान उसकी भेंट को धन्य मान मन के फाटक को दे खोल उससे तू यह बातें बोल हे मन दूल्हा भीतर आ मेरे पास तू रह सदा ।। ३ कांपते कांपते कर हुलास दया देख है उसके पास मन्ना है चंगेरी में जीवित पान कटोरे में और वह कहता है कि ले यह है मेरा रक्त और देह ।। ४ बूझ के बाहर और अपार हे प्राण हितू यह अधार पर विश्वास मैं करता हूँ और यों निकट आता हूँ तेरी इच्छा है कि आ खा और पी और तृप्त हो जा ।। ५ मैं अयोग्य हूँ और अधमय सच तथापि हो सदय तो मैं जाऊँ किसके पास जो न खावे तेरा मांस तेरे रक्त को पीवे ना सो न जीवन चखेगा ।। ६ प्रीतम त्राणी मेरी सुन अपनी मृत के सारे गुण मेरे मन में जीवन भर इसी भोज से प्रगट कर और तब स्वर्ग बियारी में मुझे भोगी होने दे ।। 210 (२१०) “There is a fountain filled with blood.” C. M. -- S. S. SS. 129 or Remember Me. WILLIAM COWPER, 1731-1800. Chord - A# | S- Ballad | T-078 १ इम्मानुएल के लोहू से एक सोता भरा है जब उसमें डूबते पापी लोग रंग पाप का छूटता है ।। २ वह डाकू क्रूस पर उसे देख पाप मोचन पाया तब हम वैसे दोषी उसी में पाप अपना धोवें सब ।। ३ जब तक मसीह की मंडली पूर्ण सब पाप से बच न जाय तब तक उस अनमोल रक्त का गुण न कभी होगा क्षय ।। ४ मैं जब से तेरे बहते घाव विश्वास से देखता हूँ मोक्षदायी प्रेम को गा रहा और गाऊँ मरने लों ।। ५ और जब यह लड़खड़ाती जीभ कबर में चुप रहें तब तेरी स्तुति करूँगा और मीठे रागों से ।। 211 (२११) “I hear thy welcome voice.” S. S. S. 475. L. HARTSOUCH. Chord - C | S- "---"/E.Movie | T- "---" १ उस मीठी वाणी को, मैं सुनता हूँ तेरी बुलाती पास उस सोते के, जो बहता क्रूस से ही ।। कोरसः- आता तेरे पास, आता हूँ मसीह धोके शुद्ध कर सोते से, जो बहता क्रूस से ही ।। २ आता अशुद्ध निर्बल, देख मेरी दशा को मलीनता से कर शुद्ध और साफ़, कि एक भी दाग न हो ।। ३ पूरा पिया Vश्वास, तू देता है मसीह पूरी आशा और चैन विश्राम, इस जग और स्वर्ग में भी ।। ४ और मेरे मन में तू, अपने निज आत्मा से सब अच्छे गुणों को उपजा, और सिद्ध तू कर मुझे ।। ५ तू अपने भक्तों को, विश्वास दिलाता है कि अपनी हर प्रतिज्ञा को, तू पूरी करता है ।। ६ धन्य पावन रुधिर को, धन्य मुक्तिमय दया को हमारे प्रभु यीशु को, धन्य अब और सदा हो ।। 212 (२१२) “Twas on that night.” L. M. -- Rockingham. १ जिस रात को पकड़ा जाता था कि काठ के क्रूस पर मारा जाय उस रात मसीह ने रोटी ली और करके धन्यवाद तोड़ दी ।। २ वह शिष्यों से यों बोला तब देह मेरी लेओ खाओ सब और जब जब ऐसा करते हो तब मेरा स्मरण सदा हो ।। ३ कटोरा भी उसने उठा फिर धन्य माना पिता का तब उसे दिया उनके हाथ और बोला अत्यन्त प्रेम के साथ ।। ४ यह नये नेम का लोहू है जो मेरी देह से बहता है तुम पीयो सब विश्वासियों कि मोक्ष की पूरी आशा हो ।। 213 (२१३) “Nothing but the blood of Jesus.” S. S. S. 874. B. LOWRY. Chord - E | S- Ballad | T-082 १- मेरे पाप क्या धोवेगा, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू मुझे शुद्ध क्या करेगा, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू ।। कोरसः- वह कैसा सोता है, हो उसके गुण की जय न दूसरा है उपाय, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू ।। २- क्या दे सकता निर्मलता, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू कारण क्या है क्षमा का, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू ।। ३- कारण है मिलाप का क्या, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू कुछ न मेरी योग्यता, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू ।। ४- यह है मेरी पूरी आस, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू यह है धर्म मेरे पास, प्रभु यीशु ख्रीष्ट का लोहू ।। 214 (२१४) “Not Worthy Lord to gather up the crumbs.” 18s. Eventide. १ मैं नहीं योग्य हूँ प्रभु लेने को चूरचार जो गिरते तेरी मेज पर से देख ले इस थकित अधम पापी को जो आता तेरे ही बुलाने से ।। २ मैं तेरा पुत्र के होने योग्य नहीं न सब से नीचे मेज पास बैठने के मैं दूर तक भटका धोखा खाया भी अब मांगता केवल क्षमा तुझी से ।। ३ केवल एक बात हे प्रभु मुझ से बोल तो मैं फिर साहस पाके लडूंगा इस बात को मन में रख मैं बिना डोल जग और शैतान के क्रोध को सहूँगा ।। ४ है दया करना तेरा अधिकार दया असीम अगाध तू करता है हे प्रभु क्षमा कर मुझ दुराचार कृपा दिखाना गौरव तेरा है ।। ५ तू मुझसे कहता आके ले विश्राम मैं छेदित पाँवो पास जल्दी आता हूँ तू मुझे लाता है बीच अपने धाम यहाँ मैं तेरा भोजन करता हूँ ।। ६ आह मेरी स्तुति केवल है विनय और मेरी चाह तुझ में लीन होती है मुझ में बास कर हे प्रभु हर समय साथ खाने दे और साथ खा कृपामय ।। 215 (२१५) “Rock of Ages.” 7s Toplady or Redhead 76. A. M. TOPLADY, 1740-78. १ यीशु मेरा शरणस्थान तुझ में मेरा है कल्याण तेरे छिदे पंजर से लोहू जल जो बहे थे मेरे पाप को धोते हैं हर कलंक को खोते हैं ।। २ भला जो मैं करता हूँ आँसू जो मैं भरता हूँ धर्म का कर्म जो मेरा हो मेरे पाप छुड़ाने को तनिक काम न आता है केवल तू छुड़ाता है ।। ३ छूछे हाथ मैं आता हूँ तेरा क्रूस मैं पकड़ा हूँ मेरी सब मलीनता को अपने लोहू से तू धो नंगा हूँ अधम लाचार धर्म से मुझे तू संवार ।। ४ सांस जब तलक चलती हो वा जब सांस निकलती हो जब मैं उड़ूँ लोकों पार होगा जब मेरा विचार यीशु मेरे शरणस्थान तुझ में मेरा है कल्याण ।। 216 (२१६) “O King of mercy, from Thy throne on high.” 10. 10. Coena Domini or Pax Tecum. १ हे कृपा नाथ कान धरके स्वर्ग से हमारी सुन और हमें दर्शन दे ।। २ रक्त से बचाई हुई भेड़ों को चराके नित्य उनका रखवाला हो ।। ३ हे प्रभु अपने मरने से दिला हम मृतकों को जीवन सदा का ।। ४ तू स्वर्गीय रोटी है हम तुझ से खायें और नित्य उस आत्मिक भोज से तृप्त हो जावें ।। ५ पापी का मित्र आश्रहीन की आस तू है और मन का सुख भी तेरे पास ।। ६ अब आके हमें तू आनन्दित कर आँख तेरी रहें अपने दासों पर ।। ७ मेघ में हर दिन हमारे आगे जा और रात को आग से सदा राह दिखा ।। ८ संग सदा चल रह जहाँ हम रहें संभाल इस जीवन भर और मृत्यु में ।। 217 (२१७) L. M. Hamburg or Rockingham. १ हे प्रभु तेरी आज्ञा से हम मिल के बैठते खाने को तू जैसा बोला शिष्यों से कि मुझे स्मरण यूँ करो ।। २ हाँ यीशु तुझे जीवन भर निरंतर स्मरण करेंगे और तेरी उत्तम सेवा पर तन मन आनन्द से सौंपेंगे ।। ३ दाखरस और रोटी का दृष्टान्त निज देह का तू ने दिया है रक्त तेरा शान्ति देता है देह तेरा सच्चा भोजन है ।। ४ तू दे हम सबको सत्य विश्वास न खाने में निष्फलता हो और कृपा कर कि तेरे दास सब पावें स्वर्गीय भोजन को ।। 218 (२१८) Bhajan Tunes No. 26. PRABHU DAS. रुधिर अमोल यीशु जी को भाई । १ मुक्ति अमोल पदारथ अघसे - आदम दीन गंवाई ।। २ ईश्वर पुत्र दयाल हमारे - हम हित मुक्ति कमाई ।। ३ भटके खोजन यीशु आये - मानुष देह बनाई ।। ४ अपना लोहू बदला देके - हम हित मुक्ति कमाई ।। ५ जैसे गिरि से गंगा उतरी - मानुष पियन नहाई ।। ६ पापिन तारण कारण यीशु - अपना रुधिर बहाई ।। ७ रुधिर अमोल यीशु का जग में - मुक्ति हेतु ठहराई ।। ८ धारा पाँच मसीहा जी ने - बादल सम बरसाई ।। ९ दिवस तीसरे यीशु जी ने - मृत्यु पर जय पाई ।। १० प्रभुदास की बिन्ती प्रभु जी - लीनो माहि बचाई ।।